Raebareli: मलके गांव में लेखपाल विवाद ने पकड़ा तूल, जांच में आरोपों की पुष्टि नहीं; ADM ने दी जानकारी

सरेनी के मलकेगांव का मामला, प्रशासनिक जांच में लेखपाल पर लगे आरोपों की पुष्टि नहीं; शिकायती पत्र और महिला के बयानों में भी सामने आया अंतर

Raebareli: लालगंज तहसील क्षेत्र के सरेनी थाना क्षेत्र के मलकेगांव में क्षेत्रीय लेखपाल पर लगाए गए गंभीर आरोपों के मामले ने सोशल मीडिया पर तूल पकड़ने के बाद नया मोड़ ले लिया है। एक महिला ने बारिश से कच्चा मकान क्षतिग्रस्त होने के बाद मुआवजे की रिपोर्ट लगाने के बदले रुपये मांगने और रुपये न देने पर बेटी को भेजने की कथित मांग का आरोप लगाया था। मामले में जिला प्रशासन की ओर से गठित टीम ने 11 सितंबर को मौके पर पहुंचकर जांच की। प्रशासन के अनुसार जांच के दौरान लेखपाल के खिलाफ लगाए गए आरोपों की पुष्टि करने वाले कोई साक्ष्य नहीं मिले।

आपको बता दे कि आज दिनांक 13 सितंबर 2026 दिन रविवार को समय करीब 2:00 बजे एटीएम प्रशासन सिद्धार्थ के निर्देश पर,उप जिलाधिकारी लालगंज राजेश श्रीवास्तव के अनुसार जांच में सामने आया कि बाबूशंकर द्विवेदी के कच्चे मकान का कुछ हिस्सा क्षतिग्रस्त हुआ था। क्षेत्रीय लेखपाल ने सात सितंबर को प्रपत्र-20 पर इसकी सूचना दी और राजस्व निरीक्षक कार्यालय में आख्या प्रस्तुत की। इसके बाद आवेदन पोर्टल पर ऑनलाइन कर अग्रिम कार्रवाई के लिए भेजा गया, जांच में ग्राम प्रधान और ग्रामीणों ने लेखपाल द्वारा किसी प्रकार की धनराशि या अन्य प्रलोभन मांगने से इनकार किया।

महिला के पिता बाबूशंकर ने भी लेखपाल को सरल स्वभाव का बताते हुए आरोपों को गलत बताया। प्रशासनिक रिपोर्ट में कहा गया है कि महिला की ओर से घर गिरने के अनुतोष की मांग की गई थी, लेकिन पात्रता की श्रेणी में न आने के कारण उसके पक्ष में रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं की गई। इसी से नाराज होकर आरोप लगाए जाने की बात जांच में सामने आई।

हालांकि, मामले को लेकर महिला के शिकायती पत्र और वायरल वीडियो में लगाए गए आरोपों ने कई सवाल भी खड़े किए हैं। महिला के पांच सितंबर के शिकायती पत्र में 12 अगस्त की रिपोर्ट का उल्लेख है। उपलब्ध विवरण के मुताबिक यह रिपोर्ट घर गिरने से संबंधित न होकर महिला और उसके जेठ के बीच पानी निकासी को लेकर हुए विवाद से जुड़ी बताई जा रही है। ऐसे में रिपोर्ट को लेकर लगाए गए आरोपों की स्थिति भी सवालों के घेरे में है।

सोशल मीडिया पर वीडियो सामने आने के बाद कांग्रेस और समाजवादी पार्टी से जुड़े लोगों ने भी सरकार और प्रशासन पर सवाल उठाए थे। वहीं लेखपाल दिनेश कुमार सविता ने आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए कहा कि मनमाफिक रिपोर्ट न लगाए जाने से उन्हें निशाना बनाया जा रहा है। फिलहाल प्रशासनिक जांच में आरोप प्रमाणित नहीं हुए हैं, जबकि महिला अपने आरोपों पर कायम है। ऐसे में पूरे मामले की निष्पक्षता और उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर स्थिति का अंतिम सच सामने आना बाकी है।

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