Bokaro Thermal: पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने और ग्रामीण क्षेत्रों में हरियाली का विस्तार करने के उद्देश्य से दामोदर घाटी निगम (डीवीसी) के बोकारो ताप विद्युत केंद्र की ओर से कॉरपोरेट सामाजिक दायित्व (सीएसआर) के तहत शिशु पौधा वितरण कार्यक्रम आयोजित किया गया। सामाजिक वानिकी के अंतर्गत आयोजित इस कार्यक्रम में कंजकिरो पंचायत के लिए पौधे वितरित किए गए। इस पहल का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में पौधरोपण को प्रोत्साहित करना, पर्यावरण के प्रति लोगों को जागरूक करना तथा आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ और स्वस्थ वातावरण तैयार करना है।
कार्यक्रम के दौरान डीवीसी बोकारो थर्मल सीएसआर विभाग के वरीय अधिकारी मनीष कुमार चौधरी ने पौधों के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि पर्यावरण का संतुलन बनाए रखने में पेड़-पौधों की अहम भूमिका है। आज के समय में बढ़ते प्रदूषण, तापमान में वृद्धि और घटते हरित क्षेत्र को देखते हुए पौधरोपण बेहद जरूरी हो गया है। ऐसे में केवल पौधे लगाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनकी नियमित देखभाल करना और उन्हें पेड़ बनने तक सुरक्षित रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

ग्रामीण क्षेत्रों में हरियाली बढ़ाने की पहल
डीवीसी की ओर से सामाजिक दायित्व के तहत किए जा रहे इस तरह के प्रयास ग्रामीण क्षेत्रों में पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। कंजकिरो पंचायत को शिशु पौधे उपलब्ध कराकर स्थानीय स्तर पर पौधरोपण को बढ़ावा देने की पहल की गई है। इन पौधों को उचित स्थानों पर लगाकर उनकी देखभाल की जाए, तो भविष्य में पंचायत क्षेत्र में हरियाली बढ़ाने के साथ-साथ प्राकृतिक वातावरण को बेहतर बनाने में भी मदद मिलेगी।
पेड़-पौधे न केवल वायु को शुद्ध करने और वातावरण को ठंडा रखने में सहायक होते हैं, साथ ही मिट्टी के कटाव को रोकने, जैव विविधता को बनाए रखने और जीव-जंतुओं को आश्रय प्रदान करने में भी अहम योगदान देते हैं। यही कारण है कि वर्तमान समय में पौधरोपण को पर्यावरण संरक्षण के सबसे प्रभावी उपायों में शामिल किया जाता है।
पौधों की देखभाल भी जरूरी
पौधा वितरण कार्यक्रम का महत्व तभी सार्थक होगा, जब वितरित पौधों को जमीन पर लगाकर उनकी नियमित देखभाल की जाएगी। पौधों को पर्याप्त पानी देना, पशुओं से सुरक्षित रखना और समय-समय पर उनकी स्थिति की निगरानी करना जरूरी है। स्थानीय ग्रामीणों और पंचायत प्रतिनिधियों की सहभागिता से इस अभियान को और प्रभावी बनाया जा सकता है।
डीवीसी की यह पहल सामाजिक जिम्मेदारी के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण के प्रति संस्थागत प्रतिबद्धता को भी दर्शाती है। इस तरह के कार्यक्रमों से लोगों को प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारी समझने और अपने आसपास बेहतर पर्यावरण विकसित करने की प्रेरणा मिलती है।










