Chandausi GST Waiver Scheme: उत्तर प्रदेश में छोटे-बड़े व्यापारियों की कई पुरानी परेशानियां अब कम होने वाली हैं। मंगलवार को जवाहर रोड स्थित धन्वंतरी फार्मेसी में व्यापारी-अधिकारी संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम अखिल भारतीय उद्योग व्यापार मंडल की ओर से हुआ, जिसमें जीएसटी विभाग के अधिकारी आए और व्यापारियों को जीएसटी के नए सुधारों की पूरी जानकारी दी। मुख्य रूप से डिप्टी कमिश्नर बब्बू यादव और धर्मेंद्र कुमार ने व्यापारियों से बात की और उनकी समस्याओं का समाधान बताया।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में व्यापारी मौजूद थे। जिला अध्यक्ष प्रेम ग्रोवर, प्रदेश उपाध्यक्ष शाह आलम मंसूरी, उमेश वार्ष्णेय, रमेश ग्रेवाल, सागर गुप्ता, राघवेंद्र मिश्रा, विजेंद्र मिश्रा, राजुल मिश्रा, विकास मिश्रा, सुशील वार्ष्णेय, अंकित गुप्ता, चिंटू शर्मा जैसे कई प्रमुख लोग शामिल हुए। सबने अपनी व्यापारिक दिक्कतें रखीं और अधिकारियों से सीधे जवाब पाया।

जीएसटी में ब्याज और पेनल्टी माफी की स्कीम, पुराने सालों के लिए राहत/Chandausi GST Waiver Scheme
डिप्टी कमिश्नर बब्बू यादव ने सबसे पहले जीएसटी में आए बड़े बदलावों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि साल 2017-18, 2018-19 और 2019-20 के लिए एक खास स्कीम लागू की गई है, जिसे SPL-02 वाइबर स्कीम कहा जाता है। इस स्कीम के तहत ब्याज और पेनल्टी पूरी तरह माफ हो सकती है। यह स्कीम अभी भी चल रही है और व्यापारी इसका फायदा उठा सकते हैं।
अगर किसी व्यापारी का केस कोर्ट में धारा 74 के बजाय धारा 73 में बदल दिया जाता है, तो वे कभी भी SPL-02 फॉर्म भरकर ब्याज और पेनल्टी से छूट पा सकते हैं। यह स्कीम उन व्यापारियों के लिए बहुत बड़ी राहत है, जिनके पुराने जीएसटी केस लंबे समय से अटके हुए थे। ब्याज और पेनल्टी कभी-कभी टैक्स से ज्यादा हो जाती है, जिससे व्यापारी परेशान रहते हैं। अब इस स्कीम से वो बोझ कम हो जाएगा।
छोटे मामलों में अब शो-कॉज नोटिस नहीं, समय सीमा बढ़ी
बब्बू यादव ने और भी अच्छी खबरें बताईं। उन्होंने कहा कि अब ₹1000 से कम के मामलों में शो-कॉज नोटिस (SCN) जारी नहीं किया जाएगा। यानी छोटी-मोटी गलतियों पर अब नोटिस का डर नहीं रहेगा।
इसके अलावा धारा 73 और 74 से जुड़े मामलों में पेनल्टी चुकाने या जवाब देने की समय-सीमा 30 दिन से बढ़ाकर 60 दिन कर दी गई है। पहले 30 दिन में सब कुछ करना पड़ता था, जिससे व्यापारी घबराते थे। अब 60 दिन मिलेंगे, तो वे अच्छे से तैयारी कर पाएंगे और सही जवाब दे पाएंगे। ये बदलाव व्यापारियों को ज्यादा समय और आसानी देते हैं।
मेंथा और कई जरूरी चीजों पर टैक्स कम, आम आदमी को फायदा
अधिकारी ने बताया कि पहले मेंथा (पुदीना) समेत कई चीजों पर टैक्स की दरें ज्यादा थीं। सरकार ने जनता के हित में इनकी जीएसटी दरें घटा दी हैं। पहले ये 12%, 18% या 28% तक थीं, अब इन्हें कम करके उपभोक्ताओं को राहत दी गई है।
इससे आम लोगों की क्रय शक्ति बढ़ेगी। मतलब सामान सस्ता होने से ज्यादा खरीदारी होगी, बाजार में मांग बढ़ेगी और उद्योग भी आगे बढ़ेंगे। इससे देश की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी और सरकार का राजस्व भी बढ़ेगा। ये बदलाव व्यापारियों के साथ-साथ हर आम आदमी के लिए फायदेमंद हैं।
व्यापारियों ने रखीं सामने अपनी परेशानियां, मिला समाधान
कार्यक्रम के दौरान व्यापारियों ने अपनी कई समस्याएं रखीं। कुछ ने पुराने नोटिस, जांच, या टैक्स कैलकुलेशन की दिक्कत बताई। जीएसटी अधिकारियों ने सबकी बात सुनी और मौके पर ही समाधान बताया। कई मामलों में तुरंत सलाह दी गई कि कैसे फॉर्म भरें, क्या दस्तावेज लगाएं और स्कीम का फायदा कैसे उठाएं।
यह संवाद कार्यक्रम इसलिए खास था क्योंकि व्यापारी और अधिकारी आमने-सामने बैठे और बात की। पहले अक्सर व्यापारी विभाग के चक्कर काटते रहते थे, लेकिन ऐसे प्रोग्राम से सीधी बातचीत होती है और समस्याएं जल्दी सुलझती हैं।
व्यापार मंडल की सराहना, उम्मीदें बढ़ीं
अखिल भारतीय उद्योग व्यापार मंडल के पदाधिकारियों ने इस कार्यक्रम की बहुत तारीफ की। उन्होंने कहा कि ऐसे संवाद से व्यापार सुगम होता है, भ्रष्टाचार कम होता है और व्यापारी बिना डर के काम कर पाते हैं। शाह आलम मंसूरी और प्रेम ग्रोवर जैसे नेताओं ने कहा कि सरकार की ये स्कीम और बदलाव व्यापारियों के लिए वरदान हैं।










