IPS Varun Kapoor: मध्य प्रदेश का जेल विभाग पिछले एक वर्ष में कई सकारात्मक बदलावों के कारण चर्चा में है। इन बदलावों की अगुवाई कर रहे हैं वर्ष 1991 बैच के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी और वर्तमान महानिदेशक जेल (डीजी जेल) डॉ. वरुण कपूर। जुलाई 2025 में जिम्मेदारी संभालने के बाद उन्होंने जेल प्रशासन को केवल सुरक्षा व्यवस्था तक सीमित नहीं रखा, बल्कि सुधार, पुनर्वास और आधुनिक तकनीक को भी प्राथमिकता दी। विभाग के भीतर उनकी कार्यशैली को लेकर लगातार सकारात्मक चर्चा हो रही है।
इंजीनियर से आईपीएस तक का सफर
डॉ. वरुण कपूर की कहानी मेहनत और समर्पण की मिसाल है। एनआईटी त्रिची से मैकेनिकल इंजीनियरिंग करने के बाद उन्होंने साइबर सुरक्षा में पीएचडी भी की। उच्च शिक्षा के बाद उन्होंने कड़ी मेहनत से आईपीएस बनने का मुकाम हासिल किया।

100 से अधिक हत्या के मामलों का खुलासा
करीब तीन दशक से अधिक लंबे प्रशासनिक करियर में डॉ. वरुण कपूर ने प्रदेश के अलग-अलग जिलों और इकाइयों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। एसपी, डीआईजी, आईजी और एडीजीपी जैसे पदों पर रहते हुए उन्होंने कई चुनौतीपूर्ण मामलों की जांच का नेतृत्व किया।
बताया जाता है कि उन्होंने अपने कार्यकाल में 100 से अधिक ऐसे हत्या के मामलों का खुलासा किया, जिनमें लंबे समय तक कोई सुराग नहीं मिल पाया था। यही कारण रहा कि वे एक कुशल जांच अधिकारी के रूप में भी पहचाने गए।
“जेल सुधार गृह बनें” – नया विजन
डीजी जेल बनते ही डॉ. कपूर ने कहा – “जेलें सिर्फ सजा की जगह नहीं, बल्कि बंदियों के सुधार और पुनर्वास का केंद्र होनी चाहिए।” इसी सोच के साथ उन्होंने कई ऐतिहासिक कदम उठाए:
- ओवरक्राउडिंग पर लगाम: जेलों में भीड़ कम करने के लिए नई बैरकों का निर्माण
- तकनीक का इस्तेमाल: बंदियों की कानूनी सुनवाई के लिए अत्याधुनिक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग रूम शुरू
- सुरक्षा ऑडिट: जेलों की सुरक्षा व्यवस्था को और पुख्ता किया गया
- महिला बंदियों पर फोकस: महिलाओं के लिए बेहतर और सुरक्षित व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गईं
अधिकारी बोले, सिस्टम बदला
जेल अधिकारियों का कहना है कि डॉ. कपूर के नेतृत्व में पहली बार जेलों में मानवीय चेहरा देखने को मिल रहा है। शिक्षा, कौशल विकास और स्वास्थ्य पर जोर दिया जा रहा है।
डॉ. वरुण कपूर का यह नेतृत्व साबित करता है कि अगर नीयत साफ हो तो एक अधिकारी पूरे सिस्टम की तस्वीर बदल सकता है।










