रायबरेली बछरावां में बेसिक शिक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल, शिक्षकों ने लगाया उत्पीड़न का आरोप

अनुचर द्वारा प्रधानाध्यापकों को नोटिस, अवकाश और वेतन में देरी, सेवा पुस्तिकाएं गायब—शिक्षकों ने निष्पक्ष जांच की उठाई मांग

रायबरेली जिले के विकास खंड बछरावां में बेसिक शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। यहां के शिक्षकों और शिक्षा से जुड़े संगठनों ने विभाग के अंदर चल रही व्यवस्था पर नाराजगी जताई है। राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ ने खंड शिक्षा अधिकारी को एक ज्ञापन सौंपते हुए कई गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि विभाग में इस समय भय, दबाव और अव्यवस्था का माहौल बना हुआ है, जिससे शिक्षकों को काम करने में दिक्कत हो रही है।

अनुचर द्वारा नोटिस जारी करने पर विवाद

सबसे बड़ा और चौंकाने वाला आरोप यह है कि बीआरसी (ब्लॉक रिसोर्स सेंटर) के आधिकारिक व्हाट्सएप ग्रुप में एक अनुचर (चपरासी) द्वारा 28 प्रधानाध्यापकों को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिए गए। यह मामला इसलिए भी गंभीर है क्योंकि प्रशासनिक नियमों के अनुसार ऐसा करने का अधिकार केवल उच्च अधिकारी को होता है, न कि किसी अनुचर को। इस घटना को नियमों और पद की मर्यादा का सीधा उल्लंघन माना जा रहा है। शिक्षकों का कहना है कि इस तरह की घटनाओं से विभाग में असुरक्षा और अविश्वास का माहौल बन रहा है।

कार्यालय में मनमानी और संवाद की कमी

शिक्षकों ने यह भी आरोप लगाया है कि विभाग में कामकाज का तरीका पूरी तरह से मनमाना हो गया है। अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच संवाद की कमी है, और समस्याओं का समाधान करने के बजाय दबाव बनाने की नीति अपनाई जा रही है। कई बार अनुचरों के माध्यम से नोटिस भेजे जाते हैं या कार्रवाई की धमकी दी जाती है, जिससे शिक्षकों का मनोबल गिर रहा है।

अवकाश मामलों में लापरवाही और मानसिक दबाव

अवकाश से जुड़े मामलों में भी गंभीर लापरवाही सामने आई है। शिक्षकों का कहना है कि चिकित्सा अवकाश (मेडिकल लीव) सहित अन्य छुट्टियों के आवेदन लंबे समय तक लंबित रखे जाते हैं। इतना ही नहीं, सभी जरूरी दस्तावेज और औपचारिकताएं पूरी करने के बाद भी इन अवकाशों को बिना स्पष्ट कारण के निरस्त कर दिया जाता है। इससे शिक्षकों को मानसिक तनाव झेलना पड़ रहा है। उन्होंने इसे मानसिक उत्पीड़न और शोषण करार दिया है।

सेवा पुस्तिकाएं गायब और वित्तीय अनियमितताएं

इसके अलावा, विभाग में रिकॉर्ड प्रबंधन को लेकर भी सवाल उठे हैं। बताया जा रहा है कि दो दर्जन से अधिक शिक्षकों की सेवा पुस्तिकाएं (सर्विस बुक) गायब हैं। यह एक गंभीर मामला है क्योंकि सेवा पुस्तिका में शिक्षक की पूरी नौकरी से जुड़ी जानकारी होती है। इनके गायब होने से भविष्य में शिक्षकों को बड़ी परेशानी हो सकती है।

वित्तीय मामलों में भी गड़बड़ियों की शिकायतें सामने आई हैं। कई मामलों की जांच महीनों से लंबित पड़ी है, जिससे पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं। वहीं, ई-सर्विस बुक और वेतन से जुड़े मामलों में लगातार देरी हो रही है। शिक्षकों को समय पर वेतन न मिलने या कागजी प्रक्रियाओं में देरी के कारण आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

मध्याह्न भोजन योजना में भी हस्तक्षेप के आरोप

मध्याह्न भोजन (एमडीएम) योजना, जो बच्चों के पोषण से जुड़ी एक महत्वपूर्ण योजना है, उसमें भी अनियमितताओं के आरोप लगे हैं। शिक्षकों का कहना है कि इस व्यवस्था में भी एक अनुचर का अनधिकृत हस्तक्षेप है, जो नियमों के खिलाफ है। इससे योजना की पारदर्शिता और गुणवत्ता पर असर पड़ सकता है।

जांच और कार्रवाई की मांग

इन सभी मुद्दों को लेकर राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ ने कड़ा रुख अपनाया है। संगठन ने मांग की है कि पूरे मामले की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच कराई जाए, ताकि सच्चाई सामने आ सके। साथ ही, उन्होंने यह भी कहा है कि सभी लंबित मामलों—जैसे अवकाश, वेतन, सेवा पुस्तिका और ई-सर्विस बुक—का समयबद्ध तरीके से निस्तारण किया जाए। संगठन ने दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की भी मांग की है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाएं दोबारा न हों और विभाग में एक स्वस्थ और पारदर्शी कार्य वातावरण बन सके।

ज्ञापन सौंपने वाले प्रतिनिधि मंडल में कार्यवाहक अध्यक्ष अभिनव चौहान, महामंत्री लोकतंत्र शुक्ल और संगीता सहित कई अन्य लोग शामिल रहे। उन्होंने साफ कहा कि अगर जल्द ही स्थिति में सुधार नहीं हुआ, तो वे आगे और बड़ा आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे।

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