Guruji Model in Jharkhand : झारखंड में लागू हो गुरुजी मॉडल, आंदोलनकारियों को मिला पहचान पत्र, राजू महतो ने की बड़ी मांग

Guruji Model in Jharkhand : रांची में जुटे सैकड़ों आंदोलनकारी, दिशोम गुरु शिबू सोरेन के नाम गूंजे नारे

Guruji Model in Jharkhand : झारखंड राज्य अलग होने के लिए दशकों तक जंगल, पहाड़ और सड़कों पर लड़ाई लड़ने वाले आंदोलनकारियों के लिए अच्छी खबर आई है। झारखंड सरकार ने राज्य के अलग-अलग कोनों से आए सैकड़ों पुराने आंदोलनकारियों को आधिकारिक पहचान पत्र बांटना शुरू कर दिया है। बुधवार को रांची के मोरहाबादी मैदान में दिवंगत दिशोम गुरु शिबू सोरेन के घर के ठीक बाहर यह कार्यक्रम हुआ। दूर-दराज के गांवों से आए बूढ़े आंदोलनकारी, जिन्होंने अपनी जवानी झारखंड आंदोलन को दी थी, आज पहली बार अपने हाथ में सरकारी पहचान पत्र थामकर भावुक हो गए।

“वीर शिबू सोरेन अमर रहे” के नारों से गूंजा मोरहाबादी

कार्यक्रम शुरू होते ही पूरा इलाका “शिबू सोरेन अमर रहे”, “झारखंड आंदोलन जिंदाबाद” और “दिशोम गुरु जिंदाबाद” के नारों से गूंज उठा। कई बुजुर्ग आंदोलनकारी तो आंसू भी नहीं रोक पाए। उनके लिए यह सिर्फ एक कागज का टुकड़ा नहीं था, बल्कि उनकी जिंदगी भर की कुर्बानी की सरकारी मुहर थी। कई लोग तो सालों से यह दिन देखने के लिए तरस रहे थे।

राजू महतो ने सीएम हेमंत सोरेन को कहा धन्यवाद, साथ ही रखी दो बड़ी मांग

झारखंड आंदोलनकारी महासभा के अध्यक्ष राजू महतो ने मंच से मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को दिल से धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा, “आज हमारे आंदोलनकारियों की मेहनत को सरकार ने सम्मान दिया है। इसके लिए हम मुख्यमंत्री जी के आभारी हैं।” लेकिन धन्यवाद के साथ-साथ राजू महतो ने दो बड़ी मांग भी रख दीं।

पहली मांग – झारखंड में “गुरुजी मॉडल” लागू किया जाए

राजू महतो ने कहा कि जिस तरह बिहार में अलग राज्य आंदोलन के शहीदों और आंदोलनकारियों के लिए “गुरुजी मॉडल” के तहत पेंशन, नौकरी और सम्मान की व्यवस्था है, उसी तरह झारखंड में भी लागू होना चाहिए। उन्होंने कहा, “हमारे कई साथी आज गरीबी में जी रहे हैं। कई तो बीमारी से जूझ रहे हैं। अगर गुरुजी मॉडल लागू हो जाए तो हर आंदोलनकारी को हर महीने पेंशन, इलाज की सुविधा और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी मिल सकती है।”

दूसरी मांग – शिबू सोरेन को भारत रत्न

राजू महतो ने जोर देकर कहा कि झारखंड राज्य बनाने का सपना सबसे पहले दिशोम गुरु शिबू सोरेन ने देखा था। उनके नेतृत्व में ही लाखों आदिवासी-मूलवासी सड़कों पर उतरे थे। इसलिए केंद्र सरकार को शिबू सोरेन को मरणोपरांत “भारत रत्न” देना चाहिए। उन्होंने कहा, “यह सिर्फ एक व्यक्ति का सम्मान नहीं, पूरे झारखंड की अस्मिता का सम्मान होगा।”

पहचान पत्र मिलने से क्या फायदा होगा

सरकार की तरफ से जारी इस पहचान पत्र से अब आंदोलनकारियों को कई सरकारी योजनाओं का सीधा लाभ मिलेगा। पेंशन, मुफ्त इलाज, बस-ट्रेन में छूट जैसी सुविधाएं अब आसानी से मिल सकेंगी। कई आंदोलनकारी सालों से सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहे थे, अब उनकी पहचान तय हो गई है।

आंदोलनकारियों की खुशी, आंसुओं भरी कहानियां

News Nation Bharat 4 3

एक 75 साल के बुजुर्ग आंदोलनकारी तिलका मांझी (नाम बदला गया) ने बताया, “हमने 80-90 के दशक में पुलिस की लाठियां खाईं, जेल गए, घर-परिवार छोड़ दिया। आज पहचान पत्र हाथ में आया तो लगा सारी मेहनत सफल हो गई।” एक अन्य आंदोलनकारी ने कहा, “अब हमारे बच्चे-नाती गर्व से कह सकेंगे कि उनके दादा-परदादा ने झारखंड बनाया था।”

सरकार का अगला कदम क्या?

सरकार ने बताया कि यह सिर्फ शुरुआत है। आने वाले दिनों में और भी आंदोलनकारियों को पहचान पत्र दिए जाएंगे। साथ ही गुरुजी मॉडल पर विचार करने की बात भी कही जा रही है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने खुद कई बार कहा है कि झारखंड आंदोलनकारियों का सम्मान उनकी सरकार की प्राथमिकता है।

निष्कर्ष

झारखंड के लिए जिस खून-पसीने की लड़ाई लड़ी गई, उसकी एक बड़ी कड़ी आज पूरी हुई। पहचान पत्र भले ही एक कागज का टुकड़ा हो, लेकिन उसके पीछे दशकों की तपस्या, बलिदान और संघर्ष की कहानी छुपी है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि सरकार कब तक “गुरुजी मॉडल” लागू करती है और केंद्र शिबू सोरेन को भारत रत्न देने का फैसला कब लेता है।

Other Latest News

Leave a Comment