Ramgarh Elephant Attack: रामगढ़ जिले के चितरपुर प्रखंड स्थित बड़की पोना गांव में सोमवार की सुबह उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब करीब 15 जंगली हाथियों का झुंड अचानक गांव के भीतर पहुंच गया। हाथियों को गांव की ओर बढ़ते देख ग्रामीणों में दहशत फैल गई। देखते ही देखते लोग सुरक्षित स्थानों की तरफ भागने लगे और कई ग्रामीणों ने घरों की छतों पर जाकर अपनी जान बचाई।
ग्रामीणों को घरों में रहने की सलाह
हाथियों का झुंड गांव के अलग-अलग हिस्सों में घूमता रहा। स्थिति को देखते हुए ग्रामीणों से भीड़ न लगाने और घरों की छतों पर सुरक्षित रहने की अपील की गई। पुलिस मौके पर पहुंचकर लोगों को लगातार सचेत करने के साथ भीड़ को नियंत्रित करने में जुटी रही।

बानो देवी की मौके पर मौत
हाथियों के उत्पात के दौरान खेत में काम कर रही बानो देवी उनकी चपेट में आ गईं। बताया गया कि हाथियों ने उन्हें कुचल दिया, जिससे मौके पर ही उनकी मौत हो गई। घटना की खबर गांव में फैलते ही दहशत और बढ़ गई। ग्रामीणों में हाथियों के गांव के भीतर मौजूद रहने को लेकर भय का माहौल बना रहा।
इलाज के दौरान घायल महिला ने तोड़ा दम
हाथियों के हमले में गंभीर रूप से घायल सबीना ने भी बाद में दम तोड़ दिया। इसके साथ ही इस घटना में मृतकों की संख्या दो हो गई है। हादसे में एक पुरुष के भी घायल होने की जानकारी सामने आई है। घटना ने पूरे इलाके को झकझोर दिया है।
वन विभाग और पुलिस की टीम सक्रिय
हाथियों का झुंड खबर लिखे जाने तक गांव के आसपास ही घूम रहा था। पुलिस और वन विभाग की टीम मौके पर मौजूद है और हाथियों को सुरक्षित तरीके से आबादी वाले इलाके से बाहर निकालने का प्रयास किया जा रहा है। प्रशासन की ओर से ग्रामीणों को हाथियों के करीब नहीं जाने और किसी तरह की भीड़ न जुटाने की हिदायत दी जा रही है।
सुरक्षा को लेकर सतर्कता जरूरी
जंगली हाथियों के गांव में प्रवेश के बाद सबसे बड़ी चिंता ग्रामीणों की सुरक्षा को लेकर है। हाथियों का झुंड लगातार एक स्थान से दूसरे स्थान की ओर बढ़ रहा है, ऐसे में लोगों को घरों से बाहर निकलने से रोका जा रहा है। पुलिस और वन विभाग की टीम हालात पर नजर बनाए हुए है।
हाथियों को सुरक्षित जंगल की ओर भेजने की चुनौती
बड़की पोना गांव की इस घटना ने एक बार फिर इंसानी बस्तियों के करीब पहुंच रहे जंगली हाथियों और मानव-वन्यजीव संघर्ष की गंभीरता को सामने ला दिया है। फिलहाल प्राथमिकता हाथियों को बिना किसी और नुकसान के गांव से बाहर निकालना और ग्रामीणों की जान की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। दो महिलाओं की मौत के बाद गांव में मातम के साथ-साथ हाथियों को लेकर गहरा डर बना हुआ है।










