Raebareli: लालगंज तहसील से सामने आए एक वायरल वीडियो ने प्रशासनिक हलकों से लेकर सोशल मीडिया तक नई बहस छेड़ दी है। वीडियो में एसडीएम (SDM) स्वयं पुलिस की प्वाइंट-टू-प्वाइंट तैनाती का निरीक्षण करते हुए दिखाई दे रहे हैं। इतना ही नहीं, पूरे निरीक्षण का वीडियो भी बनवाया जा रहा है, जिसके बाद इसे लेकर तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
वीडियो सामने आने के बाद लोगों के बीच यह सवाल उठ रहा है कि क्या यह कानून-व्यवस्था को लेकर प्रशासन की सक्रियता का हिस्सा है या फिर कैमरे के जरिए अपनी कार्यशैली को प्रचारित करने की कोशिश? प्रशासनिक व्यवस्था में सामान्यतः पुलिस बल की तैनाती, निगरानी और उसके संचालन की जिम्मेदारी संबंधित पुलिस अधिकारियों की होती है। ऐसे में एसडीएम द्वारा सीधे पुलिस प्वाइंट्स का निरीक्षण किए जाने पर कई तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।

जानकारों का कहना है कि यदि किसी स्थान पर पुलिस व्यवस्था में कमी या लापरवाही थी तो संबंधित क्षेत्राधिकारी, थाना प्रभारी या अन्य पुलिस अधिकारियों को निर्देश देकर आवश्यक सुधार कराया जा सकता था। ऐसे मामलों में समन्वय स्थापित कर व्यवस्था को दुरुस्त करना प्रशासन और पुलिस दोनों की साझा जिम्मेदारी होती है।
चर्चा इस बात को लेकर भी है कि इस तरह के वीडियो सार्वजनिक होने से आम लोगों के बीच यह संदेश जा सकता है कि पुलिस अपने दायित्वों का प्रभावी ढंग से निर्वहन नहीं कर रही और प्रशासन को स्वयं मोर्चा संभालना पड़ रहा है। इससे कानून-व्यवस्था को लेकर अनावश्यक भ्रम की स्थिति भी पैदा हो सकती है।
हालांकि, दूसरी ओर कुछ लोग इसे प्रशासनिक सतर्कता और अधिकारियों की सक्रिय कार्यशैली का उदाहरण भी मान रहे हैं। उनका कहना है कि संवेदनशील परिस्थितियों में मजिस्ट्रेट के रूप में एसडीएम को क्षेत्र का निरीक्षण करने और व्यवस्थाओं का जायजा लेने का अधिकार है तथा यह उनकी जिम्मेदारियों का भी हिस्सा है।
फिलहाल यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और अलग-अलग नजरियों से इसकी व्याख्या की जा रही है। मामले पर प्रशासन की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। वीडियो की चर्चा के बीच यह सवाल जरूर खड़ा हो गया है कि प्रशासनिक सक्रियता और सार्वजनिक छवि निर्माण के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए।










