मध्यप्रदेश सहित इंदौर कई बड़े शहरों में हाल के दिनों में अपराध की सक्रियता बढ़ गयी है। व्यापारियों और अन्य करोड़पतियों को लगातार करोड़ों रुपये की रंगदारी के लिए कॉल आ रहे हैं। इन कॉल्स में खुद को लॉरेंस बिश्नोई गैंग से जुड़ा बताया जा रहा है। इतना ही नहीं, कई मामलों में घरों के बाहर फायरिंग कर डर का माहौल भी बनाया गया है।
STF को सौंपी गई जांच
इन बढ़ती घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए मध्यप्रदेश के डीजीपी कैलाश मकवाना ने अहम निर्णय लिया है। उन्होंने लॉरेंस बिश्नोई गैंग और “हैरी बॉक्स” नाम से मिल रही धमकियों से जुड़े सभी मामलों को जांच के लिए अब स्पेशल टास्क फोर्स (STF) को सौंप दी है। इस फैसले के बाद उम्मीद की जा रही है कि संगठित अपराध पर नकेल कसने के लिए तेज और प्रभावी कार्रवाई देखने को मिलेगी।

रंगदारी से लेकर फायरिंग तक—अपराध का नया ट्रेंड
प्रदेश में सामने आ रहे मामलों में कुछ समानताएं देखने को मिली हैं:
- 10 करोड़ या उससे अधिक की रंगदारी की मांग
- व्हाट्सएप कॉल या इंटरनेशनल नंबर से संपर्क
- धमकी के बाद घर या ऑफिस के बाहर फायरिंग
- गैंग का नाम लेकर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाना
ये घटनाएं साफ इशारा करती हैं कि अपराधी अब डर के जरिए त्वरित वसूली का रास्ता अपना रहे हैं।
घर का भेदी लंका ढहाए
पुलिस सूत्रों का मानना है कि इन मामलों में लोकल इनपुट की भूमिका से इनकार नहीं किया जा सकता। यानी, जिन लोगों को धमकियां मिल रही हैं, उनकी आर्थिक स्थिति और लोकेशन की सटीक जानकारी अपराधियों तक पहुंच रही है। इसलिए STF अब इस एंगल पर भी काम करेगी कि कहीं स्थानीय स्तर पर कोई मदद तो नहीं मिल रही।
स्थानीय पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठ रहे सवाल
हालांकि STF को जांच सौंपना एक बड़ा कदम माना जा रहा है, लेकिन इससे स्थानीय पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं। प्रदेश के कई शहरों में खुलेआम हो रहे अपराध यह संकेत देते हैं कि जमीनी स्तर पर निगरानी और खुफिया तंत्र को और मजबूत करने की जरूरत है।
STF की कार्रवाई पर टिकी निगाहें
अब पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि STF कितनी तेजी और सटीकता से इन मामलों का खुलासा कर पाती है। विशेषज्ञों के मुताबिक, यदि शुरुआती मामलों में ठोस कार्रवाई होती है, तो इससे न केवल गैंग का नेटवर्क टूटेगा बल्कि भविष्य में ऐसी घटनाओं पर भी अंकुश लगेगा।










