CM Pushkar Singh Dhami: मुख्यमंत्री धामी ने अपने संबोधन में कहा कि कुछ ताकतें ऐसी हैं जो सोशल मीडिया के जरिए झूठी और भ्रामक सूचनाएं फैलाकर समाज में भ्रम की स्थिति पैदा करने का प्रयास करती हैं। देश की राजनीतिक और डिजिटल दुनिया में चर्चा तेज हो गई है। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर फैलाए जा रहे कथित फेक नैरेटिव और भ्रामक सूचनाओं को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि देश में कुछ ऐसे तत्व सक्रिय हैं, जो सोशल मीडिया के माध्यम से भ्रम फैलाने और विकास कार्यों को बाधित करने की कोशिश कर रहे हैं। रुड़की में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय ने सोशल मीडिया और डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर नजर रखने के लिए विशेष व्यवस्था की है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में सोशल मीडिया का प्रभाव तेजी से बढ़ा है और इसका उपयोग सकारात्मक तथा नकारात्मक दोनों उद्देश्यों के लिए किया जा रहा है।
फेक नैरेटिव को लेकर जताई चिंता

उन्होंने कहा कि इन गतिविधियों से न केवल सामाजिक सौहार्द प्रभावित होता है, बल्कि विकास और जनहित से जुड़ी योजनाओं पर भी असर पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि नागरिकों, विशेषकर युवाओं को सोशल मीडिया पर उपलब्ध हर जानकारी को बिना सत्यापन के स्वीकार नहीं करना चाहिए। डिजिटल युग में सूचना की सत्यता की जांच करना बेहद आवश्यक हो गया है।
सोशल मीडिया की निगरानी पर जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर लगातार निगरानी बनाए रखना आवश्यक है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भ्रामक जानकारी और फर्जी खबरों के खिलाफ समय पर कार्रवाई करना लोकतांत्रिक व्यवस्था और सामाजिक स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि तकनीक का उपयोग समाज के विकास और जनकल्याण के लिए होना चाहिए, न कि भ्रम फैलाने या अस्थिरता पैदा करने के लिए। इसी उद्देश्य से विभिन्न स्तरों पर निगरानी और जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं।
युवाओं से की विशेष अपील
अपने संबोधन के दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने युवाओं की भूमिका पर भी विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि देश के युवा डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर सबसे अधिक सक्रिय हैं और उन्हें जिम्मेदार नागरिक के रूप में अपनी भूमिका निभानी चाहिए। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे किसी भी प्रकार की अपुष्ट जानकारी को साझा करने से पहले उसकी सत्यता की जांच अवश्य करें। उन्होंने कहा कि जागरूक और जिम्मेदार युवा ही देश को गलत सूचनाओं के प्रभाव से बचा सकते हैं।
डिजिटल युग में बढ़ी चुनौतियां
विशेषज्ञों का मानना है कि इंटरनेट और सोशल मीडिया के बढ़ते उपयोग के साथ फेक न्यूज और भ्रामक सूचनाओं की चुनौती भी बढ़ी है। कई बार गलत जानकारी तेजी से वायरल हो जाती है, जिससे समाज में भ्रम और तनाव की स्थिति पैदा हो सकती है। डिजिटल मीडिया विशेषज्ञों का कहना है कि सूचना के इस दौर में मीडिया साक्षरता (Media Literacy) को बढ़ावा देना बेहद जरूरी है। लोगों को यह समझना होगा कि किसी भी खबर की पुष्टि किए बिना उसे आगे साझा करना गंभीर परिणाम पैदा कर सकता है।
राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर चर्चा तेज
मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर चर्चा तेज हो गई है। कई विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर बढ़ती सक्रियता को देखते हुए सरकारों और नागरिकों दोनों की जिम्मेदारी बढ़ गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि सोशल मीडिया लोकतंत्र का एक महत्वपूर्ण माध्यम है, लेकिन इसके दुरुपयोग को रोकने के लिए जागरूकता और जवाबदेही दोनों आवश्यक हैं। इसके साथ ही डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर पारदर्शिता और जिम्मेदारी सुनिश्चित करना भी समय की मांग है।
निष्कर्ष
Pushkar Singh Dhami Fake Narrative Statement ने एक बार फिर सोशल मीडिया पर फैलने वाली भ्रामक सूचनाओं और फेक नैरेटिव के मुद्दे को राष्ट्रीय चर्चा के केंद्र में ला दिया है। डिजिटल युग में सूचना की विश्वसनीयता बनाए रखना सरकार, मीडिया संस्थानों और आम नागरिकों की साझा जिम्मेदारी है। विशेषज्ञों का मानना है कि जागरूकता, सत्यापन और जिम्मेदार डिजिटल व्यवहार ही इस चुनौती का प्रभावी समाधान हो सकते हैं।










