Mahatma Gandhi Punyatithi Ramgarh: रामगढ़ में महात्मा गांधी की पुण्यतिथि,याद किया गया ऐतिहासिक कनेक्शन

Mahatma Gandhi Punyatithi Ramgarh: भारत छोड़ो की नींव पड़ी थी यहीं,रामगढ़ में गांधीजी की पुण्यतिथि बड़ी धूम से

Mahatma Gandhi Punyatithi Ramgarh: झारखंड के रामगढ़ जिले में आज यानी 30 जनवरी को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की पुण्यतिथि बड़ी श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाई गई। यह दिन पूरे देश में गांधीजी की हत्या की याद में शोक और सम्मान का प्रतीक है। गांधीजी की हत्या 30 जनवरी 1948 को नई दिल्ली में नाथूराम गोडसे ने कर दी थी। रामगढ़ में यह तिथि इसलिए भी खास है क्योंकि यहां गांधीजी का गहरा कनेक्शन रहा है। दामोदर नदी के किनारे स्थित गांधी घाट पर लोग जुटे, जहां बापू की अस्थियों का एक पवित्र कलश रखा गया है।

दामोदर घाट पर गांधीजी की समाधि स्थल/Mahatma Gandhi Punyatithi Ramgarh

रामगढ़ जिले के दामोदर नदी के किनारे एक खास जगह है, जिसे गांधी घाट के नाम से जाना जाता है। यहां महात्मा गांधी की अस्थियों का एक कलश स्थापित है, जो आज भी लोगों को बापू की याद दिलाता है। जब 1948 में गांधीजी का निधन हुआ, तो उनकी अस्थियां पूरे देश में 16 अलग-अलग कलशों में भेजी गईं। इनमें से एक कलश रामगढ़ के दामोदर नदी के तट पर रखा गया। बताया जाता है कि गांधीजी ने खुद रामगढ़ कांग्रेस अधिवेशन के दौरान दामोदर नदी के किनारे अपनी अस्थियां विसर्जित करने की इच्छा जताई थी। इसी वजह से यह जगह आज महात्मा गांधी समाधि स्थल या गांधी घाट के रूप में प्रसिद्ध है।

हर साल 30 जनवरी को यहां जिले के बड़े अधिकारी, सामाजिक संगठन के लोग और आम नागरिक इकट्ठा होते हैं। वे बापू की समाधि पर फूल चढ़ाते हैं, श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं और उनके सिद्धांतों को याद करते हैं। इस बार भी ऐसा ही हुआ। डिप्टी कमिश्नर फैज अहमद मुमताज, एसपी अजय कुमार और विधायक ममता देवी समेत कई गणमान्य लोग मौजूद थे। उन्होंने गांधीजी के अहिंसा, सत्य और स्वतंत्रता के संदेश को दोहराया और कहा कि आज के समय में भी इन मूल्यों की जरूरत है।

1940 का ऐतिहासिक रामगढ़ कांग्रेस अधिवेशन

रामगढ़ का गांधीजी से सबसे मजबूत कनेक्शन 1940 के मार्च महीने से जुड़ा है। 18 से 20 मार्च 1940 तक यहां भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का 53वां अधिवेशन हुआ था। इसकी अध्यक्षता मौलाना अबुल कलाम आजाद ने की थी। इस अधिवेशन में महात्मा गांधी, पंडित जवाहरलाल नेहरू, सरदार वल्लभभाई पटेल, राजेंद्र प्रसाद जैसे बड़े नेता शामिल हुए थे। अधिवेशन दामोदर नदी के किनारे हरिहर नदी के पास आयोजित किया गया था। वहां नेताओं के ठहरने के लिए सैकड़ों तंबू लगाए गए थे।

यह अधिवेशन उस समय बहुत महत्वपूर्ण था क्योंकि दूसरा विश्व युद्ध चल रहा था। ब्रिटिश सरकार ने बिना भारतीयों की राय लिए भारत को युद्ध में शामिल कर लिया था। कांग्रेस ने इसका विरोध किया और कहा कि ब्रिटिश साम्राज्यवादी मकसद के लिए युद्ध लड़ रहे हैं। अधिवेशन में ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन की रूपरेखा तैयार की गई। गांधीजी ने लोगों से आजादी के लिए एकजुट होने का आह्वान किया। जैसे ही उन्होंने भाषण दिया, पूरा मैदान ‘इंकलाब जिंदाबाद’ और आजादी के नारों से गूंज उठा।

भारी बारिश के बावजूद तीन दिनों तक यह अधिवेशन चला। गांधीजी रांची से रामगढ़ तक फिटन गाड़ी से आए थे। यह झारखंड क्षेत्र में आजादी से पहले का एकमात्र बड़ा कांग्रेस अधिवेशन था। इसने स्वतंत्रता संग्राम को नई दिशा दी और बाद में भारत छोड़ो आंदोलन का आधार बना।

आज भी जीवंत है वह याद

रामगढ़ के लोग आज भी उस अधिवेशन और गांधीजी के दौरे को गर्व से याद करते हैं। गांधी घाट न सिर्फ एक धार्मिक या ऐतिहासिक जगह है, बल्कि यह बापू के आदर्शों का प्रतीक है। यहां आकर लोग शांति, अहिंसा और सत्य की बात करते हैं। पुण्यतिथि पर आयोजित कार्यक्रम में डीसी फैज अहमद मुमताज ने कहा कि गांधीजी के विचार आज भी प्रासंगिक हैं। एसपी अजय कुमार ने सुरक्षा और शांति के संदेश पर जोर दिया। विधायक ममता देवी ने महिलाओं और युवाओं से गांधीजी के रास्ते पर चलने की अपील की।

गांधीजी का झारखंड से गहरा नाता

झारखंड से गांधीजी का रिश्ता काफी पुराना है। उन्होंने 1917 से 1940 तक इस क्षेत्र में कई बार दौरा किया। वे चंपारण सत्याग्रह, असहयोग आंदोलन जैसे आंदोलनों में शामिल हुए और स्थानीय नेताओं से मिले। रामगढ़ अधिवेशन उनके अंतिम प्रमुख दौरों में से एक था। गांधी घाट आज भी लोगों को याद दिलाता है कि कैसे एक छोटा सा शहर स्वतंत्रता संग्राम का हिस्सा बना।

निष्कर्ष

महात्मा गांधी की पुण्यतिथि सिर्फ शोक का दिन नहीं, बल्कि उनके विचारों को अपनाने का अवसर है। रामगढ़ में मनाया गया यह कार्यक्रम बताता है कि बापू की याद आज भी जिंदा है। अहिंसा, सत्याग्रह और स्वदेशी के उनके सिद्धांत आज के भारत के लिए भी मार्गदर्शक हैं। गांधी घाट पर खड़े होकर लोग सोचते हैं कि कैसे एक व्यक्ति ने पूरे देश को आजादी का रास्ता दिखाया। रामगढ़ का यह कनेक्शन हमें गर्व महसूस कराता है और याद दिलाता है कि स्वतंत्रता की लड़ाई में हर कोना शामिल था।

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