Ganesh Chaturthi Moon Sighting: देशभर में सोमवार, 14 सितंबर 2026 को गणेश चतुर्थी का पर्व श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। घरों से लेकर सार्वजनिक पंडालों तक गणपति बप्पा की स्थापना की जा रही है। भक्त भगवान गणेश की पूजा-अर्चना कर सुख-समृद्धि और विघ्नों से मुक्ति की कामना करते हैं। लेकिन इस उत्सव के बीच एक ऐसी धार्मिक मान्यता भी है, जिसका ध्यान श्रद्धालु विशेष रूप से रखते हैं।
चतुर्थी के दिन चांद देखने से क्यों करते हैं परहेज?

धार्मिक मान्यताओं में गणेश चतुर्थी की तिथि को चंद्र दर्शन के लिए निषिद्ध माना गया है। कहा जाता है कि इस दिन यदि कोई व्यक्ति चंद्रमा को देख ले तो उसे भविष्य में ऐसे आरोप या बदनामी का सामना करना पड़ सकता है, जिसकी उसने कल्पना भी न की हो। इसी मान्यता के कारण गणेश चतुर्थी की शाम चंद्रमा की ओर देखने से लोग बचते हैं।
चंद्रदेव को था अपने सौंदर्य पर घमंड
इस मान्यता के पीछे भगवान गणेश और चंद्रदेव से जुड़ी एक पौराणिक कथा प्रचलित है। कथा के मुताबिक चंद्रदेव को अपनी सुंदरता पर बहुत अभिमान था। एक प्रसंग में उनकी नजर गणपति के गजमुख स्वरूप पर पड़ी। चंद्रदेव भगवान गणेश के रूप को देखकर हंसने लगे और उनका उपहास किया।
गणेश जी ने दिया चंद्रमा को श्राप
चंद्रदेव का यह व्यवहार गणेश जी को अच्छा नहीं लगा। उन्होंने चंद्रमा के अहंकार को समाप्त करने के लिए उन्हें श्राप दिया। मान्यता के अनुसार गणेश जी ने कहा कि जो व्यक्ति गणेश चतुर्थी के दिन चंद्रमा के दर्शन करेगा, उस पर झूठा कलंक लग सकता है। इसी श्राप को गणेश चतुर्थी पर चंद्र दर्शन से जुड़ी धार्मिक मान्यता का आधार माना जाता है।
इसी वजह से कहलाती है ‘कलंक चतुर्थी’
गणेश चतुर्थी को कुछ परंपराओं में ‘कलंक चतुर्थी’ भी कहा जाता है। इसके पीछे यही विश्वास है कि इस दिन चंद्रमा को देखने वाला व्यक्ति बिना गलती किए भी किसी गलत आरोप या बदनामी में फंस सकता है। हालांकि यह पूरी मान्यता धार्मिक और पौराणिक कथाओं पर आधारित है, जिसका पालन श्रद्धालु अपनी आस्था के अनुसार करते हैं।
श्रीकृष्ण से भी जुड़ा है चंद्र दर्शन का प्रसंग
चंद्र दर्शन से जुड़ी मान्यता को भगवान श्रीकृष्ण की स्यामंतक मणि वाली कथा से भी जोड़ा जाता है। धार्मिक कथा के अनुसार श्रीकृष्ण पर स्यामंतक मणि चोरी करने का आरोप लगा था। बाद में उन्होंने अपनी निर्दोषता साबित की। इस प्रसंग को गणेश चतुर्थी के दिन चंद्र दर्शन से होने वाले कथित ‘मिथ्या दोष’ से जोड़कर देखा जाता है।
गलती से चांद दिख जाए तो घबराएं नहीं
अगर अनजाने में गणेश चतुर्थी के दिन चंद्रमा दिखाई दे जाए तो धार्मिक मान्यता के अनुसार घबराने की जरूरत नहीं है। ऐसी स्थिति में भगवान गणेश का स्मरण करके उनकी पूजा करनी चाहिए। साथ ही स्यामंतक मणि की कथा का श्रवण या पाठ करना भी दोष निवारण के लिए शुभ माना गया है।
गणपति से क्षमा मांगने की भी है मान्यता
चंद्र दर्शन हो जाने के बाद श्रद्धालु भगवान गणेश से अपनी भूल के लिए क्षमा प्रार्थना कर सकते हैं। धार्मिक विश्वास के अनुसार सच्ची श्रद्धा से गणेश जी का पूजन और कथा श्रवण करने से चंद्र दर्शन से जुड़े दोष का प्रभाव कम किया जा सकता है। हालांकि, ये सभी उपाय धार्मिक मान्यताओं पर आधारित हैं और इन्हें आस्था के संदर्भ में ही देखा जाना चाहिए।
आस्था से जुड़ी है सदियों पुरानी परंपरा
गणेश चतुर्थी पर चंद्र दर्शन से बचने की परंपरा सिर्फ एक निषेध नहीं, बल्कि भगवान गणेश और चंद्रदेव से जुड़ी उस कथा की याद भी दिलाती है, जिसमें अहंकार और उसके परिणाम का संदेश मिलता है। यही वजह है कि गणपति उत्सव के दौरान भक्त पूजा के साथ इस धार्मिक मान्यता का भी ध्यान रखते हैं।










