Ajay Chautala Controversial Statement: हरियाणा (Hariyana) की सियासत में एक बार फिर हलचल मच गई है। जननायक जनता पार्टी (JJP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अजय सिंह चौटाला ने महेंद्रगढ़ में एक रैली को संबोधित करते हुए ऐसा बयान दिया जो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है और विवाद का कारण बन गया है। उन्होंने कहा कि पड़ोसी देशों नेपाल, श्रीलंका और बांग्लादेश में युवाओं ने जो किया, वैसा ही भारत में भी करने की जरूरत है। वहां की सरकारों को तख्तापलट किया गया, शासकों को कुर्सी से घसीटकर उतारा गया। अजय चौटाला ने युवाओं से अपील की कि वे तैयार रहें, संगठित हों और मौका आने पर शासकों को गद्दी से खींचकर सड़कों पर दौड़ाकर पीटें। उनका कहना था कि कुशासन से मुक्ति पाने का यही रास्ता है।
यह बयान 1 जनवरी 2026 को महेंद्रगढ़ की रैली में दिया गया। वीडियो क्लिप तेजी से फैल रही है और लोग इसे भड़काऊ भाषण बता रहे हैं। अजय चौटाला ने मंच से कहा, “नौजवानों, तैयार रहो। जैसे नेपाल, श्रीलंका और बांग्लादेश में युवाओं ने सरकारें बदल दीं, वैसे ही यहां भी करना पड़ेगा। शासकों को कुर्सी से घसीटकर उतारना होगा, सड़कों पर दौड़ाकर पीटना होगा।”

क्यों दिया ऐसा बयान/Ajay Chautala Controversial Statement
अजय चौटाला का यह बयान हरियाणा और केंद्र की भाजपा सरकार पर हमला है। जेजेपी पहले भाजपा की सहयोगी रही, लेकिन 2024 के विधानसभा चुनावों में अलग लड़ने के बाद पार्टी का प्रदर्शन खराब रहा। जेजेपी को एक भी सीट नहीं मिली। अजय चौटाला और उनके बेटे दुष्यंत चौटाला किसान आंदोलन के दौरान भाजपा से अलग हो गए थे। अब वे बेरोजगारी, महंगाई, किसानों की समस्याओं और कथित कुशासन का मुद्दा उठा रहे हैं। उनका कहना है कि आम जनता त्रस्त है और सत्ता परिवर्तन की जरूरत है।
पड़ोसी देशों का उदाहरण देते हुए उन्होंने युवाओं को जगाने की कोशिश की। बांग्लादेश में 2024 में छात्र आंदोलन से शेख हसीना की सरकार गिर गई। श्रीलंका में 2022 में आर्थिक संकट से प्रदर्शन हुए और राष्ट्रपति भाग गए। नेपाल में भी युवा आंदोलन हुए हैं। अजय चौटाला इन घटनाओं को मिसाल बनाकर कह रहे हैं कि भारत में भी ऐसा ही जनआंदोलन चाहिए।
जाने विवाद क्यों मचा
यह बयान विवादित इसलिए है क्योंकि इसमें हिंसा की बात की गई है। “दौड़ाकर पीटना” और “घसीटकर उतारना” जैसे शब्द लोकतंत्र में उकसावे जैसे लगते हैं। विपक्षी दल और भाजपा समर्थक इसे भड़काऊ बता रहे हैं। सोशल मीडिया पर लोग कह रहे हैं कि ऐसे बयान देने वाले खुद सड़क पर पीटे जाएंगे। कुछ लोग इसे लोकतंत्र के खिलाफ बता रहे हैं।
दूसरी तरफ, जेजेपी समर्थक कहते हैं कि यह गुस्से की अभिव्यक्ति है। सरकार की नीतियों से लोग परेशान हैं, इसलिए ऐसे शब्द निकल गए। लेकिन कानूनी रूप से ऐसे बयान पर कार्रवाई हो सकती है, क्योंकि यह हिंसा को बढ़ावा देने जैसे लगते हैं।
चौटाला परिवार की सियासत
अजय चौटाला चौधरी देवीलाल के पोते और पूर्व मुख्यमंत्री ओम प्रकाश चौटाला के बड़े बेटे हैं। परिवार में फूट के बाद 2018 में जेजेपी बनी। छोटे भाई अभय चौटाला इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलो) चला रहे हैं। हाल ही में अभय चौटाला ने भी इसी तरह का बयान दिया था, जिसमें उन्होंने बांग्लादेश-नेपाल जैसे आंदोलन की बात की। अब अजय चौटाला का बयान आने से परिवार की पुरानी रंजिश फिर चर्चा में है।
जेजेपी अब विपक्ष में है और 2029 के चुनावों की तैयारी कर रही है। अजय चौटाला युवाओं और किसानों को जोड़ने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन ऐसे बयान से पार्टी की छवि खराब हो सकती है।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं
भाजपा नेताओं ने इसे गैरजिम्मेदाराना बताया। उनका कहना है कि लोकतंत्र में बदलाव वोट से होता है, हिंसा से नहीं। कांग्रेस ने भी मौन साधा है, लेकिन कुछ नेता इसे सियासी स्टंट बता रहे हैं। हरियाणा में सियासी माहौल गर्म है। किसान, बेरोजगार युवा और आम लोग महंगाई से परेशान हैं। ऐसे में ऐसे बयान आग में घी डालने जैसे हैं।
निष्कर्ष
यह बयान जेजेपी को युवाओं में लोकप्रिय बना सकता है या विवाद में फंसा सकता है। पुलिस या चुनाव आयोग कार्रवाई कर सकता है। लेकिन साफ है कि हरियाणा की सियासत में चौटाला परिवार फिर सुर्खियों में है। लोग पूछ रहे हैं कि क्या भारत में सच में ऐसे आंदोलन की जरूरत है या यह सिर्फ सियासी बयानबाजी है










