Ranchi News: ‘आओ चलें शिव की ओर’ संदेश के साथ संपन्न हुई शिव शिष्यता कार्यशाला, 550 से अधिक श्रद्धालुओं ने लिया हिस्सा

Ranchi में आयोजित दो दिवसीय शिव शिष्यता कार्यशाला 'आओ चलें शिव की ओर' संदेश के साथ संपन्न हुई। 550 से अधिक श्रद्धालुओं ने भाग लेकर शिव शिष्यता के उद्देश्य और जीवन मूल्यों को आत्मसात किया।

Ranchi: रांची के अग्रसेन भवन में आयोजित शिव शिष्य परिवार की दो दिवसीय कार्यशाला का रविवार को श्रद्धा, अनुशासन और आध्यात्मिक वातावरण के बीच समापन हो गया। “शिव शिष्यता की पृष्ठभूमि, व्याप्ति एवं प्रयोजन” विषय पर आयोजित इस कार्यक्रम में देश के विभिन्न राज्यों से पहुंचे लगभग 550 शिवशिष्यों और शिवशिष्याओं ने सहभागिता की। दो दिनों तक चले इस आयोजन में आध्यात्मिक जीवन, गुरु परंपरा और शिवभाव को जीवन में उतारने पर विस्तार से चर्चा हुई।

‘आओ चलें शिव की ओर’ बना कार्यशाला का केंद्रीय संदेश

कार्यशाला में साहब श्री हरिन्द्रानंद जी के संदेश “आओ चलें शिव की ओर” को विशेष रूप से साझा किया गया। इस विषय पर अपने विचार रखते हुए बरखा आनंद ने बताया कि वर्षों पहले साहब ने शिष्यों के बीच यह संदेश केवल एक वाक्य के रूप में नहीं, बल्कि समाज और मानवता की आंतरिक पुकार के रूप में दिया था।

उन्होंने कहा कि यह संदेश मनुष्य को केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं रखता, बल्कि परिवार, समाज और राष्ट्र के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करते हुए भगवान शिव के आदर्शों पर चलने की प्रेरणा देता है। उनके अनुसार शिव की ओर बढ़ना एक दिन का संकल्प नहीं, बल्कि जीवनभर चलने वाली साधना है।

गुरु, सद्गुरु और जगद्गुरु की भूमिका पर हुई विस्तृत चर्चा

कार्यशाला के दूसरे सत्र में अर्चित आनंद ने गुरु, सद्गुरु और जगद्गुरु के स्वरूप को सरल शब्दों में समझाया। उन्होंने कहा कि गुरु वह होता है जो व्यक्ति के भीतर मौजूद अज्ञान के अंधकार को दूर करने का मार्ग दिखाता है। साधना, जप और आध्यात्मिक अभ्यास के माध्यम से गुरु शिष्य के भीतर शिवभाव जागृत करने का प्रयास करता है।

उन्होंने आगे कहा कि सद्गुरु अपनी करुणा और कृपा से बिना किसी बाहरी साधन के भी शिष्य के भीतर ईश्वर प्रेम का अंकुर विकसित कर सकते हैं। वहीं जगद्गुरु का दायित्व समस्त मानव समाज के आध्यात्मिक उत्थान से जुड़ा होता है।

आध्यात्मिक प्रकाश को बताया जीवन की सच्ची दिशा

शिव शिष्य परिवार के सचिव अभिनव आनंद ने “शिष्यानुभूति : एक प्रकाश स्तंभ” विषय पर विचार रखते हुए कहा कि संसार की भौतिक रोशनी केवल रास्ते दिखाती है, जबकि आध्यात्मिक प्रकाश व्यक्ति को आत्मबोध और शिवत्व की ओर ले जाता है। उन्होंने कहा कि जब व्यक्ति अपने भीतर सकारात्मक परिवर्तन महसूस करता है, तभी शिष्यत्व का वास्तविक उद्देश्य पूरा होता है।

देशभर से पहुंचे शिवशिष्यों ने साझा किए अनुभव

कार्यक्रम में अलग-अलग राज्यों से आए शिवशिष्यों ने अपने आध्यात्मिक अनुभव साझा किए। वक्ताओं ने बताया कि शिव शिष्यता केवल धार्मिक विचार नहीं, बल्कि जीवन जीने की एक सकारात्मक और अनुशासित पद्धति है। समापन अवसर पर गौतम कुमार ने सभी अतिथियों, प्रतिभागियों और आयोजन समिति के प्रति आभार व्यक्त किया।

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