रायबरेली: उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा भूमि विवादों के त्वरित निस्तारण के लिए पूरे महीने विशेष अभियान चलाया गया, लेकिन रायबरेली की लालगंज तहसील में इस अभियान का परिणाम बेहद निराशाजनक रहा। सरकारी अभिलेखों के अनुसार अभियान के दौरान 821 भूमि विवादों का एक भी निस्तारण नहीं हुआ। इस चौंकाने वाले प्रदर्शन के बाद शासन ने लालगंज के उप जिलाधिकारी (एसडीएम) से जवाब-तलब करते हुए नोटिस जारी किया है।
शासन का उद्देश्य था कि राजस्व और पुलिस विभाग के समन्वय से भूमि विवादों का समयबद्ध समाधान कर आम जनता को राहत दी जाए, लेकिन लालगंज तहसील में अभियान पूरी तरह बेअसर साबित हुआ। पूरे महीने चले अभियान के बावजूद निस्तारण का आंकड़ा शून्य रहने से प्रशासनिक कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

सूत्रों के अनुसार शासन ने स्पष्ट रूप से पूछा है कि जब विशेष अभियान चल रहा था तो आखिर 821 मामलों का निस्तारण क्यों नहीं किया गया? क्या अधिकारी अभियान को गंभीरता से नहीं ले रहे थे, या फिर सरकारी आदेश सिर्फ कागजों तक ही सीमित रह गए?
इस मामले ने आम लोगों में भी नाराजगी पैदा कर दी है। लोगों का कहना है कि जब विशेष अभियान में भी विवादों का समाधान नहीं होगा तो सामान्य दिनों में न्याय मिलने की उम्मीद कैसे की जा सकती है। भूमि विवाद पहले से ही वर्षों तक लंबित रहते हैं और ऐसे में अभियान का भी शून्य परिणाम प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगा रहा है।
अब शासन की नजर लालगंज प्रशासन पर है और माना जा रहा है कि संबंधित अधिकारियों से विस्तृत स्पष्टीकरण लेकर आगे की कार्रवाई की जा सकती है। यह मामला इस बात का भी संकेत है कि सरकारी योजनाओं और अभियानों को धरातल पर प्रभावी ढंग से लागू करने में कहीं न कहीं गंभीर लापरवाही बरती गई है।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब सरकार जनता को त्वरित न्याय दिलाने के लिए अभियान चला रही थी, तब लालगंज तहसील में 821 मामलों का निस्तारण आखिर शून्य कैसे रहा? अब जवाब फाइलों को नहीं, जिम्मेदार अधिकारियों को देना होगा।










