Deepika Adhana Pilot: हरियाणा के फरीदाबाद की 23 साल की युवा पायलट दीपिका अधाना ने हाल ही में एक ऐसे मिशन को अंजाम दिया, जो साहस, जिम्मेदारी और देशभक्ति की जीती-जागती मिसाल बन गया। मध्य पूर्व में अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच, जब हालात जंग जैसे हो गए थे, तब दीपिका ने एक स्पेशल रेस्क्यू फ्लाइट उड़ाई और 169 भारतीय नागरिकों को संयुक्त अरब अमीरात (UAE) से सुरक्षित भारत वापस लौटाया। यह मिशन इसलिए भी खास था क्योंकि पूरी फ्लाइट का क्रू सिर्फ महिलाओं का था।
अचानक जाना पड़ा मिशन पर, परिवार से की भावुक बात/Deepika Adhana Pilot
6 मार्च 2026 को सुबह करीब 10:15 बजे दीपिका को एयर इंडिया एक्सप्रेस से अचानक आदेश मिला कि उन्हें रास अल खैमाह (Ras Al Khaimah) एयरपोर्ट जाना है। यह इलाका UAE में है और वहां तनाव के कारण कई भारतीय फंसे हुए थे। हालात इतने नाजुक थे कि दीपिका के मन में डर भी था। उन्होंने अपने परिवार से बात की और मजाक-मजाक में भावुक होकर कहा,
की मम्मी, चाचू… आखिरी बार देख लो, शायद फिर न दिखूं।

लेकिन उनका परिवार उन्हें रोकने के बजाय हौसला बढ़ाया। मम्मी-पापा और घरवाले बोले कि बेटी, तुम्हारा कर्तव्य है, जाओ और सबको सुरक्षित लाओ। परिवार का यह समर्थन मिलने से दीपिका का कॉन्फिडेंस और बढ़ गया। वे तैयार हो गईं और मिशन पर निकल पड़ीं।
पूरी टीम महिलाओं की – एक ऐतिहासिक उड़ान
इस रेस्क्यू फ्लाइट की सबसे बड़ी खासियत यह थी कि इसमें कैप्टन से लेकर केबिन क्रू तक सभी छह सदस्य महिलाएं थीं। टीम में शामिल थीं:
- कैप्टन जसविंदर कौर
- पायलट दीपिका अधाना
- चार महिला क्रू मेंबर्स
यह ऑल-विमेन क्रू था, जो ऐसे संकट के समय में उड़ान भर रहा था। फ्लाइट भारत से उड़ी, रास अल खैमाह पहुंची। वहां एयरपोर्ट सामान्य से थोड़ा शांत था, लेकिन कोई अफरा-तफरी नहीं थी। करीब एक घंटे के अंदर 169 भारतीय यात्रियों को बोर्डिंग कराई गई। सबके चेहरे पर चिंता थी, लेकिन क्रू की हिम्मत देखकर उन्हें सुकून मिला।
उड़ान के दौरान आई चुनौती
वापसी की उड़ान के दौरान एक पल ऐसा आया जब एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) से संपर्क कुछ समय के लिए टूट गया। इस वजह से क्रू और पैसेंजर्स में थोड़ी घबराहट हुई। लेकिन टीम ने शांत रहकर काम किया। थोड़ी देर बाद ही संपर्क बहाल हो गया और फ्लाइट बिना किसी रुकावट के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट, दिल्ली पहुंच गई। सभी 169 यात्री सुरक्षित उतरे।
यात्रियों की खुशी और धन्यवाद
दिल्ली पहुंचते ही यात्रियों के चेहरों पर राहत की लहर दौड़ गई। कई लोगों ने क्रू मेंबर्स को गले लगाया, आंसू पोछे और बार-बार शुक्रिया अदा किया। एक यात्री ने कहा, “इन बहनों की वजह से हम आज अपने परिवार के पास हैं। इनका साहस कमाल का है।” दीपिका और उनकी टीम ने न सिर्फ जानें बचाईं, बल्कि भारतीय महिलाओं की ताकत को भी दुनिया के सामने दिखाया।
निष्कर्ष
23 साल की उम्र में इतना बड़ा मिशन संभालना कोई आम बात नहीं। दीपिका अधाना ने साबित कर दिया कि उम्र या जेंडर मायने नहीं रखता, बस हिम्मत और ड्यूटी का एहसास होना चाहिए। उनके परिवार का साथ, टीम का एकजुट होना और देश के लिए कुछ करने की इच्छा – सब मिलकर इस मिशन को सफल बनाया।










