Bahraich: मिहींपुरवा (मोतीपुर) तहसील क्षेत्र के वन ग्रामों और वन टांगिया बस्तियों के निवासियों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर जिलाधिकारी को ईमेल के माध्यम से ज्ञापन भेजा है। ग्रामीणों ने दिसंबर 2024 में जमा किए गए व्यक्तिगत एवं सामुदायिक वन अधिकारों के दावों का शीघ्र परीक्षण और निस्तारण कराने के साथ ही शेष वन बस्तियों को राजस्व ग्राम घोषित करने का प्रस्ताव शासन को भेजने की मांग की है।
वन अधिकार आंदोलन के मुख्य कार्यकर्ता जंग हिंदुस्तानी ने बताया कि प्रशासन के प्रयासों से क्षेत्र के 19 में से छह वन बस्ती ग्रामों को पहले ही राजस्व ग्राम का दर्जा मिल चुका है। अब 13 वन टांगिया गांवों को राजस्व ग्राम घोषित किया जाना बाकी है। ग्रामीणों का कहना है कि राजस्व ग्राम का दर्जा नहीं मिलने के कारण इन बस्तियों में सड़क, बिजली, पेयजल, आवास, विद्यालय और स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाओं का अपेक्षित विकास नहीं हो पा रहा है।

ज्ञापन में कहा गया है कि ‘अनुसूचित जनजाति और अन्य पारंपरिक वन निवासी (वन अधिकारों की मान्यता) अधिनियम, 2006’ के तहत ग्रामीणों ने अपने दावे तहसील एवं उपखंड स्तरीय समितियों के समक्ष प्रस्तुत किए थे। लंबे समय से इनका अंतिम परीक्षण और सत्यापन लंबित है।
आंदोलन के अध्यक्ष शंकर सिंह ने कहा कि वनवासी शांतिपूर्ण और गांधीवादी तरीके से अपनी मांग शासन-प्रशासन के समक्ष रखते रहेंगे। चहलवा ग्राम पंचायत के पंचायत प्रतिनिधि प्रीतम निषाद ने शेष सभी वनबस्ती और टांगिया गांवों को राजस्व ग्राम में परिवर्तित करने की प्रक्रिया पूरी कर शासन को प्राथमिकता के आधार पर प्रस्ताव भेजने की मांग की।
बैठक में मिहींपुरवा तहसील क्षेत्र के 19 वनबस्ती ग्रामों के निवासी मौजूद रहे।










