Ranchi: JPSC, JSSC-CGL समेत विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ राजधानी रांची में छात्रों का आंदोलन लगातार जारी है। पुराना विधानसभा परिसर में पिछले करीब 15 दिनों से छात्र शांतिपूर्ण महाधरना दे रहे हैं। इसी आंदोलन को समर्थन देने के लिए डुमरी विधायक और झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा के नेता जयराम कुमार महतो रविवार सुबह से 24 घंटे के निर्जल उपवास पर बैठे हैं।
सुबह 7 बजे शुरू हुआ निर्जल उपवास
जयराम महतो ने रविवार सुबह करीब 7 बजे पुराना विधानसभा परिसर पहुंचकर अपना निर्जल उपवास शुरू किया। उनका यह उपवास सोमवार सुबह 7 बजे तक चलने की बात कही गई है। इस दौरान उन्होंने प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी और चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर सरकार से ठोस कार्रवाई की मांग उठाई।

विवादित परीक्षाओं की जांच की मांग
उपवास पर बैठे विधायक ने कहा कि जिन परीक्षाओं को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं, उनकी निष्पक्ष जांच जरूरी है। उन्होंने 14वीं JPSC, JSSC-CGL, ब्लैकलिस्टेड TDPL एजेंसी से जुड़ी परीक्षाओं सहित अन्य विवादित चयन परीक्षाओं को रद्द करने और पूरे मामले की CBI तथा ED से जांच कराने की मांग की।
JPSC-JSSC के अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग
जयराम महतो ने JPSC और JSSC की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाते हुए संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। उन्होंने आयोग के अध्यक्ष, सचिव, सदस्यों के साथ-साथ मामले से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों को तत्काल पद से हटाने की मांग रखी।
छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ का आरोप
आंदोलन को समर्थन देने मांडू विधानसभा क्षेत्र से पहुंचे पूर्व प्रत्याशी बिहारी कुमार महतो ने भी सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं से सबसे अधिक नुकसान उन युवाओं का हो रहा है, जो वर्षों तक मेहनत कर सरकारी नौकरी की तैयारी करते हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार बड़े कोचिंग संस्थानों और कथित कोचिंग माफिया को बचाने की कोशिश कर रही है। उनके मुताबिक, पेपर लीक से जुड़े मामलों की निष्पक्ष जांच होने पर कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं।
हजारों समर्थक और अभिभावक पहुंचे
जयराम महतो के निर्जल उपवास की जानकारी मिलने के बाद बड़ी संख्या में समर्थक और अभिभावक पुराना विधानसभा परिसर पहुंचे। छात्रों के आंदोलन को समर्थन देने पहुंचे लोगों ने प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता और निष्पक्ष भर्ती प्रक्रिया की मांग उठाई।
आंदोलन को मिल रहा राजनीतिक समर्थन
पिछले कई दिनों से चल रहे छात्र आंदोलन में अब राजनीतिक समर्थन भी दिखाई देने लगा है। जयराम महतो का 24 घंटे का निर्जल उपवास इसी कड़ी का हिस्सा माना जा रहा है। छात्रों का कहना है कि भर्ती परीक्षाओं को लेकर उठ रहे सवालों का समाधान केवल आश्वासन से नहीं, बल्कि स्पष्ट जांच और जिम्मेदारी तय करने से होना चाहिए।
सरकार से निर्णायक कार्रवाई की उम्मीद
छात्रों और उनके समर्थकों की मांग है कि विवादित परीक्षाओं से जुड़े मामलों की जांच जल्द पूरी कर दोषियों पर कार्रवाई की जाए और प्रभावित अभ्यर्थियों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए आगे की भर्ती प्रक्रिया स्पष्ट नियमों के तहत कराई जाए। अब नजर इस बात पर है कि सरकार छात्र संगठनों और आंदोलनकारियों की मांगों पर क्या कदम उठाती है।










