Fireworks cause Fire At Hightage Hospital : आगरा-दिल्ली हाईवे पर हाईटेज हॉस्पिटल में आतिशबाजी से लगी आग; सात आईसीयू मरीजों को सुरक्षित निकाला, फायरकर्मी घायल

Fireworks cause Fire At Hightage Hospital : ताजनगरी आगरा के व्यस्त आगरा-दिल्ली नेशनल हाईवे पर स्थित हाईटेज हॉस्पिटल में गुरुवार रात को एक छोटी सी आतिशबाजी ने विकराल रूप धारण कर लिया। अस्पताल की तीसरी मंजिल पर स्थित स्टोर रूम में अचानक आग की लपटें भड़क उठीं, जिससे पूरी इमारत धुएं से भर गई। इस हादसे के दौरान अस्पताल में भर्ती सात गंभीर मरीज आईसीयू में थे, लेकिन फायर ब्रिगेड की तत्परता और अस्पताल के कार्यरत अग्निशमन उपकरणों की वजह से कोई बड़ा हादसा होने से बच गया। आग पर लगभग एक घंटे की मशक्कत के बाद काबू पा लिया गया। घटना में एक फायरकर्मी घायल हो गया, जिसकी हालत अब स्थिर बताई जा रही है।

घटना का विवरण: आतिशबाजी से शुरू हुई तबाही

हादसा रात करीब 9:30 बजे का है, जब अस्पताल के स्टाफ और कुछ परिजनों द्वारा दीवाली की तैयारियों के सिलसिले में तीसरी मंजिल के स्टोर रूम के पास छोटी-मोटी आतिशबाजी की जा रही थी। सूत्रों के अनुसार, एक पटाखे का ठीकरा स्टोर रूम में रखे ज्वलनशील सामान (जैसे ऑक्सीजन सिलेंडर, दवाइयों के डिब्बे और अन्य मेडिकल वेस्ट) पर गिर गया, जिससे चिंगारी फैल गई। देखते ही देखते आग ने जोर पकड़ लिया और लपटें स्टोर रूम से बाहर फैलने लगीं।

आग की वजह से तीसरी मंजिल पर भारी धुआं भर गया, जो तेजी से नीचे की मंजिलों तक पहुंच गया। आईसीयू वॉर्ड, जो दूसरी मंजिल पर स्थित है, में भर्ती सात मरीजों को सांस लेने में तकलीफ होने लगी। इनमें से चार मरीज वेंटिलेटर पर थे, जबकि तीन को इंटेंसिव केयर की जरूरत थी। अस्पताल में भर्ती अन्य मरीजों और स्टाफ में हड़कंप मच गया। चीख-पुकार मचने लगी, और कई लोग आपाधापी में सीढ़ियों की ओर भागे। धुएं की वजह से दृश्यता शून्य हो गई, जिससे निकासी में भारी मुश्किल हुई।

फायर ब्रिगेड की तत्परता: एक घंटे में काबू

सूचना मिलते ही आगरा फायर ब्रिगेड का अलर्ट हो गया। रात 9:45 बजे तक चार दमकल गाड़ियां और लगभग 30 कर्मचारी मौके पर पहुंच चुके थे। फायर स्टेशन के स्टेशन ऑफिसर राजेश कुमार ने बताया, “आग मुख्य रूप से स्टोर रूम तक सीमित थी, लेकिन धुआं पूरे भवन में फैल चुका था। हमने सबसे पहले आईसीयू मरीजों की प्राथमिकता सुनिश्चित की। सातों मरीजों को व्हीलचेयर पर बैठाकर और स्ट्रेचर पर लिटाकर सुरक्षित बाहर निकाला गया।”

फायरकर्मियों ने आग बुझाने के लिए हाई-प्रेशर वाटर जेट और फोम एक्सटिंग्विशर का इस्तेमाल किया। अस्पताल में लगे अग्निशमन उपकरण (फायर अलार्म, स्प्रिंकलर सिस्टम और पोर्टेबल एक्सटिंग्विशर) भी सक्रिय हो गए, जिसने आग को तीसरी मंजिल तक ही सीमित रखा। लगभग 50 मिनट की मशक्कत के बाद रात 10:35 बजे आग पर पूरी तरह काबू पा लिया गया। इस दौरान हाईवे पर यातायात को कुछ देर के लिए डायवर्ट करना पड़ा, जिससे ट्रैफिक जाम जैसी स्थिति बन गई।

