Raebareli: ADG के आदेश को रायबरेली में ठेंगा? 25 मई को हुआ तबादला, चार महीने बाद भी नहीं हुई रवानगी; कई पुलिसकर्मी अब भी रायबरेली में जमे

अन्य तबादला किए गए कर्मी हो चुके रवाना, इनकी रवानगी पर चुप्पी क्यों? आदेश के अनुपालन को लेकर उठे बड़े सवाल

Raebareli: पुलिस विभाग में तबादले के आदेश भी अगर महीनों तक फाइलों में धूल फांकते रहें तो सवाल उठना लाजिमी है। रायबरेली में अपर पुलिस महानिदेशक, लखनऊ जोन, लखनऊ के 25 मई 2026 के स्थानांतरण आदेश के अनुपालन को लेकर ऐसा ही गंभीर मामला सामने आया है। आरोप है कि आदेश जारी होने के करीब चार महीने बाद भी स्थानांतरित किए गए कई पुलिसकर्मी रायबरेली से कार्यमुक्त नहीं किए गए हैं।

बताया गया है कि आदेश के तहत उपनिरीक्षक लालचंद यादव के साथ ही हेड कांस्टेबल सत्येंद्र दिवाकर, अमित कुमार सिंह, उमाशंकर और राजीव शुक्ला समेत अन्य पुलिसकर्मियों का स्थानांतरण अयोध्या परिक्षेत्र, अयोध्या किया गया था। लेकिन आरोप है कि इन कर्मचारियों की अभी तक रायबरेली से रवानगी नहीं हुई है। इतना ही नहीं, शिकायत के मुताबिक उनकी रवानगी के लिए कोई निश्चित तिथि भी तय नहीं की गई है।

एक ही आदेश, फिर अलग-अलग नियम क्यों?

मामले में सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि जब 25 मई के उसी आदेश के तहत स्थानांतरित अन्य #पुलिसकर्मियों को रायबरेली से कार्यमुक्त कर दिया गया, तो फिर इन कर्मचारियों की रवानगी क्यों अटकी हुई है? क्या इनके मामले में कोई अलग प्रशासनिक व्यवस्था है? अगर नहीं, तो फिर उच्चाधिकारी के आदेश के अनुपालन में देरी की वजह क्या है?

पुलिस विभाग में स्थानांतरण आदेश महज कागजी खानापूर्ति नहीं होते, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था और विभागीय अनुशासन का हिस्सा होते हैं। ऐसे में किसी स्थानांतरण आदेश जारी होने के बाद भी लंबे समय तक अनुपालन न होना अपने आप में गंभीर सवाल खड़े करता है।

लंबे समय से जमे कर्मियों पर पहले से उठते रहे हैं सवाल

शिकायत में यह भी कहा गया है कि संबंधित पुलिसकर्मियों में कुछ कर्मचारी रायबरेली जनपद में लंबे समय से तैनात हैं। ऐसे में उनके स्थानांतरण के बावजूद रवानगी लंबित रहने को लेकर विभागीय व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

अब निगाहें पुलिस विभाग के उच्चाधिकारियों पर हैं कि 25 मई 2026 के एडीजी लखनऊ जोन के आदेश का पूरी तरह अनुपालन कब तक कराया जाता है। मांग है कि स्थानांतरण आदेश में शामिल शेष पुलिसकर्मियों को तत्काल रायबरेली से कार्यमुक्त कर अयोध्या परिक्षेत्र के लिए रवाना किया जाए, ताकि उच्चाधिकारी के आदेश की मंशा पूरी हो सके।

बड़ा सवाल यही है—जब आदेश जारी हो चुका, अन्य कर्मी रवाना हो चुके और स्थानांतरण स्थल भी निर्धारित है, तो फिर इन कर्मचारियों की रवानगी में आखिर इतनी लंबी देरी क्यों?

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