Raebareli: रायबरेली में वन विभाग की डीजल पर्ची पर उठे सवाल, चालक का कथित नकदी लेते वीडियो वायरल; जांच की मांग

वन विभाग के चालक पर विभागीय धन के दुरुपयोग के आरोप, पेट्रोल पंप पर पर्ची भरने के बाद कथित तौर पर नगद लेने का वीडियो सामने आने से मचा हड़कंप

Raebareli: रायबरेली में आज दिनांक 25 अगस्त 2026 दिन मंगलवार को समय करीब 9:00 बजे एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं यहां शहर कोतवाली थाना क्षेत्र के इंडियन पेट्रोल पंप का बताया जा रहा है वीडियो दरअसल वन विभाग से जुड़ा एक वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वायरल वीडियो को सिविल लाइन स्थित बरगद चौराहे के पास इंडियन ऑयल पेट्रोल पंप का बताया जा रहा है। वीडियो में एक व्यक्ति के पेट्रोल पंप पर डीजल की पर्ची भरने के बाद कथित तौर पर नगद रकम लेते हुए दिखाई देने का दावा किया जा रहा है। वीडियो सामने आने के बाद वन विभाग में विभागीय धन के इस्तेमाल को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

बताया जा रहा है कि वायरल वीडियो में दिखाई देने वाला व्यक्ति संतोष नामक चालक है, जो वन विभाग के सचल दल तथा डीएफओ की गाड़ी से जुड़ा बताया जा रहा है। आरोप है कि विभागीय वाहनों में डीजल भरवाने के लिए जारी होने वाली पर्चियों के नाम पर कथित रूप से अनियमितता की जा रही थी। हालांकि वीडियो में दिखाई दे रही गतिविधि और उस पर लगाए जा रहे आरोपों की अभी तक किसी सक्षम अधिकारी की ओर से आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

मामला सामने आने के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर विभागीय वाहनों के लिए जारी होने वाली डीजल पर्चियों का हिसाब-किताब किस तरह रखा जाता है और पेट्रोल पंप से जारी पर्चियों का विभागीय अभिलेखों से कितना मिलान होता है। यदि वायरल वीडियो में लगाए जा रहे आरोप सही पाए जाते हैं तो यह सरकारी धन के दुरुपयोग से जुड़ा गंभीर मामला हो सकता है।

CCTV फुटेज से खुल सकता है राज

वायरल वीडियो को लेकर पेट्रोल पंप पर लगे CCTV कैमरों की फुटेज महत्वपूर्ण मानी जा रही है। यदि विभागीय स्तर पर जांच होती है तो संबंधित तारीख और समय की CCTV फुटेज, डीजल पर्चियों, वाहन लॉगबुक, डीजल खपत के रिकॉर्ड तथा संबंधित चालक से पूछताछ के जरिए पूरे मामले की वास्तविकता सामने आ सकती है।

जांच और कार्रवाई पर नजर

वीडियो वायरल होने के बाद अब लोगों की नजर वन विभाग के अधिकारियों की संभावित जांच पर है। विभाग यदि मामले की जांच कराता है तो यह स्पष्ट हो सकेगा कि वायरल वीडियो में दिखाई दे रही गतिविधि वास्तव में क्या थी और क्या विभागीय डीजल पर्चियों के माध्यम से किसी प्रकार की वित्तीय अनियमितता हुई है।

फिलहाल वायरल वीडियो और लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र एवं आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में जांच पूरी होने से पहले किसी व्यक्ति को दोषी मानना उचित नहीं होगा। अब देखना यह है कि वन विभाग इस वायरल वीडियो का संज्ञान लेकर जांच कराता है या मामला केवल सोशल मीडिया तक सीमित रह जाता है।

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