झारखंड में खनिज विधेयक पर JMM का बड़ा ऐलान, 7 सितंबर को सभी प्रखंड मुख्यालयों पर धरना

फागू बेसरा बोले- खनिज संशोधन विधेयक झारखंड के अधिकारों और आर्थिक हितों पर चोट, 31 अगस्त तक बूथ स्तर पर चलेगा जनजागरण अभियान

झारखंड में केंद्र सरकार के प्रस्तावित खान एवं खनिज संशोधन विधेयक 2026 को लेकर सियासी माहौल गरमाता जा रहा है। सत्तारूढ़ झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) ने इस मुद्दे पर केंद्र सरकार के खिलाफ आंदोलन को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाने का फैसला किया है। पार्टी का कहना है कि यह विधेयक राज्य के अधिकारों और खनिज संसाधनों से जुड़े आर्थिक हितों को प्रभावित कर सकता है।

7 सितंबर को प्रखंड मुख्यालयों पर धरना

JMM के केंद्रीय महासचिव फागू बेसरा (Fagu Besra) ने आंदोलन की रूपरेखा की जानकारी देते हुए कहा कि आगामी 7 सितंबर को झारखंड के सभी प्रखंड मुख्यालयों पर धरना-प्रदर्शन किया जाएगा। पार्टी कार्यकर्ताओं से लेकर स्थानीय स्तर के पदाधिकारियों तक को आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाने के निर्देश दिए गए हैं।

31 अगस्त तक बूथ स्तर पर जनजागरण

पार्टी ने केवल धरने तक आंदोलन को सीमित नहीं रखने की रणनीति बनाई है। इसके लिए राज्य के सभी 24 जिलों में बूथ स्तर पर जनजागरण अभियान चलाया जा रहा है। फागू बेसरा (Fagu Besra) के मुताबिक, यह अभियान 31 अगस्त तक जारी रहेगा। इसके जरिए लोगों को विधेयक के संभावित प्रभावों और पार्टी के विरोध के कारणों से अवगत कराया जाएगा।

विधेयक वापस लेने की मांग

JMM का कहना है कि झारखंड प्राकृतिक संसाधनों से संपन्न राज्य है और यहां के खनिजों का राज्य की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान है। पार्टी केंद्र सरकार से इस विधेयक को वापस लेने की मांग कर रही है। नेताओं का आरोप है कि प्रस्तावित बदलावों से राज्य के हित प्रभावित हो सकते हैं।

मांग नहीं मानी तो आंदोलन होगा तेज

फागू बेसरा ने स्पष्ट किया कि यदि केंद्र सरकार ने विधेयक को वापस नहीं लिया तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। उन्होंने कहा कि पार्टी जरूरत पड़ने पर उग्र आंदोलन का रास्ता अपनाएगी। इसी क्रम में आर्थिक नाकेबंदी की भी चेतावनी दी गई है।

खनिज बाहर जाने से रोकने की चेतावनी

JMM महासचिव ने कहा कि आंदोलन के अगले चरण में झारखंड से निकलने वाले कोयला, लोहा और अन्य खनिज पदार्थों की आवाजाही को रोकने की रणनीति भी अपनाई जा सकती है। हालांकि, आर्थिक नाकेबंदी की यह चेतावनी आंदोलन के आने वाले स्वरूप को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर भी चर्चा का विषय बन सकती है।

झारखंड की राजनीति में बढ़ सकती है हलचल

खनिज और प्राकृतिक संसाधनों से जुड़े मुद्दे झारखंड की राजनीति में हमेशा संवेदनशील रहे हैं। ऐसे में JMM की ओर से आंदोलन की घोषणा के बाद आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी और तेज होने की संभावना है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि केंद्र सरकार और राज्य सरकार के बीच इस विधेयक को लेकर आगे क्या रुख सामने आता है।

Other Latest News

Leave a Comment