Raebareli: जनपद रायबरेली में सोमवार, 12 अक्टूबर 2026 को सुबह करीब 8:30 बजे हरचंदपुर और मिल एरिया थाना क्षेत्रों के अंतर्गत हरदासपुर स्थित एआरटीओ कार्यालय के निकट शारदा नहर में भारी संख्या में मृत मवेशियों के शव बहते दिखाई देने से इलाके में चिंता का माहौल बन गया। नहर में इस तरह मृत पशुओं के शव मिलने की घटना ने जिले की गौशालाओं में गोवंशों के संरक्षण, देखरेख और मृत पशुओं के निस्तारण की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
एक तरफ प्रदेश सरकार गोवंशों के संरक्षण और उनके बेहतर रखरखाव के लिए लगातार प्रयास करने की बात कहती है, वहीं दूसरी ओर नहर में बड़ी संख्या में मृत मवेशियों के शव बहते मिलने की घटना व्यवस्थाओं की वास्तविक स्थिति की जांच की जरूरत को रेखांकित करती है। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि मृत पशु किन गौशालाओं या स्थानों से आए हैं और उन्हें नहर में किसने डाला।

मृत पशुओं के निस्तारण की व्यवस्था पर सवाल
नियमानुसार मृत पशुओं के निस्तारण के लिए उचित व्यवस्था होनी चाहिए, ताकि आसपास के पर्यावरण और जनस्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े। ऐसे में यदि मृत पशुओं को नहर में फेंका गया है, तो यह गंभीर लापरवाही का मामला हो सकता है। सवाल यह भी है कि जिले की विभिन्न गौशालाओं में मृत गोवंशों के निस्तारण के लिए निर्धारित व्यवस्था का पालन किया जा रहा है या नहीं।
स्थानीय स्तर पर इस घटना को लेकर यह मांग उठ सकती है कि संबंधित विभाग गौशालाओं के अभिलेखों, मृत पशुओं की संख्या, उनके निस्तारण की प्रक्रिया और जिम्मेदार कर्मचारियों की भूमिका की जांच करें, जिससे घटना की वास्तविक वजह सामने आ सके।
दूषित हो सकता है नहर का पानी, पशुओं पर भी खतरा
नहर में मृत मवेशियों के शव बहने से पानी की गुणवत्ता प्रभावित होने की आशंका है। यदि यह पानी खेतों की सिंचाई या अन्य उपयोग में लिया जाता है, तो प्रदूषण की स्थिति की जांच जरूरी हो जाती है। दूषित पानी के संपर्क में आने वाले पशुओं और लोगों के स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
ऐसे में संबंधित विभागों के लिए जरूरी है कि नहर से शवों को तत्काल हटाने की व्यवस्था की जाए और पानी की गुणवत्ता की जांच कराई जाए। साथ ही, आसपास के क्षेत्रों में इस पानी का उपयोग करने वाले लोगों और पशुपालकों को आवश्यक सावधानी बरतने के लिए जागरूक किया जाए।
प्रशासनिक जांच और कार्रवाई की जरूरत
इस घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल है कि आखिर इतनी बड़ी संख्या में मृत मवेशियों के शव नहर तक कैसे पहुंचे? क्या पशुओं की मौत के बाद उनके निस्तारण में लापरवाही बरती गई, या इसके पीछे कोई अन्य वजह है? इन सवालों का जवाब जांच के बाद ही सामने आ सकेगा।
प्रशासन को संबंधित गौशालाओं का निरीक्षण कर पशुओं की संख्या और मृत्यु संबंधी रिकॉर्ड का मिलान कराना चाहिए। इसके साथ ही नगर निकाय, पशुपालन विभाग और अन्य संबंधित अधिकारियों की भूमिका की जांच की जाए, ताकि यदि किसी स्तर पर लापरवाही या नियमों का उल्लंघन सामने आए तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई हो सके।
फिलहाल, हरदासपुर एआरटीओ कार्यालय के निकट शारदा नहर में मृत मवेशियों के शव बहते मिलने की घटना ने गोवंश संरक्षण और मृत पशुओं के सुरक्षित निस्तारण की व्यवस्था को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले को कितनी गंभीरता से लेते हुए शवों को हटाने, पानी की गुणवत्ता की जांच कराने और घटना के लिए जिम्मेदार लोगों का पता लगाने के लिए क्या कदम उठाता है।










