Bokaro Thermal: तकनीकी व वैज्ञानिक कार्यों में हिंदी के प्रयोग पर बीटीपीएस में राजभाषा कार्यशाला

Bokaro Thermal: दामोदर घाटी निगम (डीवीसी) के बोकारो ताप विद्युत केंद्र (बीटीपीएस), बोकारो थर्मल में मंगलवार को तकनीकी और वैज्ञानिक कार्यों में हिंदी के इस्तेमाल को लेकर राजभाषा कार्यशाला आयोजित की गई। बिरसा मुंडा भवन के सम्मेलन कक्ष में हुई इस कार्यशाला में अधिकारियों और कर्मचारियों को तकनीकी विषयों को हिंदी में सहज एवं प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने के तौर-तरीकों की जानकारी दी गई।

कार्यक्रम की शुरुआत राष्ट्रगीत एवं राष्ट्रगान से हुई। इसके बाद मुख्य महाप्रबंधक एवं परियोजना प्रधान तथा राजभाषा कार्यान्वयन उपसमिति के अध्यक्ष सुशील कुमार अरजरिया, वरिष्ठ महाप्रबंधक (ओ एवं एम) मधुकर श्रीवास्तव, महाप्रबंधक (मा.सं.) अलेक्जेंडर कुजूर, उप महाप्रबंधक (यांत्रिकी) अखिलेंदु सिंह, प्रबंधक (वि) चंचला कुमारी, केंद्रीय विद्यालय की शिक्षिका एवं संकाय सदस्या दिव्या सरोज, शिक्षिका छाया सिन्हा तथा राजभाषा नोडल अधिकारी केरला टुडू ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यशाला का उद्घाटन किया।

मुख्य महाप्रबंधक सुशील कुमार अरजरिया ने कहा कि तकनीकी एवं वैज्ञानिक कार्यों में हिंदी का प्रयोग वर्तमान समय में बेहद प्रासंगिक है। तकनीकी क्षेत्रों में हिंदी के प्रयोग को बढ़ावा देने से कार्यालयीन कार्यों को और अधिक सहज बनाया जा सकता है। वरिष्ठ महाप्रबंधक मधुकर श्रीवास्तव ने भी तकनीकी कार्यों में हिंदी के अधिकाधिक प्रयोग पर जोर दिया।

कार्यशाला में संकाय सदस्या दिव्या सरोज ने तकनीकी एवं वैज्ञानिक क्षेत्रों में हिंदी के प्रयोग, कार्यालयीन कार्यों में इसकी उपयोगिता तथा तकनीकी विषयों को सरल हिंदी में प्रस्तुत करने के विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी। उन्होंने तकनीकी शब्दावली के प्रयोग और वैज्ञानिक विषयों को हिंदी में प्रभावी ढंग से अभिव्यक्त करने के तरीकों पर भी प्रकाश डाला।

सहायक नियंत्रक (यांत्रिकी) दीनानाथ शर्मा ने भारतीय भाषायी परंपरा की ऐतिहासिक यात्रा पर प्रकाश डालते हुए संस्कृत से पाली, प्राकृत, अपभ्रंश और अवहट्ट के माध्यम से हिंदी के वर्तमान स्वरूप तक के विकास की जानकारी दी। उन्होंने 14 सितंबर 1949 को हिंदी को संघ की राजभाषा के रूप में स्वीकार किए जाने तथा संविधान के अनुच्छेद 343 से 351, राजभाषा अधिनियम 1963 और राजभाषा नियम 1976 के प्रमुख प्रावधानों की जानकारी दी। साथ ही बीटीपीएस में राजभाषा के प्रचार-प्रसार और कार्यान्वयन के लिए आयोजित गतिविधियों से भी प्रतिभागियों को अवगत कराया।

प्रश्नोत्तर सत्र में प्रतिभागियों ने तकनीकी एवं वैज्ञानिक कार्यों में हिंदी के प्रयोग से संबंधित सवाल पूछे। दिव्या सरोज और दीनानाथ शर्मा ने प्रतिभागियों के प्रश्नों का उत्तर दिया। इस दौरान शिव मोहन गुप्त, चंद्र भूषण जायसवाल, मनोज कुमार गुप्ता, दीपक कुमार, संजय राय, रवि चक्रवर्ती, केरला टुडू सहित अन्य प्रतिभागियों ने सक्रिय भागीदारी निभाई।

कार्यशाला के सफल आयोजन में सहायक ग्रेड-I (राजभाषा) तारकेश्वर प्रसाद जैसवारा का महत्वपूर्ण योगदान रहा। कार्यक्रम के समापन पर महाप्रबंधक (मा.सं.) की ओर से सभी प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए।

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