रायबरेली : नाड़ी पकड़कर शरीर की बीमारियों को बताने वाले वैद्य इस आधुनिक युग में भी असाध्य रोगो का इलाज करते हुए देखे गए हैं । लेकिन उनकी संख्या अब बहुत कम बची है । उसी में से एक महान विभूति अब हमारे बीच नहीं रहे। रायबरेली की धरती के शिवगढ़ क्षेत्र स्थित मठ गोसाई के रहने वाले आयुर्वेदाचार्य श्याम लाल शास्त्री के हृदय गति रुकने से मौत हो गई उनकी मौत के बाद आयुर्वेद के क्षेत्र में काम कर रहे विशेषज्ञों और उनके द्वारा रोगो से मुक्ति पाने वाले लोगों के अंदर दुख का माहौल है । शिवगढ़ क्षेत्र में संकट मोचन आश्रम की स्थापना करके श्याम जन कल्याण समिति के माध्यम से लोगों का इलाज करने वाले श्यामलाल शास्त्री 76 वर्ष की आयु में हृदय गति रुकने से गोलोकवासी हो गए । रायबरेली में ही नहीं आसपास के जिलों में उनकी ख्याति थी मरीज़ जाता था उनके पास तो वह हाथ पकड़ते थे और उसका मर्ज बता देते थे लिवर, किडनी और हृदय रोग से पीड़ित कई असाध्य रोगों का इलाज उनके द्वारा किया गया । उनके सानिध्य में रहे डॉक्टर रवि प्रताप ने उनके ना रहने पर दुख व्यक्त किया है।
डॉ रवि प्रताप ने बताया कि वह उम्र में बहुत बड़े थे । उन्हें अध्ययन था आयुर्वेद का और नाड़ी ज्ञान का उन्होंने कई ऐसे शोध करता है जिन्हें उन्होंने आयुर्वेद की और नाड़ी देखने का सूक्ष्म ज्ञान दिया ।पितृपक्ष की अमावस्या तिथि को दोपहर में उनके हृदय गति रुकने से मौत हो गई उनके मौत की खबर जैसे ही क्षेत्र में पहुंची वैसे ही उनके चाहने वालों का ताता आश्रम में लगने लगा । आयुर्वेद के क्षेत्र में अध्ययन करने वाले और कार्य करने वाले ऐसी विभूतियों के जाने से समाज को बहुत बड़ी क्षति पहुंची है । इस दुखद घड़ी में डॉ रवि प्रताप सिंह, रत्नेश्वर सिंह, बृजेश शर्मा, विनोद कुमार, डॉ आशु ने ईश्वर से परिवार को इस दुख को सहन करने के लिए प्रार्थना किया ।











