Raebareli दक्षिणमुखी हनुमान मंदिर के पुजारी पर मानसिक रूप से असहाय व्यक्ति से दुर्व्यवहार का आरोप

भंडारे में प्रसाद मांगने पहुंचे व्यक्ति को लात मारने और घसीटने का वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना

रायबरेली (Raebareli) जिले में एक मंदिर परिसर से सामने आए वीडियो ने लोगों को झकझोर कर रख दिया है। शहर कोतवाली क्षेत्र की जहानाबाद चौकी अंतर्गत स्थित दक्षिणमुखी हनुमान मंदिर (Dakshin Mukhi Hanuman Mandir) में आयोजित भंडारे के दौरान एक मानसिक रूप से असहाय व्यक्ति के साथ कथित दुर्व्यवहार का मामला सामने आया है। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसके बाद स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं में नाराजगी देखने को मिल रही है।

बताया जा रहा है कि बुधवार, 24 जून 2026 को करीब 11 बजे यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होना शुरू हुआ। वीडियो सामने आने के बाद लोग इस घटना को लेकर अपनी प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

भंडारे में प्रसाद लेने पहुंचा था व्यक्ति

प्राप्त जानकारी के अनुसार दक्षिणमुखी हनुमान मंदिर में विशाल भंडारे का आयोजन किया गया था। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु प्रसाद ग्रहण करने के लिए मंदिर परिसर में पहुंचे हुए थे। इसी बीच एक मानसिक रूप से विक्षिप्त या असहाय व्यक्ति भी प्रसाद प्राप्त करने की उम्मीद में मंदिर परिसर में पहुंच गया।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार जब वह व्यक्ति प्रसाद लेने की कोशिश कर रहा था, तब वहां मौजूद कुछ लोगों ने उसे रोकने का प्रयास किया। इसी दौरान मंदिर के पुजारी द्वारा उसके साथ कथित रूप से अभद्र व्यवहार किए जाने का आरोप लगाया जा रहा है।

वीडियो में दिखा कथित दुर्व्यवहार

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में दावा किया जा रहा है कि मंदिर के पुजारी ने उस व्यक्ति को लात मार दी, जिससे वह जमीन पर गिर पड़ा। इसके बाद उसे सड़क की ओर घसीटते हुए ले जाया गया। वीडियो में दिखाई दे रहे दृश्य लोगों के बीच चर्चा का विषय बने हुए हैं।

हालांकि वायरल वीडियो की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है, लेकिन वीडियो सामने आने के बाद लोगों में घटना को लेकर नाराजगी बढ़ गई है। सोशल मीडिया पर बड़ी संख्या में लोग इस व्यवहार की आलोचना कर रहे हैं और इसे मानवता के खिलाफ बता रहे हैं।

लोगों ने जताई नाराजगी

घटना के बाद स्थानीय नागरिकों और श्रद्धालुओं ने इस मामले पर चिंता व्यक्त की है। उनका कहना है कि मंदिर, धार्मिक स्थल और भंडारे जैसे आयोजन समाज में सेवा, दया और समानता का संदेश देने के लिए जाने जाते हैं। ऐसे स्थानों पर किसी भी व्यक्ति के साथ भेदभावपूर्ण या अपमानजनक व्यवहार नहीं होना चाहिए।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि कोई व्यक्ति मानसिक रूप से अस्वस्थ या असहाय था, तो उसके साथ संवेदनशीलता और सहानुभूति का व्यवहार किया जाना चाहिए था। उसे सम्मानपूर्वक समझाकर स्थिति को संभाला जा सकता था। लेकिन यदि वीडियो में दिखाई दे रहे आरोप सही हैं, तो यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और निंदनीय घटना है।

मानवता और सामाजिक मूल्यों पर उठे सवाल

इस घटना ने समाज में कमजोर और असहाय लोगों के प्रति व्यवहार को लेकर भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं। सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि मानसिक रूप से बीमार या असहाय व्यक्तियों को सबसे अधिक सहयोग और सहारे की आवश्यकता होती है। ऐसे लोगों के साथ हिंसक या अपमानजनक व्यवहार किसी भी सभ्य समाज के लिए उचित नहीं माना जा सकता।

धार्मिक स्थलों को करुणा, प्रेम और सेवा का प्रतीक माना जाता है। ऐसे में यदि किसी धार्मिक स्थल से इस प्रकार की घटना सामने आती है तो इससे लोगों की भावनाएं भी आहत होती हैं। कई लोगों ने सोशल मीडिया पर टिप्पणी करते हुए कहा कि धर्म का मूल संदेश दया और मानव सेवा है, इसलिए किसी भी परिस्थिति में अमानवीय व्यवहार को उचित नहीं ठहराया जा सकता।

प्रशासन और पुलिस की नजर मामले पर

वीडियो वायरल होने के बाद प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों की भी इस मामले पर नजर बनी हुई है। हालांकि समाचार लिखे जाने तक पुलिस या जिला प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया था।

सूत्रों के अनुसार वायरल वीडियो की जांच किए जाने की संभावना है। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं, तो संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है। वहीं स्थानीय नागरिकों ने भी मामले की निष्पक्ष जांच कर सच्चाई सामने लाने की मांग की है।

कार्रवाई की मांग तेज

घटना के बाद कई लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि वायरल वीडियो की सत्यता की जांच कर दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ उचित कानूनी कार्रवाई की जाए। लोगों का कहना है कि इस तरह की घटनाओं पर सख्त कदम उठाना जरूरी है ताकि भविष्य में किसी भी असहाय व्यक्ति के साथ ऐसा व्यवहार न हो।

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