Vishwakarma Puja 2026: हर साल कन्या संक्रांति के अवसर पर भगवान विश्वकर्मा की पूजा की जाती है। इस दिन फैक्टरी, वर्कशॉप, दुकान, गैराज और घरों में काम आने वाले औजारों, मशीनों और उपकरणों की सफाई कर पूजा की जाती है। इस वर्ष विश्वकर्मा पूजा 17 सितंबर 2026 को मनाई जाएगी। पर्व की तैयारियों के दौरान जब पुराने सामान सामने आते हैं तो उन्हें लेकर लोगों के मन में कई सवाल भी उठते हैं।
पुराना है तो फेंकना जरूरी नहीं

किसी औजार का पुराना हो जाना यह साबित नहीं करता कि वह पूजा के लायक नहीं है। यदि हथौड़ा, पेचकस, रिंच, ड्रिल या कोई अन्य उपकरण अभी भी इस्तेमाल किया जा सकता है, तो उसे साफ करके पूजा में शामिल किया जा सकता है। औजार पर चंदन या रोली का तिलक लगाकर अक्षत और पुष्प अर्पित किए जा सकते हैं। यहां मुख्य बात उसकी उम्र नहीं, बल्कि उसकी उपयोगिता है।
पुश्तैनी औजारों का अलग महत्व
कई परिवारों में ऐसे औजार संभालकर रखे जाते हैं जिनका इस्तेमाल कभी पिता, दादा या परिवार के पुराने कारीगर किया करते थे। आज भले ही वे औजार रोजमर्रा के काम में न आते हों, लेकिन उनसे जुड़ी यादें और मेहनत की कहानी परिवार के लिए खास होती है। ऐसे सामान को साफ कर पूजा में रखना और बाद में सुरक्षित स्थान पर संभालना एक अच्छा विकल्प हो सकता है।
पूरी तरह खराब सामान को लेकर क्या करें?
अगर कोई मशीन या औजार मामूली खराबी के कारण बंद है और उसकी मरम्मत संभव है, तो उसे अलग रखकर ठीक कराया जा सकता है। लेकिन जो सामान पूरी तरह टूट चुका है, जंग से खराब हो गया है या इस्तेमाल करने पर चोट अथवा दुर्घटना का खतरा पैदा कर सकता है, उसे केवल पूजा के नाम पर इस्तेमाल करना जरूरी नहीं है। धार्मिक आस्था के साथ सुरक्षा का ध्यान रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
खराब मोबाइल और लैपटॉप कूड़े में न फेंकें
आज विश्वकर्मा पूजा केवल पारंपरिक औजारों तक सीमित नहीं है। कंप्यूटर, लैपटॉप, मोबाइल, प्रिंटर, चार्जर, बैटरी और दूसरी इलेक्ट्रॉनिक मशीनें भी काम का अहम हिस्सा हैं। खराब इलेक्ट्रॉनिक सामान को सामान्य कूड़े में फेंकने के बजाय अधिकृत ई-वेस्ट कलेक्शन सेंटर या रिसाइक्लर तक पहुंचाना बेहतर है। इससे पर्यावरण को होने वाले नुकसान को कम किया जा सकता है।
नदी या खुले स्थान पर न छोड़ें सामान
पुराने औजार या मशीन के पुर्जों को नदी में बहाना, सड़क किनारे छोड़ना या पेड़ के नीचे फेंकना उचित तरीका नहीं है। इससे पर्यावरण प्रदूषण के साथ दूसरे लोगों के लिए चोट का खतरा भी पैदा हो सकता है। धार्मिक आयोजन के बाद सामान का निपटारा भी जिम्मेदारी के साथ किया जाना चाहिए।
यादों से जुड़ा औजार हो तो संभालकर रखें
अगर कोई पुराना औजार अब काम का नहीं है, लेकिन उससे परिवार की भावनाएं जुड़ी हैं, तो उसे तुरंत कबाड़ में देने की जरूरत नहीं। उसे साफ करके पूजा में रखा जा सकता है और बाद में सुरक्षित स्थान पर स्मृति के तौर पर संभाला जा सकता है। यदि उसे रखना संभव नहीं है, तो धातु या इलेक्ट्रॉनिक सामग्री के अनुसार उचित रिसाइक्लिंग का रास्ता अपनाया जा सकता है।
पूजा का संदेश केवल मशीनों तक सीमित नहीं
भगवान विश्वकर्मा की पूजा मेहनत, हुनर, निर्माण और काम के साधनों के प्रति सम्मान से जुड़ी मानी जाती है। इसलिए पूजा के दिन औजारों पर तिलक लगाने के साथ उनकी सही देखभाल करना भी जरूरी है। समय पर मशीन की सर्विस, खराब उपकरण की मरम्मत और अनुपयोगी सामान का सही निपटारा इसी सोच को आगे बढ़ाता है।
इस बार पूजा में अपनाएं जिम्मेदारी का तरीका
विश्वकर्मा पूजा के मौके पर घर या दुकान में रखे हर पुराने सामान को पूजा में रखना जरूरी नहीं है। जो उपकरण उपयोगी हैं उनकी सफाई करें, जिन्हें सुधारा जा सकता है उन्हें ठीक कराएं और जो पूरी तरह खराब हैं उन्हें उचित तरीके से हटाएं। यही आस्था के साथ सुरक्षा और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी निभाने का बेहतर तरीका है।










