Alankar Agnihotri Resignation: उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में एक बड़ा घटनाक्रम हुआ है। बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट और 2019 बैच के पीसीएस अधिकारी अलंकार अग्निहोत्री ने 26 जनवरी 2026 को गणतंत्र दिवस के दिन अपने पद से इस्तीफा दे दिया। यह इस्तीफा यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) के नए रेगुलेशन्स 2026 के विरोध में और प्रयागराज के माघ मेले में ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के ब्राह्मण बटुक शिष्यों पर कथित हमले के खिलाफ दिया गया है। अलंकार अग्निहोत्री ने सरकार पर ‘ब्राह्मण विरोधी’ नीतियां चलाने का आरोप लगाया है और UGC के नियमों को ‘काला कानून’ बताया है। इस घटना ने प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में खलबली मचा दी है।
अलंकार अग्निहोत्री कौन हैं?/Alankar Agnihotri Resignation
अलंकार अग्निहोत्री 2019 बैच के उत्तर प्रदेश प्रांतीय सिविल सेवा (PCS) अधिकारी हैं। वे कानपुर के मूल निवासी हैं और आईआईटी-बीएचयू से बीटेक तथा एलएलबी की डिग्री हासिल की है। वर्तमान में वे बरेली में सिटी मजिस्ट्रेट के पद पर तैनात थे। इस्तीफे के बाद उन्होंने सोशल मीडिया पर अपना इस्तीफा पत्र शेयर किया, जिसमें उन्होंने स्पष्ट लिखा कि वे UGC रेगुलेशन्स 2026 और माघ मेले की घटना से आहत हैं। उन्होंने कहा कि ब्राह्मण समुदाय का अपमान सहन नहीं किया जा सकता और सरकार की नीतियां समाज को बांट रही हैं।

UGC रेगुलेशन्स 2026: क्या है विवाद?
UGC ने 13 जनवरी 2026 को ‘प्रमोशन ऑफ इक्विटी इन हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशंस रेगुलेशन्स 2026’ जारी किए। इन नियमों का मकसद विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में जाति आधारित भेदभाव रोकना है। हर संस्थान में इक्विटी कमिटी, हेल्पलाइन और मॉनिटरिंग टीम बनानी अनिवार्य है। SC, ST, OBC जैसे वर्गों की शिकायतों पर 24 घंटे में एक्शन लेना होगा। UGC संस्थानों पर सख्त कार्रवाई कर सकता है, जैसे फंड रोकना या मान्यता रद्द करना।
लेकिन जनरल कैटेगरी के छात्रों और संगठनों का कहना है कि ये नियम जनरल कैटेगरी के खिलाफ भेदभाव बढ़ाते हैं। झूठी शिकायतों पर कोई सजा नहीं है, कमिटी में जनरल कैटेगरी का प्रतिनिधित्व नहीं है और नियम मेरिट को नुकसान पहुंचा सकते हैं। देशभर में विरोध हो रहा है, हैशटैग जैसे #UGC_Rollback ट्रेंड कर रहे हैं। अलंकार अग्निहोत्री ने इसे ‘ब्राह्मणों पर अत्याचार बढ़ाने वाला कानून’ बताया और तुरंत वापस लेने की मांग की।
माघ मेले में शंकराचार्य विवाद: क्या हुआ था?
प्रयागराज के माघ मेले में मौनी अमावस्या (जनवरी 2026) के दिन शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती अपने शिष्यों के साथ संगम स्नान के लिए पालकी में जा रहे थे। प्रशासन ने भीड़ नियंत्रण और ‘नो व्हीकल जोन’ के नाम पर उन्हें रोका। इससे उनके समर्थकों और पुलिस में झड़प हुई। शंकराचार्य ने आरोप लगाया कि पुलिस ने उनके 12-15 शिष्यों को पीटा, ब्राह्मण बटुकों की शिखा (चोटी) पकड़कर घसीटा और अपमान किया। उन्होंने इसे सनातन धर्म और ब्राह्मण समुदाय पर हमला बताया।
शंकराचार्य ने धरना दिया और प्रशासन पर साजिश का आरोप लगाया। मेला प्रशासन ने उन्हें नोटिस भेजा कि ‘शंकराचार्य’ टाइटल का इस्तेमाल क्यों कर रहे हैं, क्योंकि मामला सुप्रीम कोर्ट में है। पुलिस ने आरोपों को खारिज किया और कहा कि कोई मारपीट नहीं हुई। इस घटना ने हिंदू संगठनों में आक्रोश पैदा किया। अलंकार अग्निहोत्री ने इसे ब्राह्मणों का अपमान बताकर इस्तीफे का एक मुख्य कारण बनाया।
इस्तीफा देने के दौरान क्या हुआ?
अलंकार अग्निहोत्री ने इस्तीफा पत्र ईमेल से राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और बरेली डीएम को भेजा। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्टर शेयर किया, जिसमें लिखा था “#UGC rollback, काला कानून वापस लो” और “शंकराचार्य का अपमान नहीं सहेगा हिंदुस्तान”। इस्तीफा देने के बाद उन्होंने आरोप लगाया कि डीएम आवास पर उन्हें 45 मिनट से 2 घंटे तक बंधक बनाया गया, पुलिस की मौजूदगी में दबाव डाला गया और अभद्र भाषा का इस्तेमाल हुआ। अंत में इस्तीफा स्वीकार किया गया।
सरकार ने तुरंत एक्शन लिया और अलंकार अग्निहोत्री को अनुशासनहीनता के आरोप में सस्पेंड कर दिया। उन्हें शामली डीएम ऑफिस से जुड़ा गया और जांच शुरू हो गई।
प्रतिक्रियाएं और राजनीतिक असर
इस इस्तीफे पर सोशल मीडिया पर हंगामा मचा। कई लोगों ने इसे ‘साहसी कदम’ कहा, जबकि कुछ ने कहा कि अधिकारी को सेवा में रहकर विरोध करना चाहिए था। कांग्रेस ने सरकार पर हमला बोला और कहा कि संविधान, विश्वास और अभिव्यक्ति की आजादी खतरे में है। ब्राह्मण नेता और संगठन एकजुट हो रहे हैं। अलंकार अग्निहोत्री ने ब्राह्मण सांसदों-विधायकों से इस्तीफा देने और वैकल्पिक राजनीति बनाने की अपील की।
यह घटना UGC नियमों के विरोध को नई ऊर्जा दे रही है। छात्रों के प्रदर्शन बढ़ सकते हैं और राजनीतिक दलों को सफाई देनी पड़ सकती है। UGC नियमों में बदलाव की मांग तेज हो गई है।
निष्कर्ष
अभी इस्तीफा स्वीकार होने की प्रक्रिया चल रही है। जांच पूरी होने के बाद सजा तय होगी। यह मामला ब्राह्मण समुदाय, जनरल कैटेगरी और धार्मिक भावनाओं से जुड़ा है, इसलिए राजनीतिक असर बड़ा हो सकता है। UGC नियमों पर सुप्रीम कोर्ट में PIL भी दाखिल हो चुकी है। समय बताएगा कि यह हलचल कहां तक पहुंचती है, लेकिन फिलहाल उत्तर प्रदेश में बहस छिड़ी हुई है।










