WhatsApp पर मोबाइल नंबर की जगह आएगा Username? सरकार ने Meta को भेजा नोटिस, जानिए 5 बड़े खतरे

WhatsApp Username Feature: भारत सरकार ने Meta से मांगा जवाब, यूजरनेम फीचर पर सुरक्षा और फर्जी अकाउंट को लेकर उठे गंभीर सवाल; जानिए आम यूजर्स पर इसका क्या असर पड़ सकता है।

WhatsApp Username Feature: दुनिया के सबसे लोकप्रिय मैसेजिंग प्लेटफॉर्म WhatsApp का प्रस्तावित Username Feature भारत में लॉन्च होने से पहले ही चर्चा का विषय बन गया है। यह फीचर यूजर्स को मोबाइल नंबर साझा किए बिना केवल यूजरनेम के जरिए बातचीत करने की सुविधा देगा। हालांकि, इस बदलाव को लेकर केंद्र सरकार ने गंभीर चिंता जताई है और Meta से तीन दिनों के भीतर विस्तृत जवाब मांगा है। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि जब तक सभी सुरक्षा पहलुओं पर चर्चा पूरी नहीं हो जाती, तब तक इस फीचर को भारत में लागू नहीं किया जाए।

सरकार की चिंता आखिर क्या है?

सरकारी अधिकारियों का मानना है कि यदि यूजरनेम सिस्टम में पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था नहीं होगी तो साइबर अपराधियों के लिए फर्जी पहचान बनाना पहले से ज्यादा आसान हो सकता है। किसी बैंक, सरकारी विभाग, कंपनी या प्रसिद्ध व्यक्ति से मिलता-जुलता यूजरनेम बनाकर लोगों को भ्रमित किया जा सकता है। ऐसे मामलों में ऑनलाइन ठगी, फिशिंग और डिजिटल फ्रॉड के नए तरीके सामने आने की आशंका है।

आईटी नियमों का पालन सबसे बड़ी शर्त

सरकार ने Meta को याद दिलाया है कि भारत में WhatsApp एक Significant Social Media Intermediary (SSMI) के रूप में काम करता है। ऐसे प्लेटफॉर्म पर सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम और आईटी नियमों के तहत अतिरिक्त जिम्मेदारियां लागू होती हैं। इसलिए किसी भी नए फीचर को लागू करने से पहले यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि वह भारतीय कानूनों और डिजिटल सुरक्षा मानकों के अनुरूप हो।

Meta ने क्या कहा?

Meta का कहना है कि फिलहाल Username Feature किसी भी यूजर के लिए लाइव नहीं किया गया है। कंपनी के मुताबिक इसे साल के अंत तक चरणबद्ध तरीके से पेश करने की तैयारी है। Meta ने यह भी दावा किया है कि सरकारी संस्थानों, सार्वजनिक हस्तियों, सेलिब्रिटीज और Verified अकाउंट्स से जुड़े कई महत्वपूर्ण यूजरनेम पहले ही सुरक्षित कर लिए गए हैं। इसके अलावा उनसे मिलते-जुलते कई नामों को भी ब्लॉक किया गया है ताकि फर्जी अकाउंट बनने का खतरा कम किया जा सके।

यूजरनेम फीचर से जुड़े 5 बड़े खतरे

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सुरक्षा मजबूत नहीं रही तो यह फीचर कई नई चुनौतियां खड़ी कर सकता है।

  • फर्जी पहचान बनाकर ठगी: अपराधी किसी संस्था या व्यक्ति जैसा यूजरनेम बनाकर लोगों को धोखा दे सकते हैं।
  • साइबर फ्रॉड में बढ़ोतरी: निवेश, नौकरी और फिशिंग जैसे स्कैम नए तरीके से फैल सकते हैं।
  • असली और नकली अकाउंट की पहचान मुश्किल: केवल यूजरनेम दिखने पर सही व्यक्ति की पुष्टि करना कठिन हो सकता है।
  • जांच एजेंसियों के लिए चुनौती: साइबर अपराधों की जांच में संदिग्ध खातों तक पहुंचना अधिक जटिल हो सकता है।
  • ब्रांड नामों का दुरुपयोग: कंपनियों के नाम से मिलते-जुलते यूजरनेम बनाकर ग्राहकों को गुमराह किया जा सकता है।

क्या यूजर्स को घबराने की जरूरत है?

फिलहाल इस फीचर को लेकर घबराने की आवश्यकता नहीं है क्योंकि इसे अभी तक भारत में लागू नहीं किया गया है। सरकार और Meta के बीच बातचीत जारी है। माना जा रहा है कि सुरक्षा से जुड़े सभी पहलुओं की समीक्षा के बाद ही इस फीचर को लॉन्च करने पर अंतिम फैसला लिया जाएगा। यदि मजबूत सुरक्षा और वेरिफिकेशन सिस्टम के साथ इसे पेश किया जाता है, तो यह यूजर्स की प्राइवेसी बढ़ाने वाला फीचर भी साबित हो सकता है। वहीं सुरक्षा में कमी रही तो साइबर अपराधियों के लिए यह नया हथियार बन सकता है।

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