MP Politics: कैबिनेट फेरबदल की आहट तेज, ‘दादा दयालु’ समेत इन नामों पर नजर; हाईकमान के फैसले का इंतजार

MP Politics: मोहन यादव सरकार में नए चेहरों की एंट्री और पुराने मंत्रियों के विभाग बदलने की चर्चा तेज, मालवा से ग्वालियर-चंबल तक नेताओं की सक्रियता बढ़ी

MP Politics: मध्य प्रदेश की सियासत में इन दिनों सबसे ज्यादा चर्चा मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की कैबिनेट को लेकर है। सरकार के संभावित फेरबदल ने भोपाल के राजनीतिक गलियारों में हलचल बढ़ा दी है। सवाल सिर्फ नए मंत्रियों के नामों का नहीं है, बल्कि यह भी है कि क्या कुछ मौजूदा मंत्रियों के विभाग बदले जाएंगे या किसी की कैबिनेट से छुट्टी हो सकती है।

दिल्ली दौरे ने बढ़ाए सियासी कयास

हालिया घटनाक्रम में विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर और पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा की दिल्ली में पार्टी नेताओं से मुलाकात को भी अहम माना जा रहा है। दोनों नेताओं की सक्रियता को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हैं। हालांकि, दिल्ली दौरे के पीछे वास्तविक एजेंडा क्या था, इस पर पार्टी की ओर से कोई स्पष्ट तस्वीर सामने नहीं आई है।

नरोत्तम मिश्रा को लेकर भी अटकलें

राजनीतिक चर्चाओं में नरोत्तम मिश्रा का नाम लगातार बना हुआ है। 2023 के विधानसभा चुनाव में हार और इसके बाद दतिया उपचुनाव में टिकट नहीं मिलने के बावजूद उनकी राजनीतिक सक्रियता पर नजर है। पार्टी के अंदर उनके अगले कदम को लेकर भी अटकलें लगती रही हैं। माना जा रहा है कि संगठन से जुड़ी जिम्मेदारी मिलने की उनकी उम्मीद अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है।

यूपी चुनाव से जुड़ी जिम्मेदारी की चर्चा

सूत्रों के हवाले से यह भी चर्चा है कि नरेंद्र सिंह तोमर और नरोत्तम मिश्रा को उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की तैयारियों में भूमिका दी जा सकती है। यदि ऐसा होता है तो मध्य प्रदेश की आंतरिक राजनीति में उनके प्रभाव को लेकर चल रही चर्चाओं को फिलहाल विराम मिल सकता है। हालांकि, अंतिम फैसला पार्टी नेतृत्व को ही करना है।

‘दादा दयालु’ का नाम सबसे ज्यादा चर्चा में

कैबिनेट विस्तार की संभावित सूची में इंदौर-2 से विधायक रमेश मेंदोला का नाम खास तौर पर चर्चा में है। कार्यकर्ताओं के बीच ‘दादा दयालु’ के नाम से लोकप्रिय मेंदोला लंबे समय से मंत्री पद के संभावित दावेदार माने जाते रहे हैं। मालवा क्षेत्र के समीकरणों को देखते हुए उनके नाम को इस बार भी मजबूत दावेदारों में गिना जा रहा है।

सिंधिया खेमे की भी नजर

कैबिनेट में बदलाव की चर्चा के बीच केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के समर्थक नेताओं को लेकर भी अटकलें तेज हैं। सागर और इंदौर से जुड़े मंत्रियों को लेकर राजनीतिक विरोध की चर्चाएं सामने आती रही हैं। जहरीली शराब और पेयजल से जुड़ी घटनाओं ने सरकार पर विपक्ष और असंतुष्टों के हमले बढ़ाने का मौका जरूर दिया है।

चार नए चेहरों की संभावना

पार्टी सूत्रों के मुताबिक, अगर नेतृत्व में कोई बड़ा बदलाव नहीं होता है तो भी कैबिनेट में विस्तार या फेरबदल की संभावना से इनकार नहीं किया जा रहा। संभावित दावेदारों में गोपाल भार्गव, अर्चना चिटनिस, मालिनी गौड़, रमेश मेंदोला, बृजेंद्र सिंह यादव, शैलेंद्र जैन, प्रदीप लारिया और कमलेश शाह जैसे नाम चर्चा में हैं।

वरिष्ठता बनाम क्षेत्रीय समीकरण

गोपाल भार्गव की दावेदारी सबसे अलग मानी जाती है। नौ बार के विधायक और लंबे प्रशासनिक अनुभव के कारण उनका नाम वरिष्ठता के आधार पर मजबूत है। वहीं मालिनी गौड़ को इंदौर के साथ महिला प्रतिनिधित्व का लाभ मिल सकता है। अर्चना चिटनिस भी पहले मंत्री रह चुकी हैं और संगठन व सरकार दोनों का अनुभव रखती हैं।

विभागों में बदलाव भी बन सकता है बड़ा मुद्दा

जुलाई में मुख्यमंत्री मोहन यादव द्वारा लखन पटेल से पशुपालन विभाग वापस लेकर अपने पास रखे जाने के बाद विभागीय फेरबदल की चर्चाओं ने भी जोर पकड़ा। गृह और जनसंपर्क जैसे अहम विभागों को लेकर भी राजनीतिक हलकों में चर्चा है। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल द्वारा मंत्रियों के कामकाज का फीडबैक लिए जाने की खबरों ने इन अटकलों को और हवा दी है।

अंतिम फैसला दिल्ली से होगा

फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि कैबिनेट में कितने नए चेहरे आएंगे और किन पुराने चेहरों की जिम्मेदारियां बदली जाएंगी। मुख्यमंत्री मोहन यादव और प्रदेश संगठन की भूमिका अहम जरूर है, लेकिन अंतिम मुहर भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व लगाएगा। ऐसे में मध्य प्रदेश की सियासत में आने वाले दिनों में दिल्ली की हर हलचल पर नजर रहेगी।

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