रायबरेली: लखनऊ के अलीगंज में हुए भीषण अग्निकांड के बाद जहां पूरे प्रदेश में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठे, आज दिनांक 30 जून 2026 दिन मंगलवार को समय करीब 9:00 बजे यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वहीं रायबरेली में जिला प्रशासन की कार्यशैली पर भी गंभीर प्रश्न खड़े हो रहे हैं। कोचिंग संस्थानों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर कार्रवाई का अभियान चलाकर प्रशासन ने सख्ती का संदेश जरूर दिया, लेकिन पेट्रोल पंपों पर खुलेआम हो रहे सुरक्षा नियमों के उल्लंघन पर उसकी नजर अब तक नहीं पड़ी है।
जिले के कई पेट्रोल पंपों पर साफ-साफ बोर्ड और स्टिकर लगे हैं कि “मोबाइल फोन का उपयोग वर्जित है”। कई स्थानों पर मोबाइल इस्तेमाल करने पर जुर्माने की चेतावनी भी लिखी गई है। लेकिन जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल उलट दिखाई देती है। पेट्रोल भरवाने पहुंचे ग्राहक हों या पंप कर्मचारी, अधिकांश लोग बेखौफ होकर मोबाइल का इस्तेमाल करते नजर आते हैं। कोई फोन पर बात कर रहा है तो कोई सोशल मीडिया चला रहा है, वहीं ऑनलाइन भुगतान के लिए भी मोबाइल का प्रयोग लगातार हो रहा है।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि पेट्रोल पंपों पर मोबाइल का उपयोग वास्तव में सुरक्षा की दृष्टि से प्रतिबंधित है, तो फिर इस नियम का पालन कौन कराएगा? क्या यह प्रतिबंध सिर्फ बोर्ड तक सीमित रह गया है? यदि नियम अप्रासंगिक हो चुके हैं तो इन्हें हटाया क्यों नहीं जाता, और यदि नियम लागू हैं तो खुलेआम हो रहे उल्लंघन पर कार्रवाई क्यों नहीं होती?
हालांकि सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार आधुनिक मोबाइल फोन से आग लगने का जोखिम सामान्य परिस्थितियों में बहुत कम माना जाता है, लेकिन पेट्रोल पंपों पर ज्वलनशील पदार्थों की मौजूदगी के कारण सुरक्षा नियमों का पालन करना बेहद जरूरी होता है। ऐसे स्थानों पर किसी भी प्रकार की लापरवाही बड़े हादसे की वजह बन सकती है।
विडंबना यह भी है कि जिला प्रशासन के अधिकारी और सरकारी वाहन भी इन्हीं पेट्रोल पंपों से ईंधन भरवाते हैं, लेकिन खुलेआम हो रहे नियमों के उल्लंघन पर किसी की नजर नहीं पड़ती। सवाल यह उठता है कि क्या प्रशासन किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार कर रहा है, जिसके बाद फिर जांच, कार्रवाई और जिम्मेदारी तय करने का सिलसिला शुरू होगा?
कैमरे में कैद हुईं ये तस्वीरें प्रशासन के सुरक्षा दावों की पोल खोल रही हैं। अब जरूरत इस बात की है कि जिला प्रशासन पेट्रोल पंपों पर सुरक्षा मानकों की वास्तविक स्थिति की जांच करे, नियमों की समीक्षा करे और जो भी दिशा-निर्देश लागू हैं, उनका सख्ती से पालन सुनिश्चित कराए, ताकि किसी संभावित हादसे से पहले ही लापरवाही पर रोक लगाई जा सके।