घायल फायरकर्मी की बहादुरी: धुएं में फंसकर भी बचाई जानें

हादसे का सबसे डरावना पहलू तब उभरा जब फायरकर्मी पंकज (उम्र 28 वर्ष) धुएं की चपेट में आ गए। पंकज आईसीयू से एक मरीज को बाहर निकाल रहे थे, तभी घने धुएं के कारण उनकी सांस अटक गई और वे बेहोश होकर गिर पड़े। अन्य साथियों ने उन्हें खींचकर बाहर निकाला। पंकज को तुरंत अस्पताल के ही इमरजेंसी वॉर्ड में भर्ती कराया गया, जहां ऑक्सीजन थेरेपी और प्राथमिक उपचार के बाद उनकी हालत स्थिर हो गई। फायर ब्रिगेड के डिप्टी चीफ राजीव शर्मा ने कहा, “पंकज की बहादुरी ने कई जानें बचाईं। वह अब ठीक हैं और कल ड्यूटी जॉइन कर लेंगे।” पंकज के परिवार ने बताया कि वह पिछले पांच वर्षों से फायर सर्विस में हैं और यह उनकी पहली बड़ी घटना थी।

अस्पताल प्रशासन का बयान: सबक लेने का समय

हाईटेज हॉस्पिटल के मेडिकल सुपरिंटेंडेंट डॉ. अनिल वर्मा ने बताया, “हमारे अस्पताल में अग्निशमन यंत्रणाएं नियमित रूप से चेक की जाती हैं, जिसकी वजह से आग फैलने से पहले ही अलार्म बज गया। सभी मरीजों को सुरक्षित शिफ्ट कर दिया गया है, और फिलहाल कोई जानमाल का नुकसान नहीं हुआ।” उन्होंने आगे कहा कि स्टोर रूम में ज्वलनशील सामान को अब और सख्ती से संभाला जाएगा। डॉ. वर्मा ने दीवाली के दौरान आतिशबाजी पर प्रतिबंध लगाने की मांग भी की।

घटना के बाद स्थानीय प्रशासन ने जांच शुरू कर दी है। जिला मजिस्ट्रेट की ओर से एक टीम गठित की गई है, जो आग के सटीक कारण और सुरक्षा मानकों की पड़ताल करेगी। आगरा के एसएसपी सुधीर कुमार ने कहा, “हम अस्पतालों में सुरक्षा ऑडिट को और सख्त करेंगे। ऐसी घटनाओं से बचने के लिए जागरूकता अभियान चलाया जाएगा।”

प्रभाव: मरीजों की चिंता और राहत

सातों आईसीयू मरीजों को अस्थायी रूप से पास के एक अन्य अस्पताल में शिफ्ट किया गया है, जहां उनकी निगरानी जारी है। एक मरीज के परिजन ने बताया, “धुएं की वजह से डर लग रहा था, लेकिन फायर ब्रिगेड के जवानों ने कमाल कर दिया।” अस्पताल के अन्य 25 मरीजों को भी चेकअप के बाद डिस्चार्ज या शिफ्ट करने का फैसला लिया गया।

यह घटना आगरा जैसे शहर में स्वास्थ्य सुविधाओं की सुरक्षा पर सवाल खड़े करती है, जहां व्यस्त हाईवे पर स्थित अस्पतालों में ऐसी दुर्घटनाओं का खतरा हमेशा बना रहता है। दीवाली के त्योहार में आतिशबाजी की चमक के बीच यह हादसा एक चेतावनी के रूप में सामने आया है, जो हमें सतर्क रहने की याद दिलाता है। फायर ब्रिगेड की त्वरित कार्रवाई ने साबित कर दिया कि तैयारी ही सबसे बड़ा बचाव है।

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