Belly Button Lint Causes: आपने देखा होगा कि कई बार नहाने के बाद भी हमारी नाभि में सफेद या भूरे रंग की छोटी-छोटी रुई जैसी चीज जमा हो जाती है। सुबह उठते ही देखते हैं कि नाभि में कुछ फंसा हुआ है, और मन में सवाल आता है – ये आती कहाँ से है? क्या ये कोई बीमारी का संकेत है? या सिर्फ गंदगी? लोग अक्सर सोचते हैं कि शायद बनियान या कपड़े की वजह से, लेकिन असल में ये एकदम सामान्य बात है। इसे मेडिकल भाषा में नैवल फ्लफ या बेली बटन लिंट कहते हैं। वैज्ञानिक और एक्सपर्ट्स ने इस पर काफी रिसर्च की है, और पता चला है कि ये ज्यादातर पुरुषों में ज्यादा होती है, खासकर मिडिल एज वाले बालों वाले लोगों में।
आइए सरल भाषा में समझते हैं कि नाभि में रुई क्यों आती है और इसके मुख्य 3 बड़े कारण क्या हैं।

कारण 1: कपड़ों के रेशे और शरीर के बालों का खेल/Belly Button Lint Causes
सबसे बड़ा और सबसे कॉमन कारण कपड़ों से निकलने वाले छोटे-छोटे रेशे हैं। जब हम टी-शर्ट, बनियान, कुर्ता या कोई भी कपड़ा पहनते हैं, खासकर कॉटन वाला, तो रोजमर्रा की हलचल, चलना-फिरना, सोना या काम करना – इन सबमें कपड़े रगड़ खाते हैं। इससे बहुत बारीक फाइबर्स (रेशे) टूटकर अलग हो जाते हैं।
अब ये रेशे कहाँ जाते हैं? नाभि के आसपास पेट पर जो बारीक बाल होते हैं, वो इन रेशों को पकड़ लेते हैं। ये बाल स्केली (छोटे-छोटे कांटे जैसे) होते हैं, जो रेशों को एक तरफ खींचते हैं – ठीक नाभि की तरफ। जैसे ड्रेन में पानी घूमकर अंदर जाता है, वैसे ही बाल रेशों को नाभि में ले जाते हैं। वहाँ ये जमा होकर छोटी रुई का गोला बन जाते हैं।
एक ऑस्ट्रियन साइंटिस्ट जॉर्ज स्टीनहाउजर ने 4 साल तक इस पर स्टडी की और पाया कि पेट के बाल ही मुख्य वजह हैं। बाल जितने ज्यादा, रुई उतनी ज्यादा। अगर बाल शेव कर लें, तो रुई लगभग बंद हो जाती है। पुराने कपड़े कम रेशे छोड़ते हैं, नए टी-शर्ट ज्यादा। महिलाओं में कम बाल होने से ये समस्या कम होती है।
कारण 2: मृत त्वचा कोशिकाएं और पसीना-गंदगी का मिश्रण
हमारी त्वचा हर रोज थोड़ी-थोड़ी मरती है और नई आती है। ये मृत कोशिकाएं (डेड स्किन सेल्स) भी रेशों के साथ मिलकर नाभि में जमा हो जाती हैं। साथ ही पसीना, धूल, बॉडी ऑयल और कभी-कभी साबुन का बचा हुआ हिस्सा भी मिल जाता है। नाभि एक गड्ढा जैसी जगह है, जहाँ ये सब आसानी से फंस जाता है और सूखकर रुई जैसा बन जाता है।
रिसर्च में पाया गया कि नाभि में 70 तरह के बैक्टीरिया रहते हैं, लेकिन ज्यादातर हानिरहित। अगर सफाई अच्छी हो तो कोई समस्या नहीं। लेकिन अगर रुई ज्यादा जमा हो और बदबू आए, तो ये गंदगी या हल्का इंफेक्शन का संकेत हो सकता है।
कारण 3: आयुर्वेदिक नजरिया – एनर्जी और नाड़ियों का केंद्र
आयुर्वेद में नाभि को बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। एक्सपर्ट्स जैसे मनीष आचार्य कहते हैं कि नाभि शरीर का केंद्र है, जहाँ सारी नाड़ियां (नर्व्स) जुड़ी होती हैं। ये एनर्जी लेने और देने का काम करती है। इसलिए आयुर्वेद में नाभि में तेल डालने (नैवल ऑइलिंग) की सलाह दी जाती है, जैसे तिल का तेल, नारियल तेल या सर्दियों में सरसों का तेल।
कुछ लोग मानते हैं कि रुई जमना एनर्जी अब्जॉर्ब करने का संकेत है, लेकिन वैज्ञानिक रूप से ये कपड़े और बालों की वजह से ही है। आयुर्वेद कहता है कि नाभि साफ रखें, तेल लगाएं तो शरीर की एनर्जी बैलेंस रहती है और ऐसी छोटी-मोटी समस्याएं कम होती हैं।
क्या ये कोई बीमारी है? कब चिंता करें?
नहीं, नाभि में रुई आना बिल्कुल नॉर्मल है। इससे कोई नुकसान नहीं होता। बल्कि कुछ रिसर्च कहती हैं कि ये नाभि को क्लीन रखने में मदद करती है, जैसे फिल्टर की तरह। लेकिन अगर –
- तेज बदबू आए
- लालिमा, सूजन या दर्द हो
- पीला/हरा डिस्चार्ज निकले
- खुजली या इरिटेशन हो
तो ये इंफेक्शन (ओम्बिलिकल इंफेक्शन) हो सकता है। ऐसे में डॉक्टर से दिखाएं।
इसे कैसे रोकें या साफ करें?
- रोज नहाते वक्त उंगली या कॉटन बड से नाभि साफ करें।
- ज्यादा बाल हों तो ट्रिम करें।
- टाइट कपड़े कम पहनें, ढीले-ढाले कपड़े चुनें।
- आयुर्वेदिक तरीके से हफ्ते में 2-3 बार तेल डालें।
- ज्यादा गहराई में मत जाएं, वरना स्क्रैच हो सकता है।










