झारखंड के रामगढ़ जिले के पतरातू में लंबे समय से विस्थापन और पुनर्वास की मांग उठा रहे ग्रामीणों के बीच सोमवार को राज्य के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर पहुंचे। उनके साथ झारखंड कांग्रेस के प्रभारी के. राजू भी मौजूद रहे। दोनों नेताओं ने प्रभावित परिवारों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याएं सुनीं और भरोसा दिलाया कि सरकार उनकी आवाज को अनसुना नहीं होने देगी।
ग्रामीणों ने रखा वर्षों पुराना समस्या
बैठक के दौरान विस्थापित परिवारों ने अपनी शिकायतें खुलकर सामने रखीं। उनका कहना था कि भूमि अधिग्रहण कानून-2013 में अधिकार स्पष्ट होने के बावजूद आज भी कई परिवारों को उचित मुआवजा और पुनर्वास का लाभ नहीं मिला है। ग्रामीणों ने सरकार से लंबित मामलों का जल्द समाधान करने और कानून का पूरी तरह पालन सुनिश्चित करने की मांग की।

‘उग्रवाद से बड़ी समस्या है विस्थापन’
वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने कहा कि उनका पतरातू दौरा राजनीतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि लोगों की वास्तविक परेशानियों को समझने का प्रयास है। उन्होंने कहा कि अपने चार दशक से अधिक लंबे सार्वजनिक जीवन में उन्होंने महसूस किया है कि झारखंड में विस्थापन सबसे गंभीर सामाजिक चुनौती बन चुका है। उनके अनुसार, जिन लोगों की जमीन विकास परियोजनाओं के लिए ली जाती है, उनके सम्मानजनक पुनर्वास और भविष्य की जिम्मेदारी भी सरकार की होती है।
पूर्व सरकारों पर साधा निशाना
राधाकृष्ण किशोर ने कहा कि राज्य में लंबे समय तक शासन करने के बावजूद पिछली सरकारें विस्थापित परिवारों की समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं निकाल सकीं। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रभावित लोगों की अपेक्षाओं के अनुरूप पुनर्वास नीति लागू नहीं हो सकी। उन्होंने भरोसा दिलाया कि वर्तमान सरकार इस विषय को गंभीरता से लेकर आगे बढ़ेगी।
कैबिनेट तक पहुंचेगी विस्थापितों की आवाज
वित्त मंत्री ने स्पष्ट किया कि विस्थापितों की सभी प्रमुख मांगों को राज्य कैबिनेट के समक्ष रखा जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल विकास परियोजनाओं को आगे बढ़ाना नहीं, बल्कि प्रभावित परिवारों के अधिकारों की रक्षा करना भी है। उन्होंने आश्वासन दिया कि संबंधित विभागों से रिपोर्ट लेकर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
एनटीपीसी को दी गई जमीन की होगी समीक्षा
पतरातू क्षेत्र में औद्योगिक परियोजनाओं के लिए अधिग्रहित जमीन का मुद्दा भी बैठक में प्रमुखता से उठा। वित्त मंत्री ने कहा कि यह जांच कराई जाएगी कि एनटीपीसी को उपलब्ध कराई गई जमीन का कितना हिस्सा वास्तविक परियोजनाओं में उपयोग हो रहा है और कितना अन्य संस्थाओं के पास है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि बिना आवश्यक सरकारी अनुमति के किसी संस्था को जमीन सब-लीज पर दी गई है तो उसकी पूरी समीक्षा कराई जाएगी।
222 एकड़ जमीन पर भी उठे सवाल
वित्त मंत्री ने विशेष रूप से उस मामले का उल्लेख किया जिसमें लगभग 222 एकड़ जमीन दूसरी संस्था को दिए जाने की बात सामने आई है। उन्होंने कहा कि पूरे मामले की तथ्यात्मक जांच होगी और यदि किसी स्तर पर नियमों का उल्लंघन पाया गया तो आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।










