Nation Celebrates 150 Years of Vande Mataram: आज, 7 नवंबर 2025 को भारतीय इतिहास के लिए एक भावनात्मक और गौरवशाली दिन बन गया है। राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ (Vande Mataram) के आज 150 वर्ष पूरे हो चुके हैं, और इस अवसर को देशभर में एक भव्य उत्सव के रूप में मनाया जा रहा है। केंद्र सरकार और भाजपा ने इसे ‘राष्ट्र एकता उत्सव’ के रूप में मनाने की घोषणा की है। स्कूलों, विश्वविद्यालयों और सार्वजनिक स्थलों पर एक साथ गूंजेगा — वंदे मातरम्! गृहमंत्री अमित शाह ने इसे भारत की आत्मा का स्वर बताते हुए कहा कि यह गीत केवल एक रचना नहीं, बल्कि स्वतंत्रता आंदोलन की आत्मा और देशभक्ति का प्रतीक है। आइए जानते हैं — इस ऐतिहासिक मौके पर क्या तैयारियां हुई हैं और क्यों ‘वंदे मातरम्’ आज भी हर भारतीय के दिल में जीवित है।
वंदे मातरम्—एक गीत नहीं, आंदोलन की आत्मा/Nation Celebrates 150 Years of Vande Mataram
1875 में बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय (Bankim Chandra Chattopadhyay) द्वारा रचित ‘वंदे मातरम्’ भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का धड़कता हुआ स्वर बन गया था। यह गीत केवल शब्दों का समूह नहीं, बल्कि एक ऐसा नारा था जिसने लाखों देशभक्तों को अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ खड़ा कर दिया। क्रांतिकारी जब जेलों में बंद थे या आंदोलन की राह पर थे, तब वंदे मातरम् उनके लिए ऊर्जा, प्रेरणा और बलिदान का मंत्र बन जाता था। ब्रिटिश शासन ने कई बार इस गीत पर पाबंदी लगाई, लेकिन इसके स्वर हर आंदोलन में गूंजते रहे। आज 150 वर्ष बाद भी यह गीत भारत के आत्म-सम्मान और एकता का प्रतीक बना हुआ है। गृहमंत्री अमित शाह ने कहा — “वंदे मातरम् ने भारत को एक सूत्र में बांधा, यह हमारे राष्ट्र की आत्मा की आवाज़ है।”

बंगाल बनेगा उत्सव का केंद्रबिंदु
वंदे मातरम् (Vande Mataram) की ऐतिहासिक जड़ों से जुड़ा पश्चिम बंगाल (West Bengal) इस समारोह का केंद्र बना हुआ है। भाजपा ने राज्य के 1100 स्थानों पर सामूहिक वंदे मातरम् (Vande Mataram) गायन का आयोजन किया है। इन कार्यक्रमों में स्कूली छात्र, युवा संगठन, सांस्कृतिक संस्थाएं और आम नागरिक भाग ले रहे हैं। भाजपा का कहना है कि यह केवल सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि “संस्कृति और अस्मिता का उत्सव” है। हालांकि कुछ विपक्षी दलों ने इस आयोजन को राजनीतिक रंग देने का आरोप लगाया है, लेकिन पार्टी का दावा है कि इसका उद्देश्य देशभक्ति और एकता की भावना को पुनर्जीवित करना है। बंगाल की धरती, जहां यह गीत जन्मा था, आज एक बार फिर उसकी गूंज से भर उठी है। राज्यभर में ऐतिहासिक स्मारकों, मंदिरों और विद्यालयों में वंदे मातरम् के स्वर गूंज रहे हैं।
केंद्र सरकार की तैयारी और राष्ट्रव्यापी कार्यक्रम
इस भव्य उत्सव की तैयारी केंद्र स्तर पर महीनों पहले शुरू हो गई थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) की अध्यक्षता में 1 अक्टूबर 2025 को हुई कैबिनेट बैठक में निर्णय लिया गया कि ‘वंदे मातरम् (Vande Mataram) के 150 वर्ष’ को ‘राष्ट्र एकता उत्सव’ के रूप में मनाया जाएगा। सरकार ने देशभर में 150 प्रमुख स्थलों पर सामूहिक गायन और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित करने का निर्णय लिया। इस अभियान के तहत स्कूलों, कॉलेजों, विश्वविद्यालयों, सांस्कृतिक संस्थानों और सार्वजनिक स्थलों में वंदे मातरम् के इतिहास और महत्व पर विशेष सत्र हो रहे हैं। कार्यक्रमों का उद्देश्य युवाओं को यह समझाना है कि राष्ट्रगीत केवल शब्द नहीं, बल्कि राष्ट्र की पहचान है। अमित शाह ने जनता से अपील की — “परिवार और समाज के साथ मिलकर वंदे मातरम् का पूर्ण संस्करण गाएं, ताकि आने वाली पीढ़ियां भी इस भावना को आगे बढ़ा सकें।”
नए भारत के लिए प्रेरणा का स्रोत
150 वर्ष पहले लिखा गया वंदे मातरम् (Vande Mataram) आज भी उतना ही प्रासंगिक है जितना स्वतंत्रता आंदोलन के समय था। यह गीत भारत की उस अटूट भावना का प्रतीक है, जो भक्ति, बलिदान और एकता में निहित है। आज जब भारत नए युग की ओर बढ़ रहा है, वंदे मातरम् (Vande Mataram) हर नागरिक को यह याद दिलाता है कि देश के प्रति प्रेम और समर्पण ही असली शक्ति है। सरकार का यह प्रयास न सिर्फ एक सांस्कृतिक पुनर्जागरण है, बल्कि युवाओं के भीतर राष्ट्रप्रेम की लौ को फिर से प्रज्वलित करने का प्रयास भी है। देशभर के कार्यक्रमों में बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग एक साथ इस गीत को गा रहे हैं- यह दृश्य आज के भारत की नई एकता और आत्मगौरव की झलक पेश कर रहा है। वास्तव में, “वंदे मातरम् केवल गीत नहीं, भारत की आत्मा की गूंज है।”









