Mandatory Hijab Countries: ईरान में महिलाओं के लिए हिजाब पहनना अनिवार्य है और कानून तोड़ने पर सख्त सजा मिलती है। ईरान-इज़राइल युद्ध के बीच यह मुद्दा फिर से सुर्खियों में है, क्योंकि ईरान की सरकार पर महिलाओं की आजादी छीनने का आरोप लगता है। लेकिन सिर्फ ईरान ही नहीं, दुनिया के कुछ और मुस्लिम देशों में भी हिजाब या बुर्का सार्वजनिक जगहों पर पहनना कानूनी रूप से जरूरी है। इन देशों में नियम तोड़ने पर जुर्माना, जेल या अन्य सख्त सजा हो सकती है। हालांकि कुछ देशों में अब नियम ढीले हो गए हैं। आइए जानते हैं इन देशों के बारे में विस्तार से।
ईरान: सबसे सख्त नियम/Mandatory Hijab Countries
ईरान में 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद से 1981 में हिजाब अनिवार्य कर दिया गया। सभी महिलाओं (देशी और विदेशी) को सार्वजनिक जगहों पर ढीले कपड़े और सिर ढकने वाला स्कार्फ (हिजाब) पहनना पड़ता है। कानून तोड़ने पर मोरैलिटी पुलिस गिरफ्तार करती है, जुर्माना लगाती है या जेल भेजती है। हाल के सालों में नए ‘हिजाब एंड चेस्टिटी लॉ’ से सजा और सख्त हो गई है – 15 साल तक की जेल या मौत की सजा तक की बात आई है। ईरान में महिलाएं विरोध भी करती हैं, लेकिन सरकार सख्ती बरतती है।

अफगानिस्तान: तालिबान के नियम सबसे कड़े
अफगानिस्तान में तालिबान शासन (2021 से) के बाद हिजाब और बुर्का पूरी तरह अनिवार्य है। 2022 में कानून बनाया गया कि महिलाओं को सार्वजनिक जगहों पर बुर्का (पूरा चेहरा ढकने वाला) या नकाब पहनना होगा। स्कूल, अस्पताल, सरकारी दफ्तरों में बिना पूर्ण कवरेज के एंट्री नहीं। उल्लंघन पर कड़ी सजा – मारपीट, जेल या सार्वजनिक अपमान। तालिबान की वर्च्यू एंड वाइस पुलिस इसे लागू करती है। अफगानिस्तान में महिलाओं की आजादी बहुत सीमित है।
इंडोनेशिया के आचे प्रांत में शरिया कानून लागू
इंडोनेशिया पूरे देश में हिजाब अनिवार्य नहीं है, लेकिन आचे प्रांत में शरिया कानून लागू है। यहां मुस्लिम महिलाओं को सार्वजनिक जगहों पर हिजाब और शालीन कपड़े पहनना जरूरी है। शरिया पुलिस गश्त करती है और नियम तोड़ने पर जुर्माना या कोड़े मारने जैसी सजा देती है। बाकी इंडोनेशिया में यह वैकल्पिक है।
सऊदी अरब: पहले सख्त, अब ढीला
सऊदी अरब में पहले अबाया (काला लंबा चोगा) और हिजाब अनिवार्य था। लेकिन 2018-2019 में विजन 2030 के तहत नियम ढीले किए गए। अब कानूनी रूप से अनिवार्य नहीं, लेकिन सामाजिक दबाव और अपेक्षा बनी हुई है। पुलिस अब गिरफ्तारी नहीं करती, लेकिन कुछ जगहों पर अभी भी सख्ती दिखाई जाती है।
अन्य देशों में स्थिति क्या है?
कई मुस्लिम देशों में हिजाब अनिवार्य नहीं है:
- इराक: कोई राष्ट्रीय कानून नहीं। धार्मिक शहरों (नजफ, करबला) में सम्मान के लिए पहनना आम है, लेकिन बगदाद में बिना हिजाब के घूमना संभव।
- सीरिया: पहले कोई अनिवार्यता नहीं थी। 2024-2025 में नई सरकार ने हिजाब अनिवार्य करने पर रोक लगा दी, महिलाओं को आजादी दी।
- सूडान: 2019 की क्रांति के बाद शरिया के सख्त नियम हटाए गए, अब हिजाब कानूनी बाध्यता नहीं।
- यमन: कोई लिखित कानून नहीं। युद्ध और कबायली इलाकों में सामाजिक दबाव से पहनना पड़ता है। हूती नियंत्रित क्षेत्रों में ईरान जैसी सख्ती।
- ब्रुनेई: शरिया लागू है, लेकिन हिजाब पूरी तरह अनिवार्य नहीं बताया जाता।
कुछ देशों में उल्टा है – जैसे ताजिकिस्तान, कजाकिस्तान में हिजाब पर प्रतिबंध या स्कूलों में बैन। यूरोप में भी कई देशों (फ्रांस, ऑस्ट्रिया) में फेस कवर या स्कूलों में हिजाब पर बैन है।
निष्कर्ष
ईरान-इज़राइल-अमेरिका युद्ध के बीच ईरान की महिलाओं पर सख्त ड्रेस कोड वैश्विक बहस का विषय है। कई लोग कहते हैं कि यह व्यक्तिगत आजादी का सवाल है। जहां हिजाब अनिवार्य है, वहां विरोध होता है, लेकिन कुछ जगहों पर महिलाएं खुद इसे चुनती हैं। दुनिया में हिजाब पर नियम अलग-अलग हैं – कहीं मजबूरी, कहीं आजादी।










