हाथरस (Hathras) में रावत शिक्षा समिति की ओर से आयोजित एक विशेष कार्यक्रम ने समाज को नई दिशा देने का काम किया। दिव्यांग बच्चों के समर्थन और उनके प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से आयोजित इस कार्यक्रम में शामिल हर व्यक्ति भावुक और प्रेरित नजर आया। आयोजन का मकसद सिर्फ जानकारी देना नहीं, बल्कि समाज की सोच को सकारात्मक रूप से बदलना भी था।
बच्चों की प्रतिभा ने जीता सबका दिल
कार्यक्रम के दौरान दिव्यांग बच्चों ने अपने हुनर और आत्मविश्वास से सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। किसी ने अपनी कला का प्रदर्शन किया तो किसी ने अपनी अभिव्यक्ति से यह साबित कर दिया कि सीमाएं सिर्फ सोच में होती हैं। बच्चों का उत्साह देखकर उपस्थित लोग उनकी सराहना करने से खुद को रोक नहीं सके।

जरूरत है तो सिर्फ सही मार्गदर्शन की
इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि दिव्यांग बच्चे किसी भी दृष्टि से कमजोर नहीं होते। जरूरत है तो सिर्फ सही मार्गदर्शन और अवसर की। उन्होंने यह भी बताया कि अगर समाज सहयोगी और संवेदनशील बने, तो ये बच्चे भी हर क्षेत्र में सफलता के नए आयाम स्थापित कर सकते हैं।
अधिकार और शिक्षा पर विशेष जोर
कार्यक्रम में मौजूद लोगों को दिव्यांग बच्चों के अधिकारों, उनकी शिक्षा और समाज में उनकी भागीदारी के महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। इस दौरान यह संदेश भी दिया गया कि हर बच्चे को समान अवसर मिलना चाहिए, ताकि वह अपने सपनों को साकार कर सके।
कार्यक्रम में उपस्थिति गणमान्य
कार्यक्रम में कई गणमान्य लोग शामिल हुए, जिनमें चार्टर अध्यक्ष श्रीमती पूजा वार्ष्णेय, अध्यक्ष श्रीमती प्रभा वार्ष्णेय, सचिव श्रीमती आशु वार्ष्णेय, सीमा वार्ष्णेय, श्रिशु वार्ष्णेय और अंजू वार्ष्णेय की उपस्थिति उल्लेखनीय रही। सभी अतिथियों ने बच्चों का उत्साहवर्धन किया और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
संस्था ने लिया सकारात्मक संकल्प
विद्यालय प्रशासन और दिव्यांग जन विकास संगठन से जुड़े पदाधिकारियों ने भी कार्यक्रम में सक्रिय भागीदारी निभाई। जिला अध्यक्ष राजमाला और डॉ. एम.एल. रावत ने सभी अतिथियों का स्वागत किया और संस्था की गतिविधियों की जानकारी साझा की। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन समाज में सकारात्मक बदलाव लाने में अहम भूमिका निभाते हैं और भविष्य में भी इन्हें जारी रखा जाएगा।
समाज से सहयोग की अपील
कार्यक्रम के अंत में सभी उपस्थित लोगों से अपील की गई कि वे दिव्यांग बच्चों के प्रति सहयोग, संवेदनशीलता और सम्मान का भाव रखें। यह केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि समाज को जागरूक करने की दिशा में एक मजबूत कदम साबित हुआ।










