Bokaro Thermal : ऐश पौंड संकट से बोकारो थर्मल की 500 मेगावाट यूनिट ठप, बिजली उत्पादन ठप

Bokaro Thermal में ऐश पौंड भरने और छाई उठाव बंद होने के कारण डीवीसी की 500 मेगावाट क्षमता वाली यूनिट बंद करनी पड़ी। इससे बिजली उत्पादन प्रभावित हुआ और प्रतिदिन करोड़ों रुपये का नुकसान होने की आशंका बताई जा रही है।

Bokaro Thermal : झारखंड के बोकारो थर्मल स्थित डीवीसी के ‘ए’ पावर प्लांट की 500 मेगावाट क्षमता वाली यूनिट को शुक्रवार की मध्यरात्रि बंद करना पड़ा। बताया गया कि ऐश पौंड में राख भर जाने और छाई का उठाव नहीं हो पाने के कारण यह फैसला लिया गया। यूनिट बंद किए जाने के समय लगभग 120 मेगावाट बिजली का उत्पादन हो रहा था। अचानक यूनिट ठप होने से बिजली उत्पादन पर असर पड़ा है और कई राज्यों की आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।

ऐश पौंड भरने से बढ़ा संकट

नूरी नगर स्थित दोनों ऐश पौंड पूरी तरह भर चुके हैं। पिछले 28 फरवरी से छाई उठाने का काम बंद है, जिससे राख जमा होती चली गई। स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि प्रबंधन के पास यूनिट बंद करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा। प्लांट प्रबंधन द्वारा अस्थायी व्यवस्था करते हुए राख को रोकने के लिए ऊंची-ऊंची दीवारें बनाई जा रही हैं, लेकिन इससे समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकल पा रहा है।

ठेकेदार विवाद से रुका छाई उठाव

सूत्रों के अनुसार छाई उठाने वाली कंपनी ‘सारण’ द्वारा हाईवा मालिकों का दो महीनों का भुगतान नहीं किया गया। इसके कारण वाहन मालिकों ने काम बंद कर दिया। दूसरी ओर, एक अन्य कंपनी जेडईएनआई भी काम नहीं कर रही है। भुगतान विवाद के कारण 28 फरवरी से ही छाई उठाव पूरी तरह ठप पड़ा है। इस कारण ऐश पौंड तेजी से भर गए और संकट गहरा गया।

2019 जैसी घटना की आशंका

स्थानीय लोगों में इस स्थिति को लेकर चिंता बढ़ गई है। दोनों ऐश पौंड में अब लगभग कोई जगह नहीं बची है। अगर राख का दबाव बढ़ा तो 2019 जैसी घटना दोहराने का खतरा बना हुआ है। उस समय ऐश पौंड टूटने से बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ था और पर्यावरणीय नियमों के उल्लंघन पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने डीवीसी पर जुर्माना भी लगाया था।

राख उड़ने से बढ़ रहा प्रदूषण

ऐश पौंड में राख को रोकने के लिए बनाई गई ऊंची दीवारों से एक नई समस्या पैदा हो गई है। दिन में तेज हवा चलने पर राख उड़कर आसपास के इलाकों में फैल रही है।

बिजली आपूर्ति और आर्थिक नुकसान

यूनिट बंद होने से डीवीसी को हर दिन लगभग 5 करोड़ रुपये के नुकसान का अनुमान है। बोकारो थर्मल से झारखंड के अलावा पंजाब, दिल्ली और कोल इंडिया को भी बिजली आपूर्ति की जाती है। उत्पादन रुकने के बाद अब मांग पूरी करने के लिए डीवीसी को बाहर से महंगी बिजली खरीदनी पड़ सकती है, जिससे आर्थिक बोझ और बढ़ेगा।

जांच के लिए कोलकाता से टीम भेजी गई

मामले को गंभीरता से लेते हुए डीवीसी प्रबंधन ने जांच के आदेश दिए हैं। ईडी ऑपरेशन पीपी साह ने बताया कि स्थिति की समीक्षा के लिए कोलकाता मुख्यालय से वरिष्ठ जीएम संजय सिन्हा और सुजीत कारक को बोकारो थर्मल भेजा गया है। जांच रिपोर्ट मिलने के बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।

उन्होंने कहा कि पावर प्लांट से पंजाब सहित कई राज्यों को बिजली आपूर्ति होती है और यूनिट बंद रहने से राष्ट्रीय स्तर पर नुकसान हो रहा है। ऐसे मामलों में जिम्मेदारी तय की जाएगी।

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