Iran America Israel War: ईरान के साथ कितने देश, अमेरिका-इजरायल के साथ कौन? पूरी लिस्ट

ईरान-अमेरिका-इजरायल जंग: बदलते समीकरण, जानें कौन किसके साथ

Iran America Israel War: मध्य पूर्व में चल रही जंग के समीकरण तेजी से बदल रहे हैं। अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर बड़े पैमाने पर हमले किए हैं, जिसमें ईरान के सुप्रीम लीडर और कई बड़े सैन्य अधिकारी मारे गए हैं। ईरान ने भी जवाबी हमले किए हैं, लेकिन अब दुनिया दो खेमों में बंट गई है। एक तरफ ईरान को कुछ मजबूत सहयोगी मिले हैं, तो दूसरी तरफ अमेरिका-इजरायल को कई विकसित और पश्चिमी देशों का साथ है। यह युद्ध सिर्फ दो देशों की नहीं, बल्कि वैश्विक शक्तियों की टक्कर बन गया है।

ईरान-अमेरिका-इजरायल युद्ध की शुरुआत और हालिया घटनाएं

फरवरी 2026 के अंत में अमेरिका और इजरायल ने मिलकर ईरान के परमाणु ठिकानों, मिसाइल साइटों और सैन्य अड्डों पर आश्चर्यजनक हमले शुरू किए। इन हमलों में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत हो गई। अब उनके बेटे मोजतबा खामेनेई नए लीडर बने हैं। ईरान ने जवाब में इजरायल पर मिसाइल दागे और खाड़ी देशों में अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया। होर्मुज जलडमरूमध्य को ईरान ने बंद कर दिया, जिससे वैश्विक तेल व्यापार प्रभावित हो रहा है। युद्ध अब 3 हफ्ते से ज्यादा पुराना हो चुका है और रोज नए हमले हो रहे हैं।

ईरान को कितने देशों का समर्थन मिल रहा है?

ईरान अकेला नहीं लड़ रहा। उसे मुख्य रूप से रूस और चीन जैसे बड़े देशों से मजबूत सहयोग मिल रहा है। ये दोनों देश ईरान को आर्थिक और कूटनीतिक मदद दे रहे हैं। रूस ने हमलों की कड़ी निंदा की और ईरान को हथियारों की गुप्त आपूर्ति की बात कही जाती है। चीन ईरान से सस्ता तेल खरीदता है और प्रतिबंधों के बावजूद व्यापार बढ़ा रहा है। दोनों देश संयुक्त राष्ट्र में ईरान का बचाव करते हैं।

इसके अलावा कुछ अन्य देश और संगठन ईरान के साथ हैं:

  • पाकिस्तान: पड़ोसी होने के कारण नैतिक और राजनयिक समर्थन दे रहा है। अमेरिकी कार्रवाई को गलत बताया।
  • सीरिया: पुराना गठबंधन है। ईरानी मिलिशिया ने वहां असद सरकार को बचाया था, अब सैन्य समन्वय है।
  • उत्तर कोरिया: मिसाइल और ड्रोन तकनीक में मदद करता है।
  • बेलारूस: राजनीतिक समर्थन देता है, रूस का करीबी।
  • हिजबुल्लाह (लेबनान): ईरान से हथियार और ट्रेनिंग लेता है। इजरायल पर रॉकेट हमले कर रहा है।
  • हूती विद्रोही (यमन): लाल सागर में अमेरिकी-इजरायली जहाजों पर हमले कर रहे हैं।
  • शिया मिलिशिया (इराक): अमेरिकी ठिकानों पर हमले कर दबाव बना रहे हैं।

कुल मिलाकर ईरान को करीब 7-8 देशों/संगठनों से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष समर्थन मिल रहा है, लेकिन ज्यादातर प्रॉक्सी (एजेंट) के जरिए लड़ाई हो रही है।

अमेरिका-इजरायल को कौन-कौन से देश सपोर्ट कर रहे हैं?

अमेरिका और इजरायल को पश्चिमी दुनिया का मजबूत साथ मिला हुआ है। कई देशों ने ईरान के हमलों की निंदा की और होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की सुरक्षा के लिए मदद का वादा किया है। मुख्य समर्थक देश हैं:

  • ब्रिटेन: अमेरिका के साथ मिलकर हवाई और नौसैनिक मदद दे रहा है।
  • फ्रांस: यूरोपीय संघ में ईरान विरोधी बयान दे रहा है।
  • जर्मनी: ऊर्जा सुरक्षा के लिए अमेरिका का साथ।
  • इटली: स्थिति पर नजर रख रहा है, संकट टीम बनी हुई है।
  • नीदरलैंड: सुरक्षा प्रयासों में शामिल।
  • जापान: होर्मुज में जहाजों की सुरक्षा के लिए सहयोग।
  • कनाडा, ऑस्ट्रेलिया: अमेरिका के साथ खड़े हैं।
  • खाड़ी देश: सऊदी अरब, यूएई, कुवैत, बहरीन, कतर – इनके क्षेत्र में अमेरिकी बेस हैं और ईरान के हमलों का जवाब दे रहे हैं। कई ने मिसाइल डिफेंस सिस्टम से मदद की।

करीब 10-14 देश सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से अमेरिका-इजरायल के साथ हैं। ये देश वैश्विक ऊर्जा बाजार को स्थिर रखने और ईरान के हमलों से बचाव के लिए एकजुट हैं।

तटस्थ देश और भारत की स्थिति

कई देश तटस्थ रहने की कोशिश कर रहे हैं। भारत ने दोनों तरफ से संतुलित रुख अपनाया है। भारत ने युद्धविराम की अपील की है और बातचीत से समस्या सुलझाने पर जोर दिया है। भारत ईरान से तेल लेता है और इजरायल से रक्षा सौदे करता है, इसलिए किसी एक का साथ नहीं दे रहा। कुछ अन्य देश जैसे ओमान, कतर भी तटस्थ रहकर मध्यस्थता की कोशिश कर रहे हैं।

युद्ध के बदलते समीकरण और असर

ईरान के प्रॉक्सी हमले (हिजबुल्लाह, हूती) से इजरायल दो मोर्चों पर लड़ रहा है। होर्मुज बंद होने से तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं, जिससे पूरी दुनिया प्रभावित है। अमेरिका-इजरायल ईरान के परमाणु कार्यक्रम को खत्म करना चाहते हैं, जबकि ईरान अमेरिका को चेतावनी दे रहा है। ट्रंप ने कहा है कि अगर होर्मुज नहीं खुला तो बड़े हमले होंगे।

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