रायबरेली में शराब की बिक्री को लेकर एक बार फिर विवाद खड़ा हो गया है। शहर के कई ठेकों पर ग्राहकों से तय रेट से ज्यादा पैसे वसूल किए जाने की खबरों ने स्थानीय लोगों में नाराजगी पैदा कर दी है।
मलिक मऊ माडल शॉप में ओवररेटिंग का मामला
6 अप्रैल 2026 को रायबरेली के मलिक मऊ माडल शॉप पर एक उपभोक्ता ने अमेरिकन प्राइड की क्वार्टर शराब खरीदी। इस शराब की एमआरपी 240 रुपये थी, लेकिन दुकानदार ने 250 रुपये वसूल लिए। जब ग्राहक ने इसके बारे में पूछा, तो दुकानदार ने कहा कि आबकारी विभाग को इसकी जानकारी है और उन्होंने 250 रुपये में बेचने की अनुमति दी है।

पहले से भी और हो चुकी हैं ऐसी शिकायतें
यह कोई पहली घटना नहीं है। इससे पहले भी सिविल लाइन मॉडल शॉप में तय रेट से ज्यादा वसूली की खबरें सामने आ चुकी हैं। कई ग्राहक, चाहे जानकर या अनजाने में, ज्यादा पैसे देने के बावजूद शिकायत नहीं करते। ऐसे मामलों ने लोगों में यह धारणा बना दी है कि यह वसूली आबकारी विभाग की मिलीभगत से हो रही है।
जनता में बढ़ती नाराजगी
स्थानीय लोगों का कहना है कि दुकानदार खुलेआम तय रेट से ज्यादा वसूली कर रहे हैं, लेकिन शिकायतों के बावजूद प्रशासन सख्त कदम नहीं उठा रहा। इसका सीधा असर आम जनता पर पड़ रहा है, जो कानून और नियमों की अनदेखी को देखकर नाराज है।
जिला आबकारी अधिकारी का बयान
आज दोपहर करीब 1 बजे जिला आबकारी अधिकारी दिनेश कुमार ने कलेक्ट्रेट स्थित अपने कार्यालय में इन आरोपों पर बयान जारी किया। उन्होंने कहा कि विभाग को शराब की बिक्री में ओवररेटिंग के मामले की जानकारी मिली है और इसकी जांच की जा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि किसी भी दुकान पर तय रेट से ज्यादा वसूली पाई जाती है, तो संबंधित लाइसेंसधारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
वायरल वीडियो और सोशल मीडिया का दबाव
सोशल मीडिया और वीडियो प्लेटफॉर्म पर वायरल हुए वीडियो ने इस मुद्दे को और अधिक सुर्खियों में ला दिया है। वीडियो में देखा जा सकता है कि दुकानदार खुलेआम तय रेट से ज्यादा पैसे वसूल कर रहे हैं। यह वायरल वीडियो स्थानीय प्रशासन पर दबाव बढ़ाने का काम कर रहे हैं, ताकि ओवररेटिंग पर रोक लगाई जा सके।
जांच और संभावित कार्रवाई
अधिकारियों ने कहा कि आगामी दिनों में जिले के सभी ठेकों की जांच की जाएगी। यदि कोई दुकानदार निर्धारित रेट से ज्यादा वसूली करता पाया गया, तो उसके लाइसेंस रद्द किए जाने की कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने जनता से अपील की कि ऐसे मामलों की सूचना तुरंत आबकारी विभाग को दें, ताकि जांच में आसानी हो।
व्यापारियों और उपभोक्ताओं की प्रतिक्रिया
स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि कुछ दुकानदार ऐसे मामलों का फायदा उठाते हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि प्रशासन की कार्रवाई धीमी होगी। इससे बाजार में अनियमितता बढ़ती है और जो दुकानदार नियमों का पालन करते हैं, उन्हें नुकसान उठाना पड़ता है।
एक निवासी का कहना है,“अगर दुकानदार तय रेट से ज्यादा वसूली कर सकते हैं और आबकारी विभाग भी आंखें मूंदे रहता है, तो आम जनता को परेशान होना ही पड़ेगा। हमें अपने अधिकारों की जानकारी होनी चाहिए और प्रशासन को जिम्मेदारी से काम करना चाहिए।”
जनता की उम्मीदें और प्रशासन की भूमिका
इस पूरे मामले ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या आबकारी विभाग समय रहते सख्त कदम उठाएगा या यह मुद्दा भी पिछले मामलों की तरह लंबे समय तक लंबित रहेगा। जनता की नाराजगी बढ़ रही है, और लोग चाहते हैं कि प्रशासन इस मामले में कड़ा रुख अपनाए और तय रेट से ज्यादा वसूली पर पूरी तरह रोक लगाए।
रायबरेली में शराब की बिक्री और कीमतों को लेकर यह मामला केवल एक घटना नहीं बल्कि एक संकेत है कि विभाग और दुकानदारों के बीच तालमेल की वजह से उपभोक्ता प्रभावित हो रहे हैं।
निष्कर्ष
यदि आबकारी विभाग ने उचित और समय पर कार्रवाई की, तो यह अन्य दुकानों के लिए चेतावनी भी बनेगी और आम जनता में विश्वास कायम रहेगा। वहीं, अगर कार्रवाई में देरी हुई, तो लोगों का यह भरोसा और कम होगा कि नियम सबके लिए समान हैं।










