Shibu Soren Padma Bhushan: दिशोम गुरु शिबू सोरेन को मरणोपरांत पद्म भूषण सम्मान, फागु बेसरा ने किया राष्ट्रपति के प्रति आभार व्यक्त

Shibu Soren Padma Bhushan: केंद्र सरकार की बड़ी घोषणा से झारखंड में जश्न का माहौल

Shibu Soren Padma Bhushan: 25 जनवरी 2026 को गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर केंद्र सरकार ने साल 2026 के लिए पद्म पुरस्कारों की लंबे समय से प्रतीक्षित सूची जारी कर दी है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कुल 131 पद्म पुरस्कार देने की मंजूरी दी है। इनमें 5 पद्म विभूषण, 13 पद्म भूषण और 113 पद्म श्री शामिल हैं। इस सूची में झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) के संस्थापक दिवंगत शिबू सोरेन का नाम प्रमुखता से शामिल है। उन्हें लोक कल्याण और सार्वजनिक मामलों (पब्लिक अफेयर्स) के क्षेत्र में उनके अतुलनीय योगदान के लिए मरणोपरांत पद्म भूषण से सम्मानित किया जा रहा है।

यह खबर पूरे झारखंड में खुशी की लहर लेकर आई है। आदिवासी समाज के लिए शिबू सोरेन को ‘दिशोम गुरु’ के नाम से जाना जाता है। उन्होंने अपनी पूरी जिंदगी आदिवासियों के अधिकारों, उनकी जमीन-जंगल और संस्कृति की रक्षा के लिए संघर्ष किया। अलग झारखंड राज्य की मांग को उन्होंने जन-आंदोलन का रूप दिया, जिसके नतीजे में 2000 में झारखंड अलग राज्य बना।

फागू बेसरा ने राष्ट्रपति का जताया आभार/Shibu Soren Padma Bhushan

झारखंड मुक्ति मोर्चा के केंद्रीय महासचिव और दर्जा प्राप्त मंत्री फागू बेसरा ने इस सम्मान पर तुरंत प्रतिक्रिया देते हुए राष्ट्रपति महोदय का दिल से आभार व्यक्त किया है। उन्होंने कहा यह सम्मान पूरे झारखंड के आदिवासी समाज की जीत है,फागू बेसरा ने कहा,

दिशोम गुरु शिबू सोरेन ने लोक कल्याण के क्षेत्र में जो काम किया, वह अतुलनीय है। उन्होंने आदिवासियों को एकजुट किया, उनके हकों के लिए लड़ाई लड़ी और अलग राज्य की मांग को सफल बनाया। केंद्र सरकार ने उनके योगदान को सही मायने में सम्मान दिया है।”

उन्होंने आगे कहा कि शिबू सोरेन जी झारखंड मुक्ति मोर्चा के संस्थापक और लंबे समय तक अध्यक्ष रहे। उनकी अगुवाई में पार्टी ने राज्य के विकास और आदिवासी उत्थान के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए। उनका निधन 4 अगस्त 2025 को हुआ था, लेकिन उनकी विरासत आज भी जीवित है।

भारत रत्न की मांग भी दोहराई

फागू बेसरा ने इस मौके पर एक बड़ी मांग भी उठाई। उन्होंने केंद्र सरकार से अपील की कि शिबू सोरेन जी के अतुल योगदान को देखते हुए उन्हें भारत रत्न से सम्मानित किया जाए। उन्होंने याद दिलाया कि झारखंड विधानसभा पहले ही एक प्रस्ताव पारित कर चुकी है, जिसमें शिबू सोरेन को भारत रत्न देने की मांग की गई थी। अब केंद्र सरकार को इस प्रस्ताव पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। बेसरा ने कहा, “पद्म भूषण सम्मान से हमें खुशी हुई है, लेकिन गुरु जी का योगदान इससे कहीं बड़ा है। भारत रत्न उनके संघर्ष और बलिदान की सच्ची पहचान होगा।”

शिबू सोरेन का जीवन और संघर्ष

शिबू सोरेन का जन्म 11 जनवरी 1944 को हुआ था। वे संथाल परगना के रामगढ़ जिले के नेमरा गांव के रहने वाले थे। छोटी उम्र से ही उन्होंने आदिवासियों की समस्याओं को समझा और उनसे जुड़ गए। 1972 में उन्होंने झारखंड मुक्ति मोर्चा की स्थापना की। यह पार्टी शुरू में झारखंड अलग राज्य की मांग पर केंद्रित थी। सोरेन ने कई बार जेल यात्राएं कीं, आंदोलन चलाए और पुलिस की गोलीबारी में भी कई साथी शहीद हुए।

वे तीन बार झारखंड के मुख्यमंत्री बने। पहली बार 2005 में कुछ दिनों के लिए, फिर 2010 में और आखिरी बार 2013 में। उनके कार्यकाल में आदिवासी कल्याण, शिक्षा, स्वास्थ्य और भूमि अधिकारों पर खास जोर दिया गया। वे ‘दिशोम गुरु’ के नाम से पूजे जाते थे, क्योंकि उन्होंने आदिवासियों को एक नई दिशा दी।

झारखंड में खुशी और गर्व का माहौल

इस घोषणा के बाद झारखंड की राजधानी रांची से लेकर छोटे-छोटे गांवों तक खुशी का माहौल है। जेएमएम कार्यकर्ता और आम आदिवासी लोग इसे अपने संघर्ष की जीत मान रहे हैं। कई नेताओं ने सोशल मीडिया पर बधाई दी है। कहा जा रहा है कि यह सम्मान झारखंड आंदोलन के सभी शहीदों और कार्यकर्ताओं को समर्पित है।

केंद्र सरकार ने इस बार पद्म पुरस्कारों में कई बड़े नाम शामिल किए हैं, जैसे अभिनेता धर्मेंद्र को पद्म विभूषण, क्रिकेटर रोहित शर्मा को पद्म श्री आदि। लेकिन झारखंड के लिए शिबू सोरेन का नाम सबसे खास है। यह सम्मान न सिर्फ एक व्यक्ति को मिला है, बल्कि पूरे राज्य की पहचान और आदिवासी गौरव को नई ऊंचाई दी है।

Other Latest News

Leave a Comment