Raebareli land Encroachment: रायबरेली में सरकारी जमीन पर दबंगों का कब्जा,पीड़ित ने SDM से लगाई गुहार

Raebareli land encroachment: पीड़ित की शिकायत,पहले भी की थी रिपोर्ट, लेकिन कोई सुनवाई नहीं

Raebareli land encroachment: रायबरेली जिले में सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे की समस्या फिर से सामने आई है। अमावा थाना क्षेत्र के पासिन कोडरा गांव का रहने वाला बुद्धिलाल, जो स्वर्गीय रामबली का बेटा है, काफी परेशान है। उसने तहसील भवन में उप जिला अधिकारी (SDM) को एक शिकायती पत्र सौंपा है। इसमें उसने गांव के कुछ दबंग लोगों पर गंभीर आरोप लगाए हैं।

बुद्धिलाल ने बताया कि गांव में सरकारी जमीन पर खड़ंजा (पक्का रास्ता) बना हुआ है। यह जमीन सार्वजनिक उपयोग के लिए है, लेकिन गांव के ही राम रतन, रामकरण, रामबरन और लालता – जो सभी गयादीन के बेटे हैं – अपने रसूख और प्रभाव का इस्तेमाल करके इस जमीन पर जबरन कब्जा कर रहे हैं। ये लोग जमीन को अपना बताकर वहां निर्माण या उपयोग कर रहे हैं, जबकि यह सरकारी संपत्ति है।

पीड़ित बुद्धिलाल का कहना है कि यह कोई नई बात नहीं है। उसने इससे पहले भी इस कब्जे की शिकायत की थी। पुलिस और प्रशासन को कई बार बताया, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। उल्टा, जब वह थाने में शिकायत दर्ज कराने गया, तो पुलिस ने उसके खिलाफ ही धारा 151 के तहत चालान कर दिया। मतलब, शांति भंग करने के आरोप में उसे ही पकड़ लिया गया। जबकि कब्जा करने वालों के खिलाफ कोई एफआईआर या कार्रवाई नहीं की गई।

प्रशासन पर पक्षपात का आरोप, योगी सरकार के आदेशों की अनदेखी/Raebareli land encroachment

बुद्धिलाल ने अपनी शिकायत में रायबरेली के स्थानीय प्रशासन पर बड़ा आरोप लगाया है। उसका कहना है कि अधिकारी पक्षपात कर रहे हैं। दबंग लोग प्रभावशाली हैं, इसलिए उनकी सुनवाई हो रही है, और गरीब पीड़ित को ही परेशान किया जा रहा है।

उसने याद दिलाया कि उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने भूमाफियाओं के खिलाफ सख्त निर्देश दिए हैं।全省 में भूमाफिया विरोधी अभियान चल रहा है। सरकार का स्पष्ट आदेश है कि सरकारी जमीन को अवैध कब्जों से मुक्त कराया जाए। जगह-जगह बुलडोजर चलाकर अतिक्रमण हटाए जा रहे हैं। लेकिन रायबरेली में स्थानीय अधिकारी इन आदेशों की अनदेखी कर रहे हैं। वे सिर्फ लीपापोती कर रहे हैं, यानी ऊपरी तौर पर मामले को दबाने की कोशिश कर रहे हैं।

बुद्धिलाल ने कहा, “ऐसा करने से सरकार की छवि खराब हो रही है। लोग सोचते हैं कि योगी जी के आदेशों का पालन नहीं हो रहा। गरीब आदमी न्याय मांगने जाता है, तो उसे ही जेल भेज दिया जाता है। यह कहां का इंसाफ है?”

पीड़ित की मांग तत्काल कार्रवाई और जमीन मुक्त कराओ

शिकायती पत्र में बुद्धिलाल ने साफ-साफ मांग की है कि आरोपियों – राम रतन, रामकरण, रामबरन और लालता – के खिलाफ फौरन सख्त कार्रवाई की जाए। सरकारी जमीन से उनका कब्जा हटाया जाए और उसे फिर से सार्वजनिक उपयोग के लिए मुक्त कराया जाए।

उसने चेतावनी भी दी कि अगर यहां न्याय नहीं मिला, तो वह ऊपरी स्तर पर शिकायत करेगा। जिलाधिकारी, फिर मुख्यमंत्री कार्यालय या अदालत तक जाएगा। वह अकेला नहीं है, गांव के कई लोग इस मामले से सहमत हैं और प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठा रहे हैं।

रायबरेली में भूमाफिया समस्या क्यों बनी हुई है

रायबरेली जिला लंबे समय से भूमि विवादों और अवैध कब्जों के लिए जाना जाता है। यहां सरकारी जमीन, तालाब, रास्ते और आम रास्तों पर दबंग लोग कब्जा कर लेते हैं। कभी प्रभावशाली लोग, कभी स्थानीय गुंडे – ऐसे मामले आए दिन सामने आते हैं। योगी सरकार ने पूरे प्रदेश में अभियान चलाया है, जिसमें हजारों एकड़ सरकारी जमीन मुक्त कराई गई है। रायबरेली में भी कई जगह बुलडोजर चले हैं, जैसे तालाबों या पार्कों की जमीन पर।

लेकिन कुछ मामलों में स्थानीय स्तर पर देरी या पक्षपात के आरोप लगते रहते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि राजस्व विभाग और पुलिस की मिलीभगत या सुस्ती के कारण ऐसे मामले लंबे खिंच जाते हैं। गरीब और कमजोर वर्ग के लोग सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं। वे शिकायत करते हैं, लेकिन दबंगों का डर और प्रशासन की अनदेखी से न्याय नहीं मिल पाता।

इस मामले में भी यही लग रहा है। बुद्धिलाल जैसे पीड़ित को उम्मीद है कि SDM उनकी शिकायत पर गंभीरता से कार्रवाई करेंगे। अगर ऐसा नहीं हुआ, तो यह मामला बड़ा रूप ले सकता है। गांव वाले एकजुट होकर आंदोलन कर सकते हैं।

निष्कर्ष

अब निगाहें प्रशासन पर हैं। SDM ने शिकायत स्वीकार कर ली है। उम्मीद है कि जल्द ही जांच होगी और दोषियों पर कार्रवाई होगी। अगर सरकारी जमीन मुक्त हो गई, तो यह योगी सरकार के अभियान की एक और मिसाल बनेगी। लेकिन अगर देरी हुई, तो पीड़ित का आरोप सही साबित होगा कि स्थानीय अधिकारी लीपापोती कर रहे हैं।

ऐसे मामलों में आम लोगों को सलाह है कि वे लिखित शिकायत करें, सबूत इकट्ठा करें और जरूरत पड़े तो ऊपरी अधिकारियों या अदालत का सहारा लें। भूमाफियाओं से लड़ना आसान नहीं, लेकिन सरकार के सख्त निर्देशों के कारण अब उम्मीद ज्यादा है।

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