Jharkhand: झारखंड की राजनीति में एक बार फिर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री योगेंद्र साव की ओर से सरकार को लेकर लगाए गए आरोपों को लेकर भाजपा नेता एवं नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने सरकार और कांग्रेस नेतृत्व पर निशाना साधा है। मरांडी ने कहा कि जब सत्तारूढ़ गठबंधन के ही वरिष्ठ नेता अपनी सरकार की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं, तो इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
योगेंद्र साव के बयान को बनाया मुद्दा

बाबूलाल मरांडी ने कहा कि योगेंद्र साव लंबे समय तक सरकार और संगठन से जुड़े रहे हैं। ऐसे में उनके द्वारा सरकार पर लगाए गए आरोपों ने राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है। मरांडी के मुताबिक, अगर कांग्रेस के भीतर ही सरकार की कार्यप्रणाली को लेकर असंतोष है तो पार्टी नेतृत्व को इस पर सार्वजनिक तौर पर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
राहुल गांधी से पूछा सीधा सवाल
मरांडी ने अपने निशाने पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी को भी रखा। उन्होंने सवाल किया कि झारखंड सरकार के कामकाज को लेकर कांग्रेस के भीतर से लगातार सवाल उठने के बावजूद केंद्रीय नेतृत्व सरकार के साथ खड़ा क्यों दिखाई देता है। उन्होंने कहा कि नियुक्तियों और रोजगार से जुड़े मामलों को लेकर भी सवाल उठते रहे हैं, ऐसे में कांग्रेस नेतृत्व को इन मुद्दों पर अपना पक्ष सामने रखना चाहिए।
खनन से लेकर टेंडर तक उठाए सवाल
नेता प्रतिपक्ष ने अपने बयान में राज्य में पत्थर, बालू, कोयला और लौह अयस्क के कथित अवैध खनन का मुद्दा भी उठाया। इसके अलावा उन्होंने टेंडर प्रक्रिया में कथित कमीशन और ट्रांसफर-पोस्टिंग को लेकर लगाए जाने वाले आरोपों का जिक्र किया। हालांकि ये सभी आरोप राजनीतिक तौर पर लगाए गए दावे हैं और इनकी पुष्टि के लिए संबंधित मामलों में आधिकारिक जांच या दस्तावेजी साक्ष्य जरूरी होंगे।
बोले- कई नेता चुप क्यों हैं?
मरांडी ने दावा किया कि कांग्रेस के कई नेताओं के मन में भी सरकार की कार्यशैली को लेकर सवाल हैं, लेकिन अलग-अलग कारणों से वे सार्वजनिक रूप से कुछ नहीं बोल रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ नेता मंत्री पद की वजह से चुप हैं, जबकि कुछ अन्य कथित आर्थिक हितों के कारण आवाज नहीं उठा रहे हैं। ये आरोप भी मरांडी के राजनीतिक बयान का हिस्सा हैं।
जनता के बीच जाने की कही बात
बाबूलाल मरांडी ने कहा कि फिलहाल योगेंद्र साव ने सरकार को लेकर सवाल उठाए हैं, लेकिन आगे चलकर यही सवाल झारखंड की जनता कांग्रेस नेतृत्व से पूछ सकती है। उन्होंने राहुल गांधी से सरकार के कामकाज और उन पर लग रहे आरोपों को लेकर जवाब देने की मांग की।
पहले भी सरकार पर सवाल उठाते रहे हैं साव
गौरतलब है कि योगेंद्र साव इससे पहले भी राज्य सरकार और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को लेकर सार्वजनिक रूप से टिप्पणियां कर चुके हैं। मार्च 2026 में उनके खिलाफ कांग्रेस ने अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए तीन साल के निष्कासन का फैसला लिया था। बाद में जून में प्रदेश कांग्रेस ने उनका निष्कासन वापस लेकर पार्टी में उनकी वापसी का रास्ता साफ किया था।
आरोपों पर सियासी घमासान जारी
इस पूरे घटनाक्रम ने झारखंड में सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच राजनीतिक टकराव को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है। एक तरफ बाबूलाल मरांडी सरकार की कार्यप्रणाली और कांग्रेस नेतृत्व की भूमिका पर सवाल उठा रहे हैं, वहीं कांग्रेस पहले भी भाजपा नेताओं के आरोपों पर सबूत सार्वजनिक करने की मांग कर चुकी है।










