पतरातु में अतिक्रमण हटाओ अभियान पर बवाल: क्वार्टर के अंदर लोग, बाहर से जड़ा गया ताला

प्रशासन की कार्रवाई से भड़के ग्रामीण, सड़क पर उतरकर किया विरोध प्रदर्शन

झारखंड के रामगढ़ जिले के पतरातु में गुरुवार को प्रशासन द्वारा चलाए गए अतिक्रमण हटाओ अभियान ने बड़ा विवाद खड़ा कर दिया। लोगों का आरोप है कि प्रशासन ने मानवीय संवेदनाओं को नजरअंदाज करते हुए क्वार्टर के अंदर मौजूद लोगों को बाहर निकलने का मौका दिए बिना ही गेट पर ताला जड़ दिया। इस घटना के बाद स्थानीय ग्रामीणों में भारी आक्रोश फैल गया और बड़ी संख्या में महिला-पुरुष सड़क पर उतर आए।

प्रदर्शनकारियों ने सड़क पर टायर जलाकर विरोध जताया और महात्मा गांधी की तस्वीर लेकर प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। लोगों का कहना है कि यह कार्रवाई पूरी तरह अमानवीय है और इसे तुरंत रोका जाना चाहिए।

जियाडा को हस्तांतरित जमीन पर चल रहा था अभियान

दरअसल, यह पूरा मामला पीटीपीएस (पतरातु थर्मल पावर स्टेशन) की उस जमीन से जुड़ा है, जिसे जियाडा (झारखंड इंडस्ट्रियल एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी) को हस्तांतरित किया गया है। प्रशासन का कहना है कि इस जमीन पर कई लोग अवैध रूप से कब्जा करके रह रहे थे, जिन्हें पहले भी कई बार स्वेच्छा से जगह खाली करने का नोटिस दिया गया था।

लेकिन जब लोगों ने खुद से कब्जा नहीं हटाया, तो प्रशासन ने पुलिस बल के साथ अभियान चलाकर कार्रवाई शुरू कर दी। इसी दौरान हेसला पंचायत के क्वार्टरों में रह रहे लोगों के घरों पर ताला लगाने की कार्रवाई की गई।

लोगों का आरोप: अंदर लोग थे, फिर भी बाहर से ताला

स्थानीय लोगों का आरोप है कि प्रशासन ने बिना सोचे-समझे जबरदस्ती कार्रवाई की। कुछ लोग उस समय क्वार्टर के अंदर ही मौजूद थे और उनका सामान भी अंदर रखा था, इसके बावजूद बाहर से गेट बंद कर ताला लगा दिया गया।

एक महिला ने बताया कि “हम लोग घर के अंदर थे, प्रशासन के लोग आए और बिना कुछ बताए बाहर से ताला लगाकर चले गए। अब हम कैसे बाहर निकलें? हमारे बच्चे स्कूल में हैं और हम अंदर फंसे हुए हैं।”

इस घटना के बाद लोगों में गुस्सा और बढ़ गया और उन्होंने इसे प्रशासन की बड़ी लापरवाही और संवेदनहीनता बताया।

कोर्ट में मामला लंबित, फिर भी कार्रवाई पर सवाल

ग्रामीणों का कहना है कि यह मामला अभी कोर्ट में चल रहा है और उन्हें वहां से दो महीने की राहत भी मिली हुई है। इसके बावजूद प्रशासन ने समय से पहले ही जबरन कार्रवाई शुरू कर दी, जो पूरी तरह गलत है।

लोगों का कहना है कि जब मामला न्यायालय में विचाराधीन है, तो प्रशासन को फैसला आने तक इंतजार करना चाहिए था। इस तरह की जल्दबाजी से आम लोगों को बेवजह परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

कांग्रेस नेता ने उठाए सवाल

इस मामले में कांग्रेस नेता सुजीत कुमार पटेल ने भी प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जब कोर्ट में मामला लंबित है और भूमि अधिग्रहण भी पूरी तरह नहीं हुआ है, तो इतनी जल्दबाजी क्यों की जा रही है?

उन्होंने कहा, “आप खुद देख सकते हैं कि लोग क्वार्टर के अंदर हैं और बाहर से ताला लगा दिया गया है। यह पूरी तरह अन्याय है। प्रशासन को इस पर तुरंत संज्ञान लेना चाहिए और कार्रवाई रोकनी चाहिए।”

उन्होंने यह भी बताया कि लोगों को केवल एक दिन पहले नोटिस दिया गया था, जिससे उन्हें तैयारी का समय भी नहीं मिल पाया। इस कारण कई परिवार अचानक संकट में आ गए।

ग्रामीणों की पीड़ा: तीन पीढ़ियों से रह रहे हैं यहां

स्थानीय निवासी सरिता देवी ने अपनी पीड़ा जाहिर करते हुए कहा कि उनका परिवार यहां तीन पीढ़ियों से रह रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार अगर उन्हें यहां से हटाना चाहती है, तो पहले उन्हें रहने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था करनी चाहिए।

उन्होंने कहा, “अगर सरकार यहां कंपनी लगाना चाहती है, तो हमें और कही जमीन दे दे या घर बनाकर दे । हम वहां जाकर रह लेंगे और किराया भी देंगे। लेकिन इस तरह जबरदस्ती निकालना गलत है।”

प्रशासन का पक्ष: आदेश के अनुसार हो रही कार्रवाई

वहीं, इस पूरे मामले पर पतरातु के अंचलाधिकारी मनोज चौरसिया ने प्रशासन का पक्ष रखते हुए कहा कि यह कार्रवाई आदेश के अनुसार की जा रही है। उन्होंने बताया कि जियाडा को हस्तांतरित जमीन पर जो लोग अवैध रूप से रह रहे हैं, उन्हें हटाया जा रहा है।

उन्होंने कहा, “लोगों को पहले नोटिस दिया गया था और उन्हें खुद से जगह खाली करने के लिए बोला गया था। जो लोग नहीं मान रहे हैं, उन्हें समझाकर और सहयोग से हटाया जा रहा है।”

मानवीय संवेदना बनाम प्रशासनिक कार्रवाई

पतरातु में हुई इस घटना ने एक बार फिर प्रशासनिक कार्रवाई और मानवीय संवेदनाओं के बीच संतुलन पर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक तरफ प्रशासन अवैध कब्जा हटाने की बात कर रहा है, तो दूसरी तरफ स्थानीय लोग अपने हक और सम्मान के लिए आवाज उठा रहे हैं।

Other Latest News

Leave a Comment