नेहरू नगर के समीप मनिका का रोड पर स्थित फर्जी फाइनेंस कंपनियों का खेल! ई-रिक्शा चालक से वसूले लाखों, किस्त जमा होने के बाद भी बनाया जा रहा बकायेदार

रायबरेली जिले में फाइनेंस कंपनियों और एजेंसियों के नाम पर आम लोगों के साथ ठगी का खेल लगातार बढ़ता जा रहा है। प्रशासन की नाक के नीचे कथित फाइनेंस कंपनियां गरीब और मध्यम वर्गीय लोगों को आसान किस्तों का झांसा देकर आर्थिक शोषण कर रही हैं। ताजा मामला कोतवाली नगर क्षेत्र के मानिका रोड स्थित नेहरू नगर क्रॉसिंग के पास संचालित एक ई-रिक्शा एजेंसी से सामने आया है, जहां एक ग्राहक ने एजेंसी और कथित फाइनेंस कंपनी पर गंभीर आरोप लगाए हैं।

आपको बता दे कि आज दिनांक 15 में 2026 दिन शुक्रवार को समय करीब 8:30 थाना क्षेत्र के ही रहने वाले पीड़ित राजकुमार ने बताया कि उसने “हिंदुस्तान मोटर्स” नाम की एजेंसी से ई-रिक्शा फाइनेंस पर लिया था। उसकी केवल दो किस्तें बाकी थीं। आरोप है कि उसने एक किस्त एजेंसी में जाकर नगद जमा की, जिसकी बाकायदा रसीद भी उसे दी गई। वहीं दूसरी किस्त उसी महीने उसके बैंक खाते से स्वतः कट गई। इसके बावजूद अब एजेंसी और फाइनेंस कंपनी द्वारा उससे कहा जा रहा है कि नगद जमा की गई किस्त कंपनी तक पहुंची ही नहीं।

राजकुमार के अनुसार, एजेंसी की ओर से बताया गया कि पैसा कंपनी में जमा कर दिया गया है, लेकिन कंपनी की तरफ से भुगतान न मिलने की बात कही जा रही है। सबसे हैरानी की बात यह है कि जिस फाइनेंस कंपनी का नाम “असेंड बिजकैप प्राइवेट लिमिटेड” बताया गया, उसके अधिकृत दस्तावेज तक ग्राहक को उपलब्ध नहीं कराए गए। केवल एक साधारण कागज पर हाथ से लिखकर कंपनी की जानकारी दी गई।

पीड़ित ने यह भी आरोप लगाया कि यदि किसी कारणवश किस्त बाउंस हो जाती है तो ग्राहकों से लगभग 1300 रुपये तक की भारी पेनल्टी वसूली जाती है। इसके बावजूद ग्राहकों को उचित जवाब नहीं दिया जाता। मामले का वीडियो भी सामने आया है, जिसमें एजेंसी का एक कर्मचारी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ते हुए यह कहता दिखाई दे रहा है कि “उस समय मैं यहां काम नहीं करता था।”

जब ग्राहक ने कर्मचारी से उसके वरिष्ठ अधिकारी से बात कराने की मांग की तो आरोप है कि कर्मचारी ने उसके साथ अभद्रता शुरू कर दी और गाली-गलौज पर उतर आया। घटना के बाद पीड़ित ने प्रशासन से मामले की जांच कर कार्रवाई की मांग की है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि जिले में कई ऐसी कथित फाइनेंस कंपनियां सक्रिय हैं जो बिना स्पष्ट दस्तावेजों और नियमों के लोगों को वाहन फाइनेंस कर रही हैं। गरीब और जरूरतमंद लोग इनके जाल में फंसकर आर्थिक और मानसिक शोषण का शिकार हो रहे हैं। अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन और पुलिस इस मामले में क्या कार्रवाई करती है।

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