Madarsa Ishaatul Quran Dastarbandi: सराय तरीन में भव्य धार्मिक समारोह, 6 बच्चों को मिली हिफ्ज़-ए-कुरआन की दस्तार

Madarsa Ishaatul Quran Dastarbandi: मदरसा इशातुल कुरान का इजलास-ए-आम, कुरआन याद करने वाले बच्चों को सम्मानित किया

Madarsa Ishaatul Quran Dastarbandi: संभल जिले के सराय तरीन इलाके में मदरसा इशातुल कुरान ने एक खास धार्मिक और शैक्षिक कार्यक्रम का आयोजन किया। यह सालाना इजलास-ए-आम और दस्तारबंदी का समारोह था, जिसमें छह बच्चों ने कुरआन शरीफ को पूरा याद करने (हिफ्ज़) की उपलब्धि हासिल की। इस मौके पर बड़ी संख्या में स्थानीय लोग, उलेमा, हाफ़िज़ और समाज के सम्मानित सदस्य मौजूद रहे। कार्यक्रम की शुरुआत से लेकर अंत तक पूरा माहौल इबादत, सम्मान और दीनी तालीम की महत्ता से भरा रहा।

कार्यक्रम की शुरुआत तिलावत-ए-कुरआन से/Madarsa Ishaatul Quran Dastarbandi

समारोह की शुरुआत बहुत ही सुकून देने वाले अंदाज में हुई। क़ारी नाज़िम ने कुरआन पाक की तिलावत की, जिससे पूरा हॉल अल्लाह की याद से गूंज उठा। इसके बाद क़ारी फ़रमान रसूल ने नात-ए-पाक पेश की, जो पैगंबर मुहम्मद साहब (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) की शान में पढ़ी गई खूबसूरत नात थी। इन दोनों प्रस्तुतियों ने सबके दिलों को छू लिया और माहौल को और भी पवित्र बना दिया।

मौलाना मुफ्ती अब्दुल गफूर का प्रेरणादायक संदेश

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि और मदरसे के प्रमुख उलेमा में से एक मौलाना मुफ्ती अब्दुल गफूर ने बहुत ही प्रभावशाली बातें कहीं। उन्होंने कहा कि क़यामत के दिन हाफ़िज़-ए-कुरआन से कुरआन पढ़ने को कहा जाएगा। जैसे-जैसे वह आयतें पढ़ेगा, वैसे-वैसे उसका जन्नत में दर्जा बढ़ता जाएगा। यह सुनकर सबके चेहरे पर खुशी और उम्मीद की चमक आ गई।

उन्होंने हाफ़िज़ के माता-पिता की फज़ीलत पर भी रोशनी डाली। मौलाना साहब ने बताया कि क़यामत के दिन हाफ़िज़ के वालिदैन को एक खास ताज पहनाया जाएगा, जिसकी चमक सूरज से भी ज्यादा होगी। यह ताज उनके बच्चों को कुरआन याद कराने के इनाम के तौर पर दिया जाएगा। इस बात ने मौजूद माता-पिता को बहुत खुशी दी और उन्होंने अपने बच्चों को दीनी तालीम देने का और ज्यादा जज्बा महसूस किया।

मौलाना मुफ्ती रियाज़ उल हक़ कासमी की नसीहत

कार्यक्रम में मौलाना मुफ्ती रियाज़ उल हक़ कासमी ने भी अपना खास पैगाम दिया। उन्होंने जोर देकर कहा कि इंसान सिर्फ पैगंबर मुहम्मद साहब (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) के बताए रास्ते पर चलकर ही दुनिया और आखिरत दोनों में कामयाब हो सकता है। उन्होंने नमाज़ की अहमियत बताते हुए कहा कि नमाज़ पैगंबर साहब की आंखों की ठंडक है। हर मुसलमान को पांच वक्त की नमाज़ का पाबंद बनना चाहिए।

मौलाना साहब ने समाज के लोगों से अपील की कि वे अपने बच्चों को सिर्फ दुनिया की पढ़ाई (दुनिया की तालीम) ही न दें, बल्कि दीनी तालीम भी जरूर दें। आज के दौर में जहां बच्चे स्कूल-कॉलेज की पढ़ाई में व्यस्त रहते हैं, वहीं कुरआन और इस्लामी तालीम से दूर हो जाते हैं। ऐसे में मदरसों का रोल बहुत बड़ा है, जो बच्चों को दोनों तरह की शिक्षा देने में मदद करते हैं।

छह बच्चों की दस्तारबंदी,एक ऐतिहासिक पल

समारोह का सबसे खास हिस्सा दस्तारबंदी का था। छह मेहनती और होनहार बच्चों ने कुरआन शरीफ को पूरा याद कर लिया था। इन बच्चों के नाम हैं:

  • मौहम्मद उमैर
  • मौहम्मद शाहेदीन
  • अब्दुल रहमान
  • मुहम्मद तारिक़
  • मुहम्मद इबाद

(नोट: मूल खबर में पांच नाम हैं, लेकिन कार्यक्रम में छह बच्चों का जिक्र है – शायद छठा नाम भी शामिल रहा।)

मौलाना मुफ्ती अब्दुल गफूर ने इन बच्चों के सिर पर पगड़ी (दस्तार) बांधी और उन्हें ट्रॉफी देकर सम्मानित किया। यह पल बहुत भावुक था। बच्चे गर्व से खड़े थे, उनके माता-पिता की आंखें खुशी से नम थीं और पूरा हॉल तालियों से गूंज उठा। दस्तारबंदी इस्लामी परंपरा में हाफ़िज़-ए-कुरआन को बहुत ऊंचा दर्जा देने का प्रतीक है। यह रस्म बच्चों की मेहनत को सलाम करती है और उन्हें समाज में सम्मान दिलाती है।

कार्यक्रम का संचालन और मौजूद लोग

इस पूरे कार्यक्रम की निज़ामत (संचालन) मुफ्ती उम्मेद ने की, जबकि अध्यक्षता अब्दुल मुईद कासमी ने संभाली। अंत में हजरत मौलाना मुफ्ती अब्दुल गफूर साहब ने सबके लिए दुआ की, जिसमें सबकी हिफाजत, कामयाबी और जन्नत की मांग की गई।

मौके पर कई प्रमुख लोग मौजूद थे, जैसे मुफ्ती मुशर्रफ, क़ारी नाज़िम, क़ारी अरमान, हाफ़िज़ रुमान, मास्टर नाज़िश मियां, क़ारी रिज़वान, हाफ़िज़ उस्मान, हाफ़िज़ हारुन और सैकड़ों अन्य लोग। इन सबकी मौजूदगी ने कार्यक्रम को और भी यादगार बना दिया।

निष्कर्ष

यह कार्यक्रम सिर्फ एक समारोह नहीं था, बल्कि यह संदेश देता है कि कुरआन की तालीम आज भी उतनी ही जरूरी है जितनी पहले थी। मदरसा इशातुल कुरान जैसे संस्थान बच्चों को अच्छे इंसान और अच्छे मुसलमान बनाने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। ऐसे आयोजन समाज को एकजुट करते हैं और आने वाली पीढ़ी को सही रास्ता दिखाते हैं।

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