Charan Pahadi Dham Ramgarh: झारखंड के रामगढ़ जिले में कुजू के पास स्थित चरण पहाड़ी धाम एक ऐसा पवित्र स्थल है, जहां भक्ति और आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिलता है। यहां की प्राकृतिक सुंदरता, पहाड़ी नदी का किनारा और पौराणिक महत्व इसे देश भर के श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र बनाता है। यह धाम श्री चैतन्य महाप्रभु की लीला से जुड़ा हुआ है। लगभग 500-533 साल पहले महाप्रभु जब बंगाल से वृंदावन की यात्रा पर निकले थे, तो इस जंगल से गुजरते समय उन्होंने हरि नाम संकीर्तन किया। उनकी भक्ति से इतना प्रभाव पड़ा कि चट्टानें पिघल गईं और उनके चरण चिन्ह (पद चिन्ह) यहां अंकित हो गए। आज भी ये पद चिन्ह चट्टानों पर स्पष्ट दिखाई देते हैं।
कहा जाता है कि महाप्रभु ने यहां वन्य जीवों—बाघ, हिरण, मोर, हाथी आदि—के साथ नृत्य और कीर्तन किया था। उन जीवों के पद चिन्ह भी चट्टानों पर मौजूद हैं। यह जगह झारखंड लीला के नाम से प्रसिद्ध है, जहां भगवान ने जंगली जानवरों को भी भक्ति रस में डुबो दिया था।

बसंत पंचमी पर 64 महंत भोग आराधना महोत्सव/Charan Pahadi Dham Ramgarh
चरण पहाड़ी धाम में हर साल बसंत पंचमी के मौके पर एक भव्य पांच दिवसीय महोत्सव मनाया जाता है, जिसे चैतन्य महाप्रभु श्रीकृष्ण की 64 महंत भोग आराधना महोत्सव कहा जाता है। इस उत्सव में देश भर से साधु-संत, महंत और लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं। महोत्सव में भजन-कीर्तन, आरती और विशेष पूजा होती है। मंदिर में चैतन्य महाप्रभु की प्रतिमा और उनके पद चिन्हों के दर्शन से भक्तों का मन शांत हो जाता है।
इस महोत्सव की सबसे खास बात है उसका अनोखा अंदाज। बसंत पंचमी की पूर्व रात्रि में यहां दिवाली मनाई जाती है—पूरे धाम को दीयों, पटाखों और रोशनी से सजाया जाता है। फिर अगले दिन ब्रज की तर्ज पर होली खेली जाती है। रंगों की होली, भजन और नाच-गाने से पूरा माहौल भक्ति रस से भर जाता है। रात में दिवाली की चमक और दिन में होली का रंग—यह संयोजन इतना मनमोहक है कि देखने वाले मंत्रमुग्ध हो जाते हैं।
भक्ति रस में डूबते हैं श्रद्धालु, जनसैलाब उमड़ता है
उत्सव के इन पांच दिनों में धाम में भजन-कीर्तन का सिलसिला चलता रहता है। देश के कोने-कोने से आए लोग यहां प्रभु के भक्तिरस में ऐसे डूब जाते हैं कि समय का पता ही नहीं चलता। साधु-संत महंतों की मौजूदगी से जगह और पवित्र हो जाती है। श्रद्धालुओं की भीड़ इतनी होती है कि पूरा पहाड़ी इलाका गुंजायमान हो उठता है।
यहां पहुंचने वाले भक्त महाप्रभु के चरण चिन्हों को देखकर भाव-विभोर हो जाते हैं। कई लोग कहते हैं कि यहां आकर मन को शांति मिलती है और भक्ति का नया जोश आता है। धाम प्राकृतिक छटाओं से घिरा है—पहाड़, नदी और जंगल की हरियाली इसे और खूबसूरत बनाती है।
प्रमुख व्यक्तियों के विचार
- केशव दास महराज (वृन्दावन पीठाधीश्वर महंत): उन्होंने इस धाम को भक्ति का महत्वपूर्ण केंद्र बताया और कहा कि महाप्रभु की लीला यहां आज भी जीवंत है।
- एन चौधरी (डीआईजी कानपुर): कानून-व्यवस्था के नजरिए से भी यहां की भीड़ को संभालना चुनौतीपूर्ण होता है, लेकिन भक्ति का माहौल इतना शांतिपूर्ण रहता है कि कोई समस्या नहीं आती।
- प्रेमदास महराज (चरण पहाड़ी धाम के पुजारी): उन्होंने बताया कि यह पवित्र स्थल महाप्रभु की याद दिलाता है। यहां वन्य जीवों के साथ उनका नृत्य आज भी चट्टानों पर अंकित है।
धाम का महत्व और पहुंच
चरण पहाड़ी धाम रामगढ़ जिले के कुजू में एनएच-33 से करीब 2 किलोमीटर दूर पहाड़ों पर स्थित है। रांची से लगभग 40-50 किमी दूर होने के कारण आसानी से पहुंचा जा सकता है। यह न सिर्फ धार्मिक स्थल है, बल्कि पर्यटन के नजरिए से भी महत्वपूर्ण है। यहां आने वाले श्रद्धालु प्रकृति और भक्ति दोनों का आनंद लेते हैं।










