Bokaro Thermal: रेलवे स्टेशन के समीप बुधवार को आध्यात्मिक वातावरण उस समय देखने को मिला, जब संत कबीर वचन वंश के तत्वावधान में संत सम्मेलन का आयोजन किया गया। सम्मेलन में झारखंड के अलावा बिहार और पश्चिम बंगाल से बड़ी संख्या में कबीर पंथ के संत और श्रद्धालु पहुंचे। पूरे आयोजन के दौरान संतों ने कबीर साहेब की वाणी के माध्यम से समाज को सद्भाव, सेवा और संयम का संदेश दिया। श्रद्धालुओं ने भी सत्संग में भाग लेकर आध्यात्मिक विचारों को आत्मसात किया।
मानव सेवा को बताया जीवन का सबसे बड़ा धर्म
सम्मेलन को संबोधित करते हुए बिहार के समस्तीपुर से पहुंचे आचार्य मोहन सुरेश साहेब ने कहा कि वर्तमान समय में समाज का बड़ा वर्ग अंधविश्वास, स्वार्थ और लालच के जाल में उलझता जा रहा है। उन्होंने कहा कि धर्म का वास्तविक अर्थ किसी विशेष पहचान से नहीं, बल्कि मानवता की सेवा से जुड़ा है।

उन्होंने कहा कि यदि व्यक्ति अपने जीवन में सेवा, सादगी और सत्य को अपनाता है तो वही सच्चे धर्म का पालन करता है। उनके अनुसार इंसान को सबसे पहले अपने परिवार और समाज के प्रति जिम्मेदारियों को समझना चाहिए।
माता-पिता की सेवा और संयमित जीवन पर दिया जोर
आचार्य मोहन सुरेश साहेब ने अपने प्रवचन में कहा कि वृद्ध माता-पिता की सेवा करना किसी भी पूजा-पाठ से बढ़कर है। उन्होंने कहा कि आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग अपने कर्तव्यों को भूलते जा रहे हैं, जबकि सबसे बड़ी साधना अपने माता-पिता का सम्मान और सेवा है।
उन्होंने नशे, मांसाहार और अन्य बुरी आदतों से दूर रहने की भी अपील की। उनका कहना था कि जो व्यक्ति अपने मन पर नियंत्रण कर लेता है, वही वास्तविक अर्थों में सबसे बड़ा धनी और धर्मात्मा बनता है।

सत्संग से मिलता है आत्मिक ज्ञान और जीवन की सही राह
संत सम्मेलन में वक्ताओं ने कहा कि सत्संग केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि जीवन को सकारात्मक दिशा देने का माध्यम है। कबीर पंथ की शिक्षाओं में प्रेम, समानता, भाईचारे और सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी जाती है। संतों ने कहा कि सत्संग से व्यक्ति के भीतर आत्मचिंतन की भावना विकसित होती है और जीवन में शांति एवं संतुलन आता है।
तीन राज्यों से पहुंचे संतों की रही गरिमामयी उपस्थिति
सम्मेलन में बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल से आए अनेक संतों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। प्रमुख रूप से रामचंद्र साहब, ज्ञानी दास, महेश लाल वचन दास, अशोक दास, महेश महात्मा, गोपाल दास, कैलाश दास, कंचन दासिन, बुदगर दास, दीवन दास, चमरू दास, घानों दास, सुशील दासिन और प्रीति दासिन सहित कई संत एवं श्रद्धालु कार्यक्रम में शामिल हुए।










