Raebareli : रायबरेली जिले में बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) राहुल सिंह द्वारा जारी एक आदेश ने बेसिक शिक्षकों में व्यापक आक्रोश पैदा कर दिया। 24 दिसंबर को जारी आदेश में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का हवाला देते हुए सभी प्रधानाचार्यों को विद्यालय परिसर की सुरक्षा, छात्रों के संरक्षण और आवारा कुत्तों के प्रबंधन के लिए आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने का फरमान सुनाया गया था।
जानकारी अनुसार बता दें की आदेश में स्पष्ट रूप से कहा गया था कि स्कूलों में बाउंड्री वॉल की कमी वाले स्थानों पर विशेष ध्यान देते हुए आवारा कुत्तों के प्रवेश को रोकने और उनके प्रबंधन की जिम्मेदारी शिक्षकों पर डाली जाए। कुछ रिपोर्ट्स में इसे आवारा कुत्तों की गिनती और ट्रैकिंग तक बताया गया। इस आदेश को शिक्षकों ने ‘तुगलकी फरमान’ करार देते हुए तीव्र विरोध जताया।

प्राथमिक शिक्षक संघ के अध्यक्ष राजेश शुक्ला ने कहा, “शिक्षकों से पहले से ही इतने काम लिए जा रहे हैं, अब कुत्तों की गिनती या प्रबंधन का काम देना पूरी तरह समझ से परे है।इससे शिक्षा पर बुरा असर पड़ेगा।
सहायक अध्यापक चंद्रमणि बाजपेई ने अपनी नाराजगी जताते हुए कहा,शिक्षकों से अगर इसी तरह के गैर-शैक्षणिक काम लिए जाते रहे तो बच्चों को पढ़ाने का समय कहां बचेगा? बच्चों की शिक्षा का स्तर कैसे सुधरेगा?”

शिक्षकों के इस विरोध और सोशल मीडिया पर फैले आक्रोश के बाद बीएसए राहुल सिंह ने यू-टर्न लेते हुए आदेश में संशोधन कर दिया। बाद में बीएसए ने स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुपालन में यह निर्देश केवल उन स्कूलों के लिए था जहां बाउंड्री वॉल नहीं है। मुख्य उद्देश्य बच्चों की सुरक्षा और स्कूल परिसर में आवारा कुत्तों के प्रवेश को रोकना था। उन्होंने जोर दिया कि बच्चों की सुरक्षा सर्वोपरि है और इसके लिए उचित प्रबंधन सुनिश्चित करने को कहा गया था।










