Raebareli: लखनऊ से प्रयागराज जाते समय अपनी जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष स्वामी प्रसाद मौर्य मंगलवार को मिल एरिया थाना क्षेत्र के सारस चौराहे पर रुके। यहां अपनी जनता पार्टी के जिलाध्यक्ष प्रेमचंद मौर्य के नेतृत्व में दर्जनों कार्यकर्ताओं ने उनका फूल-मालाओं से जोरदार स्वागत किया। इस दौरान स्वामी प्रसाद मौर्य ने मीडिया से बातचीत करते हुए भाजपा सरकार, निर्वाचन आयोग, समाजवादी पार्टी के पीडीए और पुलिस कार्रवाई को लेकर जमकर निशाना साधा।
मुख्य चुनाव आयुक्त पर लगाए गंभीर आरोप

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर स्वामी प्रसाद मौर्य ने कहा कि उन्होंने अपनी गरिमा और मान-मर्यादा को ताक पर रखकर भाजपा के एजेंट के रूप में काम किया। उन्होंने एसआईआर, वोट चोरी सहित अन्य मुद्दों को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को सही ठहराया।
मौर्य ने कहा कि जिस निर्वाचन व्यवस्था पर देश की जनता विश्वास करती थी, आज उसी निर्वाचन आयोग से लोगों का विश्वास उठता जा रहा है। उन्होंने कहा कि भाजपा के नेता और मंत्री जिस तरह मुख्य चुनाव आयुक्त के बचाव में बयान दे रहे हैं, उससे सवाल और गंभीर हो जाते हैं। उनके मुताबिक चुनाव प्रक्रिया को लेकर उठ रहे सवालों का निष्पक्ष जवाब मिलना चाहिए।
पीडीए पर अखिलेश यादव को घेरा
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के पीडीए के मुद्दे पर भी स्वामी प्रसाद मौर्य ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि जब नेता खुद ही नहीं जानता कि पीडीए का मतलब क्या है, तो हर बैठक में इसकी परिभाषा बदलती रहती है। उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव को पहले पीडीए की परिभाषा स्पष्ट रूप से समझनी चाहिए और उसके बाद जनता व समाज के बीच पीडीए की बात करनी चाहिए।
पुलिस कार्रवाई को बताया लोकतंत्र की आवाज दबाने का प्रयास
रायबरेली में सपा कार्यकर्ताओं के साथ हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर भी स्वामी प्रसाद मौर्य ने भाजपा सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि कार्यकर्ताओं के साथ हाथापाई और मारपीट की गई। उन्होंने कहा कि विधायक, जिलाध्यक्ष और कार्यकर्ताओं के साथ मारपीट करना किसी भी स्थिति में उचित नहीं है।
उन्होंने विशेष रूप से अमेठी के जिला उपाध्यक्ष महेंद्र सोनकर का जिक्र करते हुए कहा कि कार्यकर्ताओं में सबसे ज्यादा मारपीट का सामना उन्हें करना पड़ा। मौर्य ने कहा कि जनप्रतिनिधियों और राजनीतिक कार्यकर्ताओं के साथ इस तरह की कार्रवाई लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए गंभीर सवाल खड़े करती है।
उन्होंने पुलिस पर निशाना साधते हुए कहा कि यदि पुलिस किसी की आवाज दबाने का काम करती है तो यह लोकतंत्र की हत्या का प्रयास है।
सारस चौराहे पर हुए इस स्वागत कार्यक्रम के दौरान पार्टी पदाधिकारी और दर्जनों कार्यकर्ता मौजूद रहे। स्वामी प्रसाद मौर्य के बयानों के बाद स्थानीय राजनीतिक गलियारों में भी चर्चाओं का दौर तेज हो गया है।










