रायबरेली में स्कूलों को सख्त निर्देश: वाहन निगरानी पोर्टल पर तुरंत करें पंजीकरण, सुरक्षा पर जोर

एआरटीओ ने दी चेतावनी—केवल 14% स्कूल हुए ऑनबोर्ड, 15 अप्रैल तक अभियान पूरा करने की समयसीमा

रायबरेली में स्कूली बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए परिवहन विभाग ने बड़ा कदम उठाया है। सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी (प्रशासन) अरविंद कुमार यादव ने सभी विद्यालयों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वे बिना देरी किए स्कूल वाहन निगरानी पोर्टल पर अपना पंजीकरण पूरा करें। विभाग का मानना है कि कई सड़क हादसों की जड़ में वाहनों की खराब फिटनेस और नियमों की अनदेखी प्रमुख कारण बनती है।

ऑनबोर्डिंग की धीमी रफ्तार बनी चिंता

प्रशासन के मुताबिक जिले में अब तक केवल 14 प्रतिशत विद्यालय ही पोर्टल से जुड़े हैं, जो कि बेहद चिंताजनक स्थिति है। जबकि इस अभियान की समयसीमा 15 अप्रैल 2026 तय की गई है और अब गिने-चुने दिन ही शेष रह गए हैं। अधिकारियों ने इसे गंभीरता से लेते हुए स्कूल प्रबंधन को तत्काल कार्रवाई के लिए कहा है।

क्या है यह वाहन निगरानी पोर्टल?

परिवहन विभाग द्वारा विकसित upisvmp.com पोर्टल का उद्देश्य स्कूली वाहनों की निगरानी को डिजिटल और पारदर्शी बनाना है। इसके माध्यम से स्कूलों के वाहनों की स्थिति, ड्राइवर की जानकारी और सुरक्षा मानकों की जांच एक ही प्लेटफॉर्म पर की जा सकेगी।

स्कूलों को क्या-क्या करना होगा?

पोर्टल पर ऑनबोर्डिंग के दौरान विद्यालयों को निम्नलिखित जानकारियां अपलोड करनी अनिवार्य हैं:

  • सभी स्कूली वाहनों का विवरण
  • वाहन चालकों की पूरी जानकारी
  • 100 रुपये के स्टाम्प पेपर पर नोटरी शपथ पत्र
  • यदि वाहन नहीं है, तो भी ‘वाहन नहीं संचालित’ का शपथ पत्र

हर बोर्ड के स्कूलों के लिए अनिवार्य

यह निर्देश केवल सरकारी ही नहीं बल्कि सभी प्रकार के स्कूलों पर लागू है। इसमें शामिल हैं:

  • यूपी बोर्ड
  • CBSE
  • ICSE
  • अन्य मान्यता प्राप्त बोर्ड (इंटरमीडिएट स्तर तक)

परिषदीय विद्यालयों के लिए यह जिम्मेदारी खंड शिक्षा अधिकारियों को दी गई है कि वे अपने-अपने ब्लॉकों के सभी स्कूलों को पोर्टल से जोड़ें।

नियमों के पालन पर जोर

अधिकारियों ने उत्तर प्रदेश मोटरयान नियमावली 1998 के तहत अध्याय-9-क का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने को कहा है। यह अध्याय विशेष रूप से स्कूली वाहनों की सुरक्षा और संचालन के मानकों को तय करता है। फिटनेस जांच को लेकर 1 से 15 अप्रैल तक विशेष अभियान भी चलाया जा रहा है।

समय रहते कार्रवाई जरूरी

एआरटीओ ने साफ किया है कि समयसीमा के भीतर ऑनबोर्डिंग नहीं करने वाले स्कूलों के खिलाफ कार्रवाई भी हो सकती है। ऐसे में सभी विद्यालयों को चेतावनी दी गई है कि वे इस प्रक्रिया को प्राथमिकता देते हुए तुरंत पूरा करें।

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